होर्मुज जलडमरूमध्य पर महायुद्ध: अमेरिका के भीषण हमले और ईरान का पलटवार
अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज को लेकर युद्ध तेज। कुवैत के जल संयंत्र पर हमला और ईरान के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान। तेल की कीमतें 86 डॉलर के पार।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष शनिवार को अपने सबसे भीषण चरण में पहुंच गया। दोनों देशों ने एक-दूसरे के सामरिक ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर विनाशकारी हमले किए हैं। जिस तरह से दोनों पक्ष एक-दूसरे की क्षमताओं को नष्ट करने पर तुले हुए हैं, उससे क्षेत्र में शांति की संभावनाएं फिलहाल धूमिल नजर आ रही हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि लगातार सातवीं रात किए गए इन हवाई हमलों में ईरान के निगरानी स्थलों, सैन्य लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे, भूमिगत हथियार भंडारण केंद्रों और समुद्री युद्ध क्षमताओं को विशेष रूप से निशाना बनाया गया है। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना है जिसके जरिए वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बाधित कर सकता है।
कुवैत के जल संयंत्र पर हमला और क्षेत्रीय तनाव
ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में क्षेत्रीय देशों पर मिसाइलों और ड्रोनों की बौछार कर दी है। कुवैत सरकार ने शनिवार को जानकारी दी कि उसने ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों के हमलों को विफल करने का प्रयास किया, लेकिन इस दौरान एक मिसाइल पानी को मीठा बनाने वाले डिसैलिनेशन प्लांट पर जा गिरी। इस हमले के कारण प्लांट में भीषण आग लग गई। यह संयंत्र कुवैत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी पीने के पानी की 90 प्रतिशत जरूरत इसी प्लांट से पूरी करता है। पिछले दो दिनों में कुवैत पर यह दूसरा बड़ा हमला था। सुरक्षा स्थिति को देखते हुए कुवैत ने अस्थायी रूप से अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया और कुवैत एयरवेज की सभी उड़ानों के समय में बदलाव किया गया। इसके अलावा, इराक ने इरबिल शहर के ऊपर ईरानी ड्रोनों को मार गिराने का दावा किया है, जबकि जॉर्डन की रक्षा प्रणालियों ने भी अपनी सीमा में प्रवेश करने वाली मिसाइलों को ध्वस्त कर दिया। बहरीन में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है जहां कई बार हवाई हमले के सायरन बजाए गए।
जान-माल का भारी नुकसान और बुनियादी ढांचे की तबाही
इस युद्ध में दोनों पक्षों को भारी मानवीय क्षति उठानी पड़ी है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, हाल के अमेरिकी हमलों में अब तक 46 लोगों की जान जा चुकी है और 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं। शुक्रवार को एक प्रमुख पुल पर हुए हमले में ही 8 लोगों की मौत हो गई थी। दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सोमवार से अब तक 13 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें थलसेना के 10 और नौसेना के 3 जवान शामिल हैं। युद्ध की शुरुआत से अब तक कुल 14 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है और 427 सैनिक घायल हुए हैं। ईरान के बुनियादी ढांचे को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है। सरकारी टेलीविजन के अनुसार, दक्षिणी होर्मोज़गान प्रांत में कई पुलों को नष्ट कर दिया गया है ताकि बंदर अब्बास बंदरगाह का संपर्क देश के मध्य भाग और राजधानी तेहरान से काटा जा सके।
ऊर्जा संकट और वैश्विक तेल बाजार पर प्रभाव
ईरान ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि अमेरिकी बमबारी में उसके बिजली घरों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। ऊर्जा मंत्रालय ने दक्षिणी प्रांतों के नागरिकों से बिजली की भारी बचत करने की अपील की है, हालांकि प्रभावित संयंत्रों के नाम उजागर नहीं किए गए हैं। इस युद्ध का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित करने के कारण कच्चे तेल की कीमतें 86 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या तीन सप्ताह के सबसे निचले स्तर पर आ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि अमेरिका ईरान में बड़ी सफलता की ओर बढ़ रहा है और इसके परिणाम जल्द ही दुनिया देखेगी। हालांकि, ट्रंप पर घरेलू स्तर पर युद्ध समाप्त करने और पश्चिम एशिया के इस लंबे संघर्ष से बाहर निकलने का राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है।
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