सागर जहरीली शराब कांड: बंडा में 11 लोगों की मौत और 25 भर्ती

मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब पीने से 11 लोगों की मौत हो गई और 25 लोग अस्पताल में भर्ती हैं। प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और कई दुकानें सील की हैं।

Sep 6, 2026 - 13:35
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सागर जहरीली शराब कांड: बंडा में 11 लोगों की मौत और 25 भर्ती

मध्य प्रदेश के सागर जिले की बंडा तहसील में मौत का तांडव देखने को मिला है, जहां जहरीली शराब पीने से अब तक 11 लोगों की जान जा चुकी है। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है और पुलिस-प्रशासन में हड़कंप मच गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जहरीली शराब के सेवन से न केवल 11 लोगों की मौत हुई है, बल्कि करीब 4 लोग अत्यंत गंभीर रूप से बीमार हैं। इसके अलावा, कुल 25 लोगों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पीड़ितों को शुरुआत में सिविल अस्पताल बंडा ले जाया गया था, लेकिन उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए सागर जिला अस्पताल रेफर कर दिया है।

प्रभावित गांव और प्रशासनिक सक्रियता

इस भीषण हादसे का असर बंडा विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में देखने को मिला है। जहरीली शराब के शिकार हुए लोग मुख्य रूप से पाटन, नौराज, डिलौना, बमूरा, हिनौती और गूगराखुर्द जैसे गांवों के रहने वाले बताए जा रहे हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय विधायक वीरेन्द्र सिंह लम्बरदार, कलेक्टर प्रतिभा पाल, पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया, सीएमएचओ डॉ और देवेश पटैरिया और पूर्व विधायक तरवर सिंह लोधी तुरंत अस्पताल पहुंचे। इन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और अस्पताल में भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। प्रशासन ने डॉक्टरों को घायलों के समुचित उपचार के लिए कड़े निर्देश दिए हैं।

शराब की दुकानों पर कार्रवाई और सैंपलिंग

हादसे के तुरंत बाद प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए क्षेत्र की कई शराब दुकानों को सील कर दिया है। जिन स्थानों पर दुकानों को सील किया गया है, उनमें बरेठी, बंडा, शाहगढ़, मगरधा, विनायका, दलपतपुर और बरायठा शामिल हैं और पुलिस और आबकारी विभाग की टीमें इन दुकानों से शराब के सैंपल ले रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि जहरीली शराब का स्रोत क्या था। इस कार्रवाई का उद्देश्य क्षेत्र में और अधिक जनहानि को रोकना है और प्रशासन पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कह रहा है।

आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

इस पूरी घटना ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जानकारी सामने आई है कि हाल ही में आबकारी कार्यालय में बांबे व्हिस्की के नाम से बिक रही नकली शराब की शिकायत दर्ज कराई गई थी। यह शिकायत शहर के ही एक लाइसेंसी शराब ठेकेदार ने की थी, लेकिन आरोप है कि विभाग ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इतना ही नहीं, इस हादसे से महज 4 दिन पहले आबकारी विभाग की एक बैठक हुई थी, जिसमें लाइसेंसी ठेकेदारों ने इलाके में बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध शराब के कारोबार और नकली शराब की बिक्री पर कड़ी नाराजगी जताई थी। ठेकेदारों ने अधिकारियों को चेतावनी दी थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इन चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया, जिसका परिणाम आज 11 मौतों के रूप में सामने आया है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और न्यायिक जांच की मांग

सागर के इस शराब कांड पर अब राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मध्य प्रदेश अब शराब माफियाओं के कब्जे में आ गया है। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि सागर में पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं और वे खुद पीड़ितों से मिलने वहां गए थे। पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश के माता-पिता इस नशे के जाल के खिलाफ खून के आंसू रो रहे हैं, लेकिन सरकार मौन साधे बैठी है। उन्होंने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने और दोषियों को 24 घंटे के भीतर जेल भेजने की मांग की है। फिलहाल, प्रशासन जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है ताकि मौतों के वास्तविक कारणों और घटना की पूरी सच्चाई स्पष्ट हो सके।

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