Bihar Elections 2025:महुआ सीट पर NDA में घमासान, चिराग, कुशवाहा और जदयू की दावेदारी, जानें क्यों है खास?
बिहार विधानसभा चुनाव में महुआ सीट को लेकर एनडीए में सियासी घमासान तेज हो गया है। चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और अब जदयू भी इस महत्वपूर्ण सीट पर दावेदारी ठोक रहे हैं। जानें क्यों खास है महुआ सीट और क्या है पूरा विवाद।
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया जारी है, लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में सीटों के बंटवारे को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है और खासकर वैशाली जिले की महुआ विधानसभा सीट को लेकर गठबंधन के भीतर तनातनी चरम पर है। पहले यह विवाद लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बीच था, लेकिन अब जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने भी इस सीट पर अपनी दावेदारी ठोक दी है और
उपेंद्र कुशवाहा की नाराजगी और JDU का दावा
एनडीए के सीट बंटवारे में महुआ सीट चिराग पासवान के हिस्से में आई थी, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा इसे अपने बेटे के लिए चाहते हैं और इस पर अपना दावा नहीं छोड़ रहे हैं। उन्होंने अपने उम्मीदवार को नामांकन दाखिल करने से भी रोक दिया था और दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, चिराग पासवान को भी फिलहाल इस सीट पर नामांकन रोकने को कहा गया है। इस बीच, जदयू ने भी महुआ पर दावेदारी ठोक दी है। पिछली बार जदयू की उम्मीदवार आसमा परवीन थीं, जिनके समर्थक मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गए और सीट को "जदयू की" बताया।
क्यों अहम है महुआ सीट?
महुआ विधानसभा सीट रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह वैशाली जिले की एक हाईप्रोफाइल सीट है, जहां यादव, मुस्लिम और कुशवाहा मतदाताओं की बहुलता है। इस सीट पर यादव और मुस्लिम आबादी करीब 35% है, जो राजद और लालू परिवार के लिए पारंपरिक कोर वोटर माने जाते हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव इसी सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। यही वजह है कि एनडीए के तीनों सहयोगी दल इस सीट पर अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहते हैं, जिससे भाजपा के लिए यह एक बड़ा सिरदर्द बन गया है।
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