ट्रैफिक चालान की वसूली के लिए बिजली बिल का उपयोग करें: सुप्रीम कोर्ट का सुझाव

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रैफिक चालान की वसूली के लिए इसे बिजली बिल से जोड़ने और बकाया जुर्माना न भरने पर वाहनों को ब्लैकलिस्ट करने का सुझाव दिया है।

Sep 28, 2026 - 18:35
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ट्रैफिक चालान की वसूली के लिए बिजली बिल का उपयोग करें: सुप्रीम कोर्ट का सुझाव

सुप्रीम कोर्ट ने देश में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर लगने वाले ई-चालान की वसूली को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और सख्त सुझाव दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर लोग अपने ट्रैफिक चालान का भुगतान नहीं कर रहे हैं, तो इस राशि को उनके बिजली के बिल में जोड़ दिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का तर्क है कि बिजली एक ऐसी अनिवार्य सेवा है जिसका बिल लोगों को हर हाल में भरना ही पड़ता है, अन्यथा उनका बिजली कनेक्शन काट दिया जाता है। कोर्ट ने कहा कि देश में जुर्माने की वसूली सुनिश्चित करने के लिए इस तरह का कोई प्रभावी तरीका निकालना अब अनिवार्य हो गया है।

वसूली की चुनौती पर जस्टिस पारदीवाला की टिप्पणी

इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कहा कि केवल ई-चालान जारी करते रहना समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस प्रशासन लाखों की संख्या में ई-चालान तो जारी कर सकता है, लेकिन सबसे बड़ा और असली सवाल इन चालानों के जरिए लगाए गए जुर्माने की वसूली का है। कोर्ट को दी गई जानकारी के अनुसार, वर्तमान में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ई-चालान के तहत कुल 45000 करोड़ रुपये की वसूली करनी बाकी है। अब तक के आंकड़ों के मुताबिक केवल 25000 करोड़ रुपये की ही वसूली हो पाई है, जो कि कुल बकाया राशि का एक बड़ा हिस्सा अभी भी लंबित दर्शाता है।

प्रशासनिक पाबंदियों का सुझाव

सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए काम करने की सलाह दी है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि जब तक किसी वाहन के सभी पुराने चालान क्लियर नहीं हो जाते, तब तक उस वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) के रिन्यूअल पर रोक लगा दी जानी चाहिए। इसके अलावा, डुप्लीकेट सर्टिफिकेट जारी करने और मालिक की जानकारी को अपडेट करने जैसी प्रक्रियाओं को भी तब तक रोक देना चाहिए जब तक जुर्माना नहीं भर दिया जाता। कोर्ट ने यह भी कहा कि फिटनेस सर्टिफिकेट भी केवल उन्हीं वाहनों को जारी किया जाना चाहिए जिनके नाम पर कोई बकाया चालान न हो।

वाहनों की ब्लैकलिस्टिंग और ओनरशिप ट्रांसफर पर रोक

जुर्माना न भरने वालों पर नकेल कसने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि संबंधित गाड़ियों को सरकारी परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट कर दिया जाना चाहिए। एक बार गाड़ी ब्लैकलिस्ट होने के बाद, उसका ओनरशिप ट्रांसफर यानी मालिकाना हक बदलना पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया जाना चाहिए। इससे वाहन मालिक अपनी गाड़ी तब तक किसी और को नहीं बेच पाएगा जब तक वह अपने सभी बकाया ट्रैफिक चालानों का भुगतान नहीं कर देता। यह कदम उन लोगों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी करेगा जो जुर्माना चुकाए बिना वाहन बेचने की कोशिश करते हैं।

ड्राइविंग लाइसेंस और पीयूसी पर सख्ती

अदालत ने ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर भी कड़े सुझाव दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, चालान न भरने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस के रिन्यूअल पर रोक लगनी चाहिए और जो लाइसेंस पहले से चालू हैं, उन्हें सस्पेंड करने के उपाय किए जाने चाहिए और इसके साथ ही, कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) को लेकर भी निर्देश दिया कि किसी भी सेंटर को उन गाड़ियों के लिए पीयूसी सर्टिफिकेट जारी करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए जिनके चालान लंबित हैं।

रैंडम चेकिंग और वाहन जब्ती

सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन एजेंसियों को और अधिक सक्रिय होने का सुझाव देते हुए कहा कि सड़कों पर गाड़ियों की रैंडम चेकिंग की जानी चाहिए। यदि चेकिंग के दौरान यह पाया जाता है कि किसी गाड़ी का ई-चालान लंबे समय से भुगतान नहीं किया गया है, तो उस गाड़ी को तुरंत जब्त करने के लिए आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए। कोर्ट का मानना है कि जब तक जुर्माने का सीधा असर व्यक्ति की अनिवार्य सुविधाओं और वाहन के उपयोग पर नहीं पड़ेगा, तब तक वसूली के आंकड़ों में सुधार करना कठिन होगा।

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