Parliament Session:संसद में PM-CM-मंत्रियों को हटाने वाला बिल पेश, विपक्षी सांसदों ने फाड़ी कॉपी
Parliament Session: गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में PM-CM और मंत्रियों को हटाने वाला बिल पेश कर दिया है. गृह मंत्री के बिल पेश करने के बाद इसको लेकर विपक्ष ने जमकर विरोध किया. विपक्षी सांसदों ने बिल की कॉपी फाड़कर गृहमंत्री की तरफ फेंकी. AIMIM प्रमुख
Parliament Session: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश किया, जिनमें संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025, और जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 शामिल हैं। इन विधेयकों का उद्देश्य गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार होने वाले प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, या मंत्रियों को उनके पद से हटाने का प्रावधान करना है। हालांकि, इन बिलों को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ, और विपक्षी दलों ने इसका पुरजोर विरोध किया।
बिलों का विवरण
1. संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025
इस विधेयक का लक्ष्य संविधान के अनुच्छेद 75, 164, और 239एए में संशोधन करना है, ताकि गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार होने वाले प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रिपरिषद के मंत्रियों, राज्यों और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के मुख्यमंत्रियों, या मंत्रिपरिषद के मंत्रियों को पद से हटाने का कानूनी ढांचा तैयार किया जा सके। वर्तमान में संविधान में ऐसे प्रावधानों की कमी है।
2. केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025
यह विधेयक केंद्र शासित प्रदेश सरकार अधिनियम, 1963 की धारा 45 में संशोधन का प्रस्ताव करता है। इसका उद्देश्य गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार होने वाले केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों या मंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान करना है।
3. जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025
यह विधेयक जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 54 में संशोधन का प्रस्ताव करता है, ताकि गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार होने वाले मुख्यमंत्री या मंत्रियों को हटाने का कानूनी आधार तैयार किया जा सके।
विपक्ष का विरोध
इन विधेयकों को लेकर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे संविधान के शक्ति-विभाजन (Separation of Powers) के सिद्धांत का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि यह बिल जनता द्वारा चुनी गई सरकार के अधिकारों को कमजोर करता है और कार्यकारी एजेंसियों को मनमाने ढंग से कार्रवाई की खुली छूट देता है। ओवैसी ने इसे लोकतंत्र पर हमला करार देते हुए चेतावनी दी कि यह देश को "पुलिस स्टेट" में बदलने की दिशा में एक कदम है।
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भी बिल का विरोध करते हुए कहा कि यह संवेदनशील विधेयक है और इस पर विस्तृत चर्चा की आवश्यकता है। उन्होंने इसे राजनीतिक दुरुपयोग का हथियार बताते हुए इसका पुरजोर विरोध किया। सपा नेता धर्मेंद्र यादव ने तीनों विधेयकों को संविधान-विरोधी और न्याय-विरोधी करार दिया। एन के प्रेमचंद्रन ने सवाल उठाया कि इन बिलों को इतनी जल्दबाजी में लाने की आवश्यकता क्यों है।
सदन में हंगामा
बिलों को पेश किए जाने के दौरान लोकसभा में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। विपक्षी सांसदों ने बिल की प्रतियां फाड़कर गृह मंत्री की ओर फेंकी और उनके माइक को मोड़ने की कोशिश की। टीएमसी सांसदों ने संसद के वेल में नारेबाजी शुरू की, जिसके बाद कांग्रेस के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और सपा के धर्मेंद्र यादव ने भी बिल की प्रतियां फाड़कर विरोध जताया। सभी विपक्षी दलों के सांसद वेल में उतर आए, जिसके कारण सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
सत्ताधारी दल के सांसदों, जैसे रवनीत बिट्टू, कमलेश पासवान, किरण रिजिजू, और शतीश गौतम ने गृह मंत्री का बचाव करते हुए विपक्षी सांसदों को रोकने की कोशिश की। गृह मंत्री अमित शाह ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अपने पक्ष के सांसदों को शांत करने का प्रयास किया और घोषणा की कि बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजा जाएगा।
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