भारत-जापान आर्थिक साझेदारी: 67 अरब डॉलर निवेश लक्ष्य जल्द होगा पूरा
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जापान दौरे पर 67 अरब डॉलर के निवेश लक्ष्य और भारतीय स्टार्टअप्स के लिए डीपटेक कॉरिडोर पर चर्चा की।
भारत और जापान के बीच आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के हालिया जापान दौरे के दौरान यह महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है कि भारत में जापानी कंपनियों की संख्या आने वाले कुछ वर्षों में दोगुनी होकर करीब 3000 तक पहुंच सकती है। वर्तमान में जापान की कई बड़ी और मध्यम स्तर की कंपनियां भारत के विशाल बाजार और बेहतर होते कारोबारी माहौल को देखते हुए निवेश के लिए पूरी तरह तैयार हैं। पीयूष गोयल ने विश्वास जताया है कि इससे न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
निवेश लक्ष्य और तकनीकी हस्तांतरण
जापान ने पिछले वर्ष भारत के लिए एक महत्वाकांक्षी निवेश लक्ष्य निर्धारित किया था। इसके तहत अगले 10 वर्षों में भारत में 67 अरब डॉलर के निवेश का टार्गेट रखा गया था। वाणिज्य मंत्री के अनुसार, इस लक्ष्य की दिशा में प्रगति काफी उत्साहजनक है और अब तक 10 अरब डॉलर से अधिक का निवेश भारत में आ चुका है। निवेश की वर्तमान गति को देखते हुए यह उम्मीद की जा रही है कि 67 अरब डॉलर का यह बड़ा लक्ष्य अगले कुछ ही वर्षों में हासिल कर लिया जाएगा। इसके अलावा, जापानी कंपनियां उन क्षेत्रों में भारत को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर यानी तकनीकी हस्तांतरण में भी मदद करेंगी जहां वर्तमान में भारत के पास उन्नत तकनीक की कमी है।
डीपटेक कैपिटल कॉरिडोर और स्टार्टअप इकोसिस्टम
इस दौरे के दौरान भारत और जापान के बीच एक डीपटेक कैपिटल कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव भी चर्चा में रहा। इस कॉरिडोर का मुख्य उद्देश्य भारतीय डीपटेक स्टार्टअप्स को जापानी वित्तीय संस्थानों से आवश्यक फंडिंग और पूंजी उपलब्ध कराना है। टोक्यो में जापानी उद्यमियों और स्टार्टअप्स के साथ आयोजित एक बैठक में पीयूष गोयल ने शार्क टैंक जैसे एक पिचिंग प्लेटफॉर्म की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक ऐसा मंच होना चाहिए जहां भारतीय स्टार्टअप जापानी निवेशकों के सामने अपने अभिनव विचार और बिजनेस मॉडल पेश कर सकें। इससे भारतीय नवाचार और जापानी पूंजी के बीच का अंतर कम होगा और स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी।
व्यापार घाटा और सीईपीए की समीक्षा
निवेश के सकारात्मक पहलुओं के बीच जापान के साथ बढ़ता व्यापार घाटा भारत के लिए एक चिंता का विषय बना हुआ है। पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि जापान के साथ भारत का व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है और इस मुद्दे पर जापान के विदेश मंत्री के साथ विस्तृत बातचीत हुई है। द्विपक्षीय व्यापार संतुलन को सुधारने के लिए व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) की समीक्षा की जाएगी, जिसके लिए जल्द ही टर्म्स ऑफ रेफरेंस तैयार किए जाएंगे। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और जापान के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 27 अरब 50 करोड़ डॉलर का रहा था। हालांकि, इस व्यापार में भारत का जापान को निर्यात केवल 6 अरब 30 करोड़ डॉलर ही रहा, जो व्यापार असंतुलन की स्थिति को दर्शाता है।
खाद्य निर्यात और गुणवत्ता मानक
पीयूष गोयल ने जापान में भारतीय खाद्य उत्पादों के निर्यात की अपार संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जापान के खाद्य आयात मानक अत्यंत कड़े हैं और भारत इन मानकों को लेकर जापान के साथ निरंतर बातचीत करेगा। विकसित देशों में अपना निर्यात बढ़ाने के लिए भारतीय कंपनियों को उत्पादों की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर विशेष ध्यान देना होगा। इस संदर्भ में उन्होंने महाराष्ट्र के एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा हाल ही में नियमों को कड़ाई से लागू किए जाने के प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।
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