China News:काम मत करो, बच्चे पैदा करो... चीन के लोगों को आबादी बढ़ाने के लिए ऑर्डर

China News: चीन में घटती जनसंख्या को देखते हुए सरकार ने नई पहल की है. अब कई प्रांतों में शादी की छुट्टी 3 दिन से बढ़ाकर 30 दिन तक कर दी गई है. सरकार का मकसद है

Jun 11, 2025 - 16:35
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China News:काम मत करो, बच्चे पैदा करो... चीन के लोगों को आबादी बढ़ाने के लिए ऑर्डर

China News: एक दौर था जब चीन "एक बच्चा नीति" के लिए जाना जाता था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। जनसंख्या में गिरावट से घबराई चीनी सरकार अब अपने नागरिकों को खुलेआम कह रही है—काम छोड़ो, शादी करो और बच्चे पैदा करो। यही नहीं, इसके लिए सरकार अब तरह-तरह की रियायतें भी दे रही है।

छुट्टियों की बारिश

देश के कई प्रांतों में शादी की छुट्टियों की अवधि तीन दिन से बढ़ाकर 20 से 30 दिन तक कर दी गई है। सिचुआन, जो चीन का सबसे अधिक आबादी वाला प्रांत है, वहां अब शादी के लिए 20 दिन की छुट्टी दी जा रही है। अगर कपल शादी से पहले मेडिकल चेकअप भी कराते हैं, तो उन्हें 5 दिन की अतिरिक्त छुट्टी दी जाएगी—वो भी पूरी सैलरी के साथ। यानी कुल 25 दिन की पेड लीव।

इसी तरह शेडोंग में शादी की छुट्टी 18 दिन की कर दी गई है, जबकि शांक्सी और गांसू जैसे प्रांतों ने इसे और भी आगे बढ़ाकर 30 दिन कर दिया है। यह प्रस्ताव फिलहाल जून 2025 तक जनता की राय के लिए खुला है।

घटती शादियां और गिरती जन्मदर

इन बदलावों की सबसे बड़ी वजह है—देश में घटती शादी और जन्मदर। 2025 की पहली तिमाही में केवल 18.1 लाख शादियां दर्ज हुईं, जो पिछले साल की तुलना में 8% कम हैं। यह संख्या 1980 के बाद सबसे कम है।

शादी की संख्या कम होने का सीधा असर जन्मदर पर पड़ा है। युवा अब तब तक शादी नहीं करना चाहते जब तक वे बच्चे की जिम्मेदारी उठाने को तैयार न हों। करियर का दबाव, आर्थिक अस्थिरता, और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बढ़ती चाह ने पारंपरिक विवाह की धारणा को कमजोर कर दिया है।

सरकार के अन्य कदम

सरकार अब शादी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को सरल बना रही है। अब नागरिक किसी भी शहर में शादी का पंजीकरण करा सकते हैं—हुकौ यानी घरेलू पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही मातृत्व और पितृत्व अवकाश भी बढ़ाया जा रहा है। कुछ कंपनियों को सरकार की तरफ से इन छुट्टियों के लिए आर्थिक सहायता देने की योजना पर भी काम हो रहा है।

क्या छुट्टियां ही काफी होंगी?

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ छुट्टियां बढ़ाने से समस्या हल नहीं होगी। जब तक आवास, बच्चों की शिक्षा, और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी बुनियादी जरूरतों पर खर्च कम नहीं होगा, तब तक शादी और बच्चे पैदा करने का फैसला आसान नहीं बनेगा।

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