:भारत की 'मदर ऑफ ऑल डील' से अमेरिका में खलबली, कनाडा भी हुआ मुरीद

भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक FTA समझौता हुआ है। ट्रंप की धमकियों के बीच भारत की इस डील और कनाडा के बढ़ते झुकाव ने वैश्विक राजनीति को बदल दिया है।

Jan 27, 2026 - 14:35
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:भारत की 'मदर ऑफ ऑल डील' से अमेरिका में खलबली, कनाडा भी हुआ मुरीद

दुनिया की भू-राजनीति और वैश्विक व्यापार के मंच पर एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। जहाँ एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे के तहत दुनिया भर के देशों को भारी टैरिफ की धमकियां देकर डराने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत ने एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेला है जिसने वाशिंगटन में खलबली मचा दी है। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर आधिकारिक मुहर लग गई है। इस समझौते को विशेषज्ञों और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मदर ऑफ ऑल डील' यानी सभी समझौतों की जननी करार दिया है।

भारत और यूरोपीय संघ: एक ऐतिहासिक आर्थिक गठबंधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इस ऐतिहासिक समझौते की घोषणा करते हुए कहा कि यह वैश्विक जीडीपी का 25 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार का लगभग एक तिहाई हिस्सा कवर करता है। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि यह समझौता केवल व्यापार के बारे में नहीं है, बल्कि यह दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाओं के बीच समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस डील के जरिए 140 करोड़ भारतीयों के साथ-साथ यूरोपीय देशों के नागरिकों के लिए भी रोजगार और निवेश के अनगिनत अवसर पैदा होंगे। यह समझौता भारत के कपड़ा, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी सेवाओं के लिए यूरोपीय बाजारों के दरवाजे पूरी तरह से खोल देगा।

ट्रंप की टैरिफ धमकियों को भारत का करारा जवाब

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब डोनाल्ड ट्रंप लगातार भारत। और अन्य देशों पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाने की बात कर रहे हैं। ट्रंप का मानना था कि टैरिफ के दबाव में आकर भारत उनके सामने झुक जाएगा, लेकिन भारत ने अपनी आर्थिक संप्रभुता का परिचय देते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि वह किसी भी दबाव में आने वाला नहीं है। भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और वैश्विक बाजार में उसकी अहमियत ने यह साबित कर दिया है कि दुनिया अब केवल एक शक्ति केंद्र के भरोसे नहीं रह सकती। इस डील ने ट्रंप के उस ईगो को भी चोट पहुंचाई है जिसके तहत वह खुद को दुनिया का सबसे बड़ा 'डील मेकर' समझते हैं।

कनाडा का भारत की ओर झुकाव और मार्क कार्नी की रणनीति

दिलचस्प बात यह है कि केवल यूरोपीय संघ ही नहीं, बल्कि अमेरिका का पड़ोसी देश कनाडा भी अब भारत की ओर लट्टू होता दिख रहा है। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्च के पहले हफ्ते में भारत के दौरे पर आ सकते हैं और कनाडा के इस कदम को अमेरिका के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी अब अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए अपने व्यापारिक गठबंधनों को डाइवर्सिफाई करना चाहते हैं। कनाडा के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक के अनुसार, कार्नी की इस यात्रा के दौरान यूरेनियम, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।

ट्रंप बनाम कार्नी: कनाडाई स्वाभिमान की लड़ाई

हाल ही में दावोस में हुए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान मार्क कार्नी ने ट्रंप को कड़ा जवाब दिया था। ट्रंप ने दावा किया था कि कनाडा का अस्तित्व केवल अमेरिका की वजह से है, जिस पर कार्नी ने पलटवार करते हुए कहा कि कनाडा इसलिए आगे बढ़ता है क्योंकि हम कैनेडियन हैं, न कि अमेरिका की मेहरबानी से। ट्रंप ने कनाडा को धमकी दी थी कि अगर उसने चीन के साथ कोई व्यापारिक समझौता किया तो उस पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच कनाडा का भारत के साथ हाथ मिलाना यह दर्शाता है कि वह अब अमेरिका की धमकियों से डरने वाला नहीं है।

वैश्विक व्यापार का नया केंद्र बनता भारत

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दुनिया भर के निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संदेश है। यह समझौता यह सुनिश्चित करता है कि भारत वैश्विक सप्लाई चेन का एक विश्वसनीय और मजबूत हिस्सा है। जब अमेरिका जैसे देश संरक्षणवाद की ओर बढ़ रहे हैं, तब भारत मुक्त व्यापार और वैश्विक सहयोग का झंडा बुलंद कर रहा है। यह डील न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर की ओर ले जाने में मदद करेगी, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भारत के राजनीतिक कद को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। आने वाले समय में भारत, यूरोपीय संघ और कनाडा का यह त्रिकोण वैश्विक व्यापार की नई दिशा तय कर सकता है।

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