सहारनपुर में अखिलेश यादव की रैली रद्द: सपा ने बताया मौसम तो रालोद ने कहा 36 बिरादरी का विरोध

सहारनपुर में 6 सितंबर को होने वाली अखिलेश यादव की रैली रद्द। सपा ने मौसम को वजह बताया, जबकि रालोद ने इसे चौधरी परिवार के अपमान पर 36 बिरादरी का विरोध करार दिया।

Aug 27, 2026 - 09:35
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सहारनपुर में अखिलेश यादव की रैली रद्द: सपा ने बताया मौसम तो रालोद ने कहा 36 बिरादरी का विरोध

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीतिक जमीन पर समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच बढ़ती दूरियां अब स्पष्ट रूप से धरातल पर नजर आने लगी हैं। सहारनपुर में 6 सितंबर को होने वाली समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की प्रस्तावित रैली को अचानक रद्द कर दिया गया है। इस फैसले ने क्षेत्र के सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। जहां एक तरफ समाजवादी पार्टी इस स्थगन के पीछे खराब मौसम और भारी बारिश की चेतावनी को मुख्य कारण बता रही है, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय लोकदल ने इसे एक अलग ही राजनीतिक मोड़ दे दिया है।

सपा का पक्ष: इंद्रदेव की नाराजगी और मौसम का अलर्ट

सपा के राष्ट्रीय महासचिव और इस रैली के मुख्य आयोजक चौधरी रुद्रसैन ने बुधवार को औपचारिक रूप से रैली के स्थगित होने की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि 6 सितंबर को क्षेत्र में भारी बारिश की प्रबल संभावना है और मौसम विभाग ने भी इसको लेकर अलर्ट जारी किया है। ऐसी स्थिति में कार्यकर्ताओं और जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम को फिलहाल टालने का निर्णय लिया गया है। रुद्रसैन के अनुसार, रैली की नई तारीख का निर्धारण अखिलेश यादव से चर्चा करने के बाद किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि यह रैली अब अक्टूबर के अंतिम सप्ताह या नवंबर के पहले सप्ताह में आयोजित की जा सकती है।

रालोद का दावा: चौधरी परिवार का अपमान पड़ा भारी

रैली रद्द होने की खबर मिलते ही राष्ट्रीय लोकदल ने समाजवादी पार्टी पर हमला तेज कर दिया है। रालोद का कहना है कि यह फैसला मौसम की वजह से नहीं, बल्कि जनता के विरोध की वजह से लिया गया है। दरअसल, अखिलेश यादव द्वारा जयंत चौधरी पर की गई "चवन्नी से रुपया" वाली टिप्पणी के बाद पश्चिमी यूपी में जाट समाज और चौधरी परिवार के समर्थकों में भारी नाराजगी है। रालोद का दावा है कि इस टिप्पणी के विरोध में क्षेत्र की 36 बिरादरी एकजुट हो गई है और उन्होंने सपा की रैली के बहिष्कार का निर्णय लिया था। पार्टी का मानना है कि इसी जनाक्रोश और विरोध के डर से सपा ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं।

सियासी अखाड़ा बना सहारनपुर

सहारनपुर में दोनों दलों के बीच शक्ति प्रदर्शन की तैयारी जोरों पर थी और 3 सितंबर को जयंत चौधरी की "स्वाभिमान रैली" प्रस्तावित है और उसके ठीक तीन दिन बाद 6 सितंबर को अखिलेश यादव का "युवा योद्धा सम्मेलन" होना था। इन दोनों रैलियों के आमने-सामने होने से सहारनपुर पश्चिमी यूपी की सियासत का सबसे बड़ा केंद्र बन गया था। रालोद के राष्ट्रीय प्रवक्ता रोहित अग्रवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चौधरी परिवार उनका सम्मान और स्वाभिमान है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर परिवार पर कोई टिप्पणी की जाएगी, तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पैर रखने नहीं दिया जाएगा। रालोद इसे स्थानीय स्तर पर पैदा हुए स्वाभिमान की जीत बता रही है।

2027 की तैयारी और बदलता समीकरण

इस पूरे घटनाक्रम को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के चश्मे से देखा जा रहा है। पश्चिमी यूपी में जाट मतदाताओं पर रालोद की पकड़ और सपा के PDA समीकरण के बीच वर्चस्व की जंग तेज हो गई है। हालांकि रैली स्थगित हो गई है, लेकिन अखिलेश यादव का 2 सितंबर को सहारनपुर दौरा अभी भी प्रस्तावित है। वह वहां सपा के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी रुद्रसैन के आवास पर पहुंचेंगे। रैली के टलने और अखिलेश के इस दौरे ने सहारनपुर की राजनीति में सस्पेंस और बढ़ा दिया है। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में सपा और रालोद के बीच यह तल्खी क्या मोड़ लेती है।

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