4 साल बाद रूस की कैद से छूटे अमेरिकी नागरिक स्टीफन हबर्ड, ट्रंप और पुतिन की बातचीत से बनी बात
रूस ने 4 साल से अधिक समय से हिरासत में रहे अमेरिकी नागरिक स्टीफन हबर्ड को रिहा कर दिया है। जानिए इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया और ट्रंप-पुतिन बातचीत की पूरी कहानी।
रूस ने 4 साल से अधिक समय से हिरासत में रखे गए अमेरिकी नागरिक स्टीफन हबर्ड को रिहा कर दिया है। उनकी रिहाई में न केवल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से हुई बातचीत, बल्कि अमूल्य अमेरिकी कूटनीतिक प्रयासों की भी बेहद अहम भूमिका मानी जा रही है। यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में खासी चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि रूस और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण संबंधों के दौर में इस तरह के मामलों का समाधान निकलना एक बड़ा मील का पत्थर माना जाता है।
सेंट पीटर्सबर्ग से सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने बुधवार को अमेरिकी नागरिक स्टीफन हबर्ड को रिहा किया। हबर्ड 4 साल से भी ज्यादा समय से रूस की हिरासत में बंदी बनाकर रखे गए थे। वह अमेरिका के मिशिगन राज्य के रहने वाले एक सम्मानित रिटायर्ड शिक्षक हैं। अमेरिका के विदेश विभाग ने आधिकारिक तौर पर उन्हें गलत तरीके से हिरासत में रखा गया अमेरिकी नागरिक घोषित किया था। अमेरिकी मीडिया संस्थान CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी यह बहुप्रतीक्षित रिहाई ऐसे महत्वपूर्ण समय पर हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ रूस के सेंट पीटर्सबर्ग शहर के आधिकारिक दौरे पर पहुंचे हुए हैं।
ट्रंप ने पुतिन के सामने उठाया था हबर्ड का मामला
स्टीफन हबर्ड की रिहाई से ठीक पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एक बयान में स्पष्ट किया था कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई सीधी बातचीत के दौरान इस अमेरिकी नागरिक का गंभीर मामला उठाया था और cNN की रिपोर्ट के अनुसार, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के रूस दौरे से ठीक पहले एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने भी हबर्ड की रिहाई के लिए चल रहे कूटनीतिक प्रयासों की आंतरिक जानकारी साझा की थी। उस अधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि विशेष दूत की इस रूस यात्रा के दौरान गलत तरीके से हिरासत में रखे गए अमेरिकी नागरिक स्टीफन हबर्ड की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए जाने की पूरी उम्मीद है, जो अंततः सफल साबित हुए।
कौन हैं स्टीफन हबर्ड और रूस ने क्यों किया था डिटेन?
स्टीफन हबर्ड अमेरिका के मिशिगन के रहने वाले एक रिटायर्ड शिक्षक हैं, जिन्होंने अपने जीवन के कई दशकों तक विदेशों में रहकर अंग्रेजी पढ़ाने का सराहनीय कार्य किया था और वर्ष 2014 में वह यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में स्थित इजियम शहर में जाकर बस गए थे। इसके बाद फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य हमला शुरू किया था। इसी दौरान रूसी सेना ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इजियम शहर पर पूरी तरह कब्जा कर लिया था और इसी सैन्य कब्जे के दौरान हबर्ड को रूसी सेना ने पकड़ लिया था। स्टीफन हबर्ड का यह पूरा कानूनी और कूटनीतिक मामला इसी क्षेत्र में उनकी उपस्थिति और यूक्रेन में जारी विनाशकारी युद्ध से सीधे तौर पर जुड़ा रहा है।
रूस ने यूक्रेनी सेना के साथ लड़ने का लगाया था गंभीर आरोप
रूसी अभियोजकों ने स्टीफन हबर्ड के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्होंने इजियम शहर में यूक्रेनी सेना के साथ मिलकर रूसी सैनिकों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। रूसी सरकारी मीडिया द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, अभियोजन पक्ष का दावा था कि हबर्ड ने इसके लिए लगभग 1000 अमेरिकी डॉलर प्रति महीने के भुगतान वाले एक सैन्य अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, स्टीफन हबर्ड की बहन पेट्रीसिया हबर्ड फॉक्स ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने रूसी मीडिया और अभियोजकों के इस दावे को पूरी तरह झूठ और बेबुनियाद बताया था। इसके बावजूद अमेरिका ने हबर्ड को लगातार गलत तरीके से हिरासत में रखा गया नागरिक माना और अब उनकी यह रिहाई रूस और अमेरिका के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
रूस में डिटेन किए गए अमेरिकी नागरिकों की रिहाई पर जोर
स्टीफन हबर्ड की यह रिहाई रूस की जेलों या हिरासत केंद्रों में रखे गए अन्य अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित वापस स्वदेश लाने के प्रयासों में एक नया और सकारात्मक घटनाक्रम है। रूस और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय कूटनीतिक वार्ताओं में ऐसे कैदियों के आदान-प्रदान या रिहाई के मामले कई बार सबसे अहम और संवेदनशील मुद्दे बनते रहे हैं। इससे पहले इसी साल अगस्त के महीने में अमेरिकी मरीन के पूर्व सैनिक रॉबर्ट गिलमैन को भी रूस से रिहा किया गया था। उन्हें यह रिहाई विशेष रूप से मानवीय आधार पर प्रदान की गई थी, क्योंकि उनकी शारीरिक सेहत को लेकर गंभीर चिंताएं लगातार जताई जा रही थीं। रिपोर्टों के अनुसार, जब रॉबर्ट गिलमैन एक विशेष चिकित्सा विमान के जरिए वापस अमेरिका लौटे थे, तब उनका वजन काफी कम हो चुका था और वह बेहद कमजोर एवं दयनीय स्थिति में दिखाई दे रहे थे।
रॉबर्ट गिलमैन के साथ हिरासत के दौरान यातना देने का भी गंभीर आरोप
रॉबर्ट गिलमैन की रिहाई के लिए अमेरिका में अभियान चलाने वाले मानवाधिकार संगठनों ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया था कि रूस में लंबी हिरासत के दौरान उन्हें गंभीर यातनाएं दी गई थीं और गिलमैन का यह चर्चित मामला भी रूस में हिरासत में रखे गए अमेरिकी नागरिकों की दयनीय और असुरक्षित स्थिति को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना था। अब स्टीफन हबर्ड की ताजा रिहाई के साथ एक बार फिर से ऐसे सभी मामलों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान केंद्रित हुआ है। इन तमाम घटनाओं और वार्ताओं के बीच अमेरिका अपने अन्य नागरिकों को भी सुरक्षित वापस लाने के लिए रूस के साथ कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से बातचीत लगातार जारी रखे हुए है।
पुतिन से मुलाकात के लिए सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचे विटकॉफ
अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ की यह महत्वपूर्ण सेंट पीटर्सबर्ग यात्रा रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे खूनी युद्ध को समाप्त कराने के लिए जारी व्यापक कूटनीतिक प्रयासों के एक हिस्से के रूप में हुई है। कतर के प्रतिष्ठित समाचार चैनल अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, विशेष दूत विटकॉफ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक पूर्व-निर्धारित उच्चस्तरीय बैठक में शामिल होने के लिए विशेष रूप से इस शहर में पहुंचे हैं। इस पूरी कूटनीतिक हलचल के बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि इस रूस-यूक्रेन युद्ध को जल्द से जल्द कूटनीतिक माध्यमों से खत्म किया जाए। उन्होंने अमेरिका और अपने अन्य यूरोपीय सहयोगी देशों से शांति स्थापित करने की इन तमाम कोशिशों को और अधिक गति देने तथा मदद करने का जोरदार आग्रह किया है।
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