संसद के आखिरी दो दिन: क्या FCRA और परिसीमन बिल पर खत्म होगा गतिरोध?
मानसून सत्र के आखिरी 2 दिनों में एफसीआरए और परिसीमन बिलों पर सस्पेंस। सरकार जेपीसी के जरिए विपक्ष को साधने की कोशिश में है।
संसद के मानसून सत्र में अब केवल 2 कामकाजी दिन शेष बचे हैं, लेकिन विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन विधेयक और परिसीमन संविधान संशोधन विधेयक के भविष्य को लेकर अनिश्चितता के बादल गहराते जा रहे हैं। सरकार और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध ने एक ऐसी स्थिति पैदा कर दी है जहां इन महत्वपूर्ण विधेयकों का पारित होना अब रणनीतिक समझौतों और कूटनीतिक प्रयासों पर निर्भर करता है। सदन के भीतर और बाहर दोनों पक्षों के बीच शह और मात का खेल जारी है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या आखिरी 48 घंटों में कोई बीच का रास्ता निकल पाएगा।
संसदीय कार्यवाही और प्रमुख विधेयकों पर गतिरोध
लोकसभा में आज की कार्यवाही के दौरान सरकार ने विपक्ष की कुछ मांगों पर लचीला रुख अपनाते हुए माहौल को शांत करने की कोशिश की। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में स्पष्ट किया कि सरकार 20 जुलाई को संसद भवन की ओर मार्च कर रहे छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई और लाठीचार्ज के मुद्दे पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। रिजिजू ने यह भी आश्वासन दिया कि गृह मंत्री अमित शाह स्वयं इस चर्चा का जवाब देंगे। हालांकि, उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें चर्चा से भागना नहीं चाहिए। इसके बावजूद, विपक्ष अपनी अन्य मांगों पर अड़ा हुआ है, जिसमें समाजवादी पार्टी द्वारा राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले पर चर्चा की मांग प्रमुखता से शामिल है।
FCRA बिल और ईसाई संगठनों की चिंताएं
सरकार एफसीआरए संशोधन बिल को इसी सत्र में पारित कराने के लिए प्रतिबद्ध दिख रही है। इस बिल को लेकर ईसाई संगठनों के मन में व्याप्त चिंताओं और भ्रांतियों को दूर करने के उद्देश्य से गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले सप्ताह उनके प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा भी की थी। हालांकि, कांग्रेस और दक्षिण भारत के प्रमुख दल जैसे डीएमके इस बिल का कड़ा विरोध कर रहे हैं और विपक्ष का तर्क है कि यह बिल कुछ समूहों को लक्षित करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस विरोध के कारण सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बना हुआ है, जिसे खत्म करने के लिए पर्दे के पीछे की कोशिशें जारी हैं।
सरकार और विपक्ष के बीच गिव एंड टेक की संभावना
आज हुई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) की बैठक में सरकार ने 20 जुलाई की छात्र कार्रवाई पर चर्चा की मांग तो मान ली, लेकिन एफसीआरए और परिसीमन बिलों पर कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई। सूत्रों के अनुसार, सरकार मानसून सत्र के बचे हुए 2 दिनों में इन बिलों को लाने का विकल्प खुला रखे हुए है। इसके लिए कांग्रेस और डीएमके जैसे दलों के साथ गिव एंड टेक यानी लेन-देन के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। ऐसी संभावना है कि सरकार एफसीआरए बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजने का प्रस्ताव दे सकती है, ताकि इसके बदले में परिसीमन बिल पर डीएमके और अन्य विपक्षी दलों का समर्थन हासिल किया जा सके।
राजनीतिक मुलाकातें और रणनीतिक कदम
कांग्रेस नेता के सी वेणुगोपाल के अनुसार, लोकसभा स्पीकर ने संकेत दिया है कि एफसीआरए बिल को जेपीसी को भेजा जा सकता है। इससे पहले प्रियंका गांधी वाड्रा और केरल के कांग्रेस सांसदों ने भी स्पीकर से मुलाकात की थी। हालांकि, कांग्रेस की मांग है कि बिल को केवल जेपीसी भेजने के बजाय सरकार इसे पूरी तरह वापस ले। दूसरी ओर, मिजोरम के मुख्यमंत्री ने अमित शाह से मुलाकात के बाद कहा था कि सरकार 12 अगस्त को इस बिल को चर्चा और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध कर सकती है। इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शरद पवार की एनसीपी के 8 लोकसभा सांसदों से मुलाकात की। हालांकि इस मुलाकात का आधिकारिक एजेंडा महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति बताया गया, लेकिन इसे परिसीमन बिल पर समर्थन जुटाने की कवायद से जोड़कर देखा जा रहा है।
परिसीमन और महिला आरक्षण का भविष्य
सरकारी सूत्रों का दावा है कि परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन को पारित कराने के लिए सरकार के पास आवश्यक दो तिहाई बहुमत मौजूद है। सरकार की रणनीति यह है कि एफसीआरए बिल को जेपीसी भेजकर विपक्ष की नाराजगी को कम किया जाए, जिससे परिसीमन बिल पर सहयोग की गुंजाइश बन सके। अब सवाल यह है कि यदि अगले 2 दिनों में परिसीमन बिल पारित नहीं हो पाता है, तो क्या इसे शीतकालीन सत्र तक टाल दिया जाएगा या फिर सरकार इसके लिए कोई विशेष सत्र बुलाएगी? इन सभी सवालों का जवाब अगले 48 घंटों की संसदीय कार्यवाही में मिल जाएगा।
What's Your Reaction?