E20 के बाद एथेनॉल पर सरकार का बड़ा प्लान: फ्लेक्सी फ्यूल वाहनों पर जोर

भारत सरकार E20 के बाद एथेनॉल ब्लेंडिंग को और बढ़ाने की तैयारी में है। फ्लेक्सी फ्यूल वाहनों और शुद्ध एथेनॉल की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

Sep 9, 2026 - 21:35
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E20 के बाद एथेनॉल पर सरकार का बड़ा प्लान: फ्लेक्सी फ्यूल वाहनों पर जोर

भारत सरकार एथेनॉल ब्लेंडिंग के क्षेत्र में एक नया और बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है और पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने यानी E20 के लक्ष्य को हासिल करने के बाद अब सरकार की योजना इससे भी आगे बढ़ने की है। प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने इस बात के स्पष्ट संकेत दिए हैं कि एथेनॉल ब्लेंडिंग की कहानी केवल E20 पर आकर नहीं रुकेगी। सरकार अब एक ऐसी नई रणनीति पर काम कर रही है जिसके तहत देश में फ्लेक्सी फ्यूल वाहनों को बढ़ावा दिया जाएगा और पेट्रोल पंपों पर शुद्ध एथेनॉल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और विदेशी तेल पर निर्भरता को कम करना है।

E20 की सफलता और फ्लेक्सी फ्यूल वाहनों का भविष्य

तरुण कपूर के अनुसार देश में E20 प्रोग्राम अब तक काफी सफल रहा है और इसने भविष्य की योजनाओं के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। कई प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां जल्द ही भारतीय बाजार में अपने फ्लेक्सी फ्यूल वाहन उतारने की तैयारी कर रही हैं। ये वाहन विशेष रूप से इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि वे एथेनॉल की अलग-अलग मात्रा वाले ईंधन पर आसानी से चल सकें। सरकार का अब पूरा ध्यान E20 से अधिक एथेनॉल ब्लेंडिंग की अनुमति देने पर केंद्रित है। हालांकि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पेट्रोल पंपों पर शुद्ध एथेनॉल उपलब्ध कराने की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और व्यापक बनाना होगा ताकि उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की कीमतों का दबाव

एथेनॉल पर सरकार का यह विशेष जोर ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति और उसकी कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए चिंताएं बढ़ गई हैं। ऐसी स्थिति में घरेलू विकल्पों को बढ़ावा देना अनिवार्य हो गया है। कपूर ने कहा कि देश के पास जो भी संसाधन उपलब्ध हैं उनका अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए। एथेनॉल इस दिशा में एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है जो न केवल पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक है।

एथेनॉल उत्पादन क्षमता और नई चुनौतियां

वर्तमान में भारत में एथेनॉल उत्पादन की क्षमता ब्लेंडिंग की मौजूदा जरूरतों से भी अधिक हो चुकी है। यह अधिशेष उत्पादन सरकार और उद्योग जगत के सामने एक नई चुनौती और अवसर दोनों लेकर आया है और इस अतिरिक्त एथेनॉल का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए सरकार अब एथेनॉल से जुड़े नए उत्पादों और इसके अन्य औद्योगिक उपयोगों को तलाशने पर जोर दे रही है। इससे न केवल एथेनॉल इकाइयों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी बल्कि देश में एक मजबूत बायोफ्यूल इकोसिस्टम भी विकसित होगा।

डीजल के लिए बायोफ्यूल और गोवर्धन योजना का विस्तार

सरकार की बायोफ्यूल योजना केवल पेट्रोल तक ही सीमित नहीं है बल्कि अब इसका विस्तार डीजल के क्षेत्र में भी किया जा रहा है। डीजल में बायोफ्यूल आधारित एडिटिव्स के इस्तेमाल को लेकर गहन शोध और प्रयोग किए जा रहे हैं और विशेष रूप से आइसोब्यूटेनॉल को लेकर किए जा रहे प्रयोगों पर सरकार की पैनी नजर है। यदि ये प्रयोग सफल रहते हैं तो बायोफ्यूल के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है। इसके अतिरिक्त सरकार गोवर्धन योजना के माध्यम से कंप्रेस्ड बायोगैस यानी CBG को भी बड़े पैमाने पर बढ़ावा देना चाहती है। एथेनॉल उत्पादक कंपनियों को सलाह दी गई है कि वे केवल एथेनॉल तक सीमित न रहें बल्कि CBG और पोटाश जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों के क्षेत्र में भी अपने कारोबार का विस्तार करें।

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