Trump-Zelenskyy Conflict:जेलेंस्की के US को लेकर नरम पड़े तेवर, कहा- राष्ट्रपति पद छोड़ दूंगा, बस मिले ये गारंटी
Trump-Zelenskyy Conflict: अमेरिका को लेकर वोलोडिमिर जेलेंस्की के तेवर सॉफ्ट हो रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अगर अमेरिका उन्हें कुछ गारंटी दे तो वह राष्ट्रपति पद
Trump-Zelenskyy Conflict: हाल ही में व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के बीच एक गर्मागर्म बहस देखने को मिली। इस बहस के बाद वैश्विक राजनीति में हलचल मच गई, और यह चर्चा जोरों पर है कि क्या जेलेंस्की का आक्रामक रवैया यूक्रेन के लिए अमेरिकी मदद को रोक सकता है? हालांकि, ताज़ा घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि जेलेंस्की अब अमेरिका को लेकर नरम रुख अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।
जेलेंस्की ने अमेरिका से क्या गारंटी मांगी?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जेलेंस्की ने अमेरिका से कुछ ठोस गारंटी मांगी हैं। उन्होंने कहा है कि यदि अमेरिका उनकी मांगी गई गारंटियों को पूरा करता है, तो वे अपने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के लिए भी तैयार हैं और एक मिनरल डील (खनिज संसाधनों पर समझौता) पर हस्ताक्षर करने के लिए भी राजी हो सकते हैं।
जेलेंस्की की प्रमुख मांगें:
- यूक्रेन की नाटो सदस्यता: जेलेंस्की ने साफ कहा कि अगर यूक्रेन को नाटो (NATO) की सदस्यता मिल जाती है, तो वे पद छोड़ने के लिए तैयार हैं।
- सुरक्षा की गारंटी: जेलेंस्की ने अमेरिका से मांग की है कि यूक्रेन को सुरक्षा की पुख्ता गारंटी दी जाए ताकि भविष्य में किसी भी रूसी हमले से देश सुरक्षित रह सके।
- शांति समझौते में कोई क्षेत्रीय समझौता नहीं: जेलेंस्की इस बात पर अड़े हुए हैं कि रूस के साथ किसी भी शांति समझौते में यूक्रेन को अपनी जमीन का कोई हिस्सा नहीं छोड़ना चाहिए।
ट्रंप से दोबारा मिलने को तैयार जेलेंस्की
भले ही हालिया बैठक में दोनों नेताओं के बीच गर्मागर्म बहस हुई हो, लेकिन जेलेंस्की ने संकेत दिया है कि वे डोनाल्ड ट्रंप से दोबारा मिलने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यदि ट्रंप उन्हें रचनात्मक बातचीत के लिए आमंत्रित करते हैं, तो वे बातचीत को आगे बढ़ाने व्हाइट हाउस जाने को तैयार हैं।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, जेलेंस्की ने कहा,
"अगर हमें वास्तविक समस्याओं का हल निकालना है और गंभीर मुद्दों पर चर्चा करनी है, तो मैं ज़रूर वहां जाऊंगा।"
व्हाइट हाउस में ट्रंप-जेलेंस्की की बहस
इस बहस की जड़ शुक्रवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में हुई मीटिंग में छिपी है। ट्रंप ने आरोप लगाया कि जेलेंस्की वास्तव में शांति नहीं चाहते हैं और यदि उन्होंने समझौता नहीं किया तो अमेरिका यूक्रेन को मिल रही मदद रोक देगा।
गहमा-गहमी के मुख्य बिंदु:
- ट्रंप: "अगर आप शांति चाहते हैं, तो समझौता करें। अगर नहीं, तो अमेरिका अब इस जंग का हिस्सा नहीं रहेगा।"
- जेलेंस्की: "हम शांति चाहते हैं, लेकिन सुरक्षा गारंटी के बिना नहीं।"
- ट्रंप: "हमने आपको 350 अरब डॉलर और सैन्य सहायता दी है। अगर हम मदद नहीं देते, तो यह युद्ध दो हफ्ते में खत्म हो जाता।"
- जेडी वेंस (अमेरिका के उपराष्ट्रपति): "युद्ध का अंत कूटनीति से हो सकता है।"
- जेलेंस्की: "आप किस तरह की कूटनीति की बात कर रहे हैं?"
- वेंस: "वो कूटनीति जिससे आपके देश की बर्बादी रोकी जा सके।"
क्या अमेरिका-यूक्रेन रिश्ते टूटने की कगार पर हैं?
व्हाइट हाउस में हुई इस बहस के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यूक्रेन को अमेरिकी सहायता मिलनी बंद हो जाएगी?
- रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन पहले ही कह चुके हैं कि ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद यूक्रेन को अमेरिका से कम समर्थन मिलेगा।
- अमेरिकी कांग्रेस में भी कई सांसदों ने यूक्रेन को दी जा रही मदद की समीक्षा करने की मांग की है।
- कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जेलेंस्की ने ट्रंप से दोबारा मुलाकात की और कुछ समझौते किए, तो यूक्रेन को मदद मिलती रह सकती है।
निष्कर्ष
व्हाइट हाउस में ट्रंप और जेलेंस्की की बहस ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। अमेरिका-यूक्रेन संबंधों की दिशा अब इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या ट्रंप जेलेंस्की को जरूरी सुरक्षा गारंटी देने के लिए तैयार होते हैं या नहीं। साथ ही, जेलेंस्की की अमेरिका को लेकर बदली हुई रणनीति यह दिखाती है कि वे अपने देश के लिए मदद बचाने के प्रयास में हैं। अब देखना होगा कि आने वाले हफ्तों में यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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