भारत और उज्बेकिस्तान ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी का किया ऐलान, 2030 तक 5 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदला है। 2030 तक 5 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य रखा गया है और एआई, रक्षा व खेलों में सहयोग बढ़ेगा।

Aug 30, 2026 - 21:35
 0  0
भारत और उज्बेकिस्तान ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी का किया ऐलान, 2030 तक 5 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नए और ऐतिहासिक स्तर पर ले जाते हुए अपनी साझेदारी को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह फैसला दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के 15 साल पूरे होने के विशेष अवसर पर लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बदलाव को रेखांकित करते हुए कहा कि इस नई साझेदारी के तहत तेजी से काम करने और ठोस परिणाम प्राप्त करने के लिए एक अत्यंत महत्वाकांक्षी एजेंडा तैयार किया गया है, जो दोनों देशों के बीच सहयोग के नए आयाम स्थापित करेगा।

व्यापारिक लक्ष्य और आर्थिक सहयोग

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और द्विपक्षीय व्यापार पहले ही 1 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर चुका है। भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए, दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक इस व्यापारिक आंकड़े को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर करने का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बाजार तक पहुंच, कनेक्टिविटी, बैंकिंग और भुगतान प्रणालियों से संबंधित विभिन्न मुद्दों को सुलझाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह रणनीतिक कदम दोनों देशों के व्यवसायों और निवेशकों के लिए एक सुगम वातावरण तैयार करेगा।

उभरती तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग

इस नई साझेदारी के ढांचे के तहत, दोनों देश डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और महत्वपूर्ण खनिजों की खोज जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में अपना सहयोग बढ़ाएंगे और इसके अलावा, स्वच्छ ऊर्जा, अंतरिक्ष अनुसंधान और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी का विस्तार किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन उभरते क्षेत्रों में सहयोग भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है। साथ ही, बुनियादी ढांचे के विकास में आपसी लाभ वाले सहयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है।

कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्रों में मजबूती

दोनों देशों ने कृषि और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्रों में अपने सहयोग को और अधिक मजबूत करने का संकल्प लिया है। उज्बेकिस्तान के बागवानी के व्यापक अनुभव और भारत की आधुनिक कृषि पद्धतियों को मिलाकर खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाएंगे। स्वास्थ्य के क्षेत्र में, उज्बेकिस्तान की औषधीय जड़ी-बूटियों को भारत की आयुर्वेद विशेषज्ञता के साथ जोड़ने पर विशेष बल दिया गया है। पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में हुआ समझौता दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

शहरों और राज्यों के बीच सीधा संपर्क

भारत और उज्बेकिस्तान के शहरों और राज्यों के बीच सीधी साझेदारी स्थापित करने की एक नई योजना बनाई गई है। यह पहल शहरी प्रबंधन, उद्योग, शिक्षा, पर्यटन और संस्कृति जैसे विविध क्षेत्रों में सीधे संपर्क को बढ़ावा देगी। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के संबंध केवल उनकी राजधानियों तक ही सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि इन्हें समाज के विभिन्न स्तरों और क्षेत्रों तक फैलना चाहिए ताकि जमीनी स्तर पर सहयोग बढ़ सके।

रक्षा और सुरक्षा सहयोग का सुदृढ़ीकरण

भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को आपसी गहरे विश्वास का प्रतीक बताया है। भविष्य में, दोनों देशों की रक्षा कंपनियों और उद्योगों के बीच सीधे संपर्क, संयुक्त उत्पादन और संयुक्त विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। दोनों देशों ने आतंकवाद, चरमपंथ और अलगाववाद के प्रति जीरो टॉलरेंस के अपने साझा संकल्प को एक बार फिर दोहराया है। सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग को और अधिक मजबूत करने पर पूर्ण सहमति बनी है ताकि क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना किया जा सके।

साझा विरासत और शिक्षा को प्राथमिकता

दोनों देशों की साझा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को उनके द्विपक्षीय संबंधों की सबसे मजबूत नींव माना गया है। भारत और उज्बेकिस्तान मिलकर उज्बेकिस्तान में स्थित बौद्ध विरासत से जुड़ी जगहों को संरक्षित करने के लिए काम करेंगे और छात्रों और पेशेवरों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ाना भी प्राथमिकता सूची में शामिल है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष सहयोग कार्यक्रम पर सहमति बनी है। इसके अतिरिक्त, उज्बेकिस्तान में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए स्कॉलरशिप की घोषणा की गई है।

खेलों में बढ़ता सहयोग: शतरंज, कुराश और कबड्डी

खेल के क्षेत्र में भी भारत-उज्बेकिस्तान की साझेदारी को नई ऊर्जा दी जा रही है। इसमें कुराश और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों के साथ-साथ शतरंज पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल गोवा में आयोजित FIDE वर्ल्ड कप में 20 वर्षीय उज्बेक ग्रैंडमास्टर सिंदारोव की शानदार जीत को याद किया। उन्होंने आगामी नवंबर में सिंदारोव और भारत के 20 वर्षीय शतरंज चैंपियन डी गुकेश के बीच होने वाले मुकाबले का जिक्र करते हुए कहा कि पूरी दुनिया की नजरें इस मैच पर होंगी। प्रधानमंत्री ने अगले महीने समरकंद में होने वाले शतरंज ओलंपियाड के लिए भी अपनी शुभकामनाएं दीं।

मध्य एशिया में भारत की अहम धुरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उज्बेकिस्तान मध्य एशिया के केंद्र में स्थित है और इस पूरे क्षेत्र के साथ भारत के बढ़ते जुड़ाव का मुख्य केंद्र है। युवा शक्ति, नवाचार, समावेशी विकास और आधुनिक तकनीक दोनों देशों की साझा प्राथमिकताएं हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत-उज्बेकिस्तान की यह मजबूत साझेदारी मध्य एशिया में शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए एक बड़ी ताकत के रूप में उभरेगी। उज्बेकिस्तान की आजादी की 35वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रधानमंत्री ने वहां के राष्ट्रपति और नागरिकों को भारत की ओर से हार्दिक बधाई भी दी।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow