Rupee vs Dollar:'रुपए' ने 'डॉलर' का घमंड तोड़ा, एशियाई बाजारों में बढ़ाई इज्जत, तेजी दिखी प्रचंड
Rupee vs Dollar: एक दिन के अवकाश के बाद खुले करेंसी मार्केट में रुपए में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है. जानकारों का मानना है कि करेंसी मार्केट में रुपए को
Rupee vs Dollar: गुरुवार को भारत के विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे की छलांग लगाकर 86.79 के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर इंडेक्स में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में कमी के चलते रुपये में मजबूती देखने को मिली है। बुधवार को छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती के अवसर पर बाजार बंद था, लेकिन प्राइवेट एक्सचेंज डेटा में रुपये की मजबूती पहले ही दिख रही थी।
डॉलर इंडेक्स में गिरावट से मिला समर्थन
डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत को दर्शाता है, गुरुवार को 0.16% की गिरावट के साथ 107 पर कारोबार कर रहा था। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी रुपये की मजबूती में सहायक रही। ब्रेंट क्रूड 0.34% गिरकर 75.78 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
विदेशी निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर
हालांकि घरेलू इक्विटी बाजार में गिरावट देखी गई, लेकिन रुपये को सपोर्ट मिला। बीएसई सेंसेक्स 297.33 अंकों (0.39%) की गिरावट के साथ 75,641.85 पर और निफ्टी 69.25 अंकों (0.3%) की गिरावट के साथ 22,863.65 पर बंद हुआ। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बुधवार को 1,881.30 करोड़ रुपये की इक्विटी की बिक्री की, जिससे विदेशी पूंजी का आउटफ्लो देखने को मिला।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए संकेत
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के फरवरी बुलेटिन में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक गतिविधियों में तेजी के संकेत मिल रहे हैं। वाहन बिक्री, हवाई यातायात, स्टील खपत और GST ई-वे बिल जैसे इंडिकेटर्स इस ओर इशारा कर रहे हैं कि वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी छमाही में आर्थिक गतिविधियां और तेज़ हो सकती हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर मजबूत अमेरिकी डॉलर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बना सकता है।
रुपये की आगे की चाल
सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के एमडी अमित पबारी के अनुसार, डॉलर-रुपया जोड़ी 86.60-87.20 के दायरे में कारोबार कर सकती है। 87.20 का स्तर एक महत्वपूर्ण प्रतिरोध बिंदु बना हुआ है, जबकि 86.50 रुपये के लिए एक अहम समर्थन स्तर हो सकता है। यदि रुपया 86.50 से नीचे जाता है, तो यह 85.80-86.00 के स्तर तक गिर सकता है।
निष्कर्ष
भारतीय रुपये की मजबूती घरेलू और वैश्विक कारकों का परिणाम है। डॉलर इंडेक्स की कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट रुपये को समर्थन प्रदान कर रही है। हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार में कुछ दबाव बना हुआ है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था के सकारात्मक संकेत आने वाले दिनों में रुपये की स्थिरता को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
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