Iran Protests:ईरान में हिंसक प्रदर्शन: 217 लोगों की मौत का दावा, सेना की चेतावनी- बच्चों को प्रदर्शन से दूर रखें

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में 217 लोगों की मौत का दावा। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बच्चों को प्रदर्शनों से दूर रखने की चेतावनी दी है। देश आर्थिक बदहाली, महंगाई और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जूझ रहा है।

Jan 10, 2026 - 18:35
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Iran Protests:ईरान में हिंसक प्रदर्शन: 217 लोगों की मौत का दावा, सेना की चेतावनी- बच्चों को प्रदर्शन से दूर रखें

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने एक गंभीर मोड़ ले लिया है, जिसमें कम से कम 217 लोगों के मारे जाने का दावा किया जा रहा है। टाइम मैगजीन ने तेहरान के एक डॉक्टर के हवाले से बताया है कि राजधानी के सिर्फ छह अस्पतालों में 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है, जिनमें से अधिकांश की मौत गोली लगने से हुई है। यह आंकड़ा देश में बढ़ती हिंसा और सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई का संकेत देता है, जिसने आम जनता के बीच भय और आक्रोश दोनों को बढ़ा दिया है।

सुरक्षा बलों की कड़ी चेतावनी और कार्रवाई

सुरक्षा बलों ने गुरुवार रात प्रदर्शन तेज होने पर कई जगहों। पर गोलीबारी की थी, जिसके बाद से लगातार कार्रवाई जारी है। इस बीच, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के एक अधिकारी ने सरकारी टीवी। से बात करते हुए एक सख्त चेतावनी जारी की है। उन्होंने माता-पिता से अपील की है कि वे अपने बच्चों को प्रदर्शनों से दूर रखें, अन्यथा गोली लगने पर किसी भी शिकायत पर विचार नहीं किया जाएगा। यह बयान सरकार की उस दृढ़ता को दर्शाता है कि वह किसी भी कीमत पर इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए तैयार है, भले ही इसमें बच्चों की जान जाने का जोखिम हो। यह चेतावनी प्रदर्शनकारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि सरकार अब किसी भी नरमी के मूड में नहीं है।

सरकार का रुख और इंटरनेट बंद

रिपोर्ट के मुताबिक, पहले कुछ दिनों तक यह साफ नहीं था कि सरकार क्या रुख अपनाएगी। खुद एंटी राइट्स पुलिस के एक अधिकारी ने स्वीकार किया था कि सुरक्षा बल भ्रम में हैं और किसी को ठीक से नहीं पता कि आगे क्या होने वाला है। हालांकि, शुक्रवार को सामने आई खूनी तस्वीरों और सख्त बयानों से यह स्पष्ट हो गया कि अब सरकार पूरी ताकत का इस्तेमाल कर रही है। प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने देशभर में इंटरनेट और फोन सर्विस लगभग बंद कर दी है, जिससे सूचनाओं का आदान-प्रदान बाधित हो गया है और प्रदर्शनकारियों के लिए एकजुट होना मुश्किल हो गया है। यह कदम अक्सर ऐसे समय में उठाया जाता है जब सरकार। बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों को दबाने की कोशिश करती है।

अंतर्राष्ट्रीय चेतावनी और विशेषज्ञों की आशंका

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी ईरानी सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शनकारियों को मारा गया तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी और यह अंतर्राष्ट्रीय दबाव ईरान पर बढ़ रहा है, लेकिन सरकार अपने आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप को अस्वीकार कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब जब प्रदर्शन मध्यम वर्गीय इलाकों तक फैल गए हैं, तो सरकार बेरहमी से कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगी। उनका मानना है कि आने वाले दिनों में हताहतों की संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि सरकार अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। यह स्थिति देश को एक और गहरे संकट में धकेल सकती है।

ईरान की आंतरिक और बाहरी चुनौतियाँ

ईरान पहले से ही इजराइल के साथ संघर्ष, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, गिरती अर्थव्यवस्था, बिजली और पानी की किल्लत जैसी कई समस्याओं से जूझ रहा है। इन आंतरिक और बाहरी चुनौतियों ने देश की स्थिरता को कमजोर कर दिया है। सरकार के भीतर भी मतभेद स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान सार्वजनिक तौर पर नरम रुख दिखा रहे हैं, लेकिन उनके कई मंत्री सख्त कार्रवाई के पक्ष में हैं। यह आंतरिक विभाजन सरकार की प्रतिक्रिया को और जटिल बना रहा है। सरकार का आरोप है कि अमेरिका और इजराइल इन प्रदर्शनों को हवा। दे रहे हैं, जिससे यह एक भू-राजनीतिक संघर्ष का रूप ले रहा है।

आर्थिक बदहाली और जनता का आक्रोश

देशभर में GenZ (जेन-जी) आक्रोश में है, जिसका मुख्य कारण आर्थिक बदहाली है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर करीब 1. 45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। साल की शुरुआत से रियाल की कीमत लगभग आधी हो चुकी है, जिससे देश में महंगाई चरम पर पहुंच गई है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 72% और दवाओं की कीमतों में 50% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आम लोगों का जीवन दूभर हो गया है और इसके अलावा, सरकार द्वारा 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव ने आम लोगों में भारी नाराजगी पैदा की है, क्योंकि यह उनकी पहले से ही कमजोर आर्थिक स्थिति पर और बोझ डालेगा।

सर्वोच्च नेता खामेनेई का राष्ट्र के नाम संबोधन

ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने शनिवार को देशभर में प्रदर्शनों के बीच शुक्रवार को पहली बार राष्ट्र को संबोधित किया था और ईरान की सरकारी टीवी ने उनका भाषण प्रसारित किया, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान 'विदेशियों के लिए काम करने वाले भाड़े के लोगों' को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनों के पीछे विदेशी एजेंट हैं जो देश में हिंसा भड़का रहे हैं। खामेनेई ने कहा कि देश में कुछ ऐसे उपद्रवी हैं जो सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करना चाहते हैं और उन्होंने ट्रम्प से कहा कि ईरान के मामलों में दखल देने के बजाए वे अपने देश की समस्याओं पर ध्यान दें। उन्होंने यह भी दोहराया कि इस्लामिक रिपब्लिक सैकड़ों हजारों महान लोगों के खून के बल पर सत्ता में आई है और जो लोग इसे नष्ट करना चाहते हैं, उनके सामने यह कभी पीछे नहीं हटेगी।

क्राउन प्रिंस रजा पहलवी की वापसी की घोषणा

प्रदर्शनकारियों में से कुछ लोग पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी के समर्थन में नारे लगा रहे हैं, जिन्होंने विदेश से प्रदर्शन तेज करने की अपील की है। कुर्द इलाकों में भी लोग सड़कों पर उतर आए हैं। कई प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं बचा है। ईरान के क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने ऐलान किया है कि वह देश लौटकर चल रहे प्रदर्शनों में शामिल होंगे। 65 साल के रजा पहलवी करीब 50 साल से अमेरिका में निर्वासन में रह रहे हैं। शनिवार सुबह उन्होंने सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में लिखा, “मैं भी अपने देश लौटने की तैयारी कर रहा हूं ताकि हमारी राष्ट्रीय क्रांति की जीत के समय मैं आप सबके साथ, ईरान की महान जनता के बीच खड़ा रह सकूं। मुझे पूरा भरोसा है कि वह दिन अब बहुत करीब है।

क्राउन प्रिंस को सत्ता सौंपने की मांग और ऐतिहासिक संदर्भ

ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी सत्ता। में आए और 1979 से 1989 तक 10 साल सुप्रीम लीडर रहे। उनके बाद अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से अब तक 37 साल से सत्ता में हैं। ईरान आज आर्थिक संकट, भारी महंगाई, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, बेरोजगारी, मुद्रा गिरावट और लगातार जन आंदोलनों जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है और 47 साल बाद अब मौजूदा आर्थिक बदहाली और सख्त धार्मिक शासन से नाराज लोग बदलाव चाहते हैं। इसी कारण 65 वर्षीय क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को सत्ता सौंपने की मांग उठ रही है और प्रदर्शनकारी उन्हें एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प मानते हैं। युवाओं और जेन-जी को लगता है कि पहलवी की वापसी से ईरान को आर्थिक स्थिरता, वैश्विक स्वीकार्यता और व्यक्तिगत आजादी मिल सकती है।

ईरान की अर्थव्यवस्था और व्यापारिक चुनौतियाँ

ईरान की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से तेल निर्यात पर निर्भर करती है और साल 2024 में ईरान का कुल निर्यात लगभग 22. 18 बिलियन डॉलर था, जिसमें तेल और पेट्रोकेमिकल्स का बड़ा हिस्सा था, जबकि आयात 34. 65 बिलियन डॉलर रहा, जिससे व्यापार घाटा 12. 47 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। 2025 में तेल निर्यात में कमी और प्रतिबंध के कारण यह घाटा और बढ़कर 15 बिलियन डॉलर तक बढ़ने का अनुमान है। ईरान के मुख्य व्यापारिक साझेदारों में चीन (35% निर्यात), तुर्की, यूएई और इराक शामिल हैं। ईरान चीन को अपने तेल का 90% निर्यात करता है। ईरान ने पड़ोसी देशों और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ व्यापार बढ़ाने की कोशिश की है, जैसे कि INSTC कॉरिडोर और चीन के साथ नए ट्रांजिट रूट्स और फिर भी, 2025 में जीडीपी वृद्धि केवल 0. 3% रहने का अनुमान है। प्रतिबंध हटने या परमाणु समझौते की बहाली के बिना व्यापार और रियाल का। मूल्य स्थिर करना मुश्किल रहेगा, जिससे देश की आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है।

आगे की राह और अनिश्चितता

ईरान में चल रहे ये प्रदर्शन केवल आर्थिक असंतोष का परिणाम नहीं हैं, बल्कि दशकों से चली आ रही राजनीतिक और सामाजिक दमन का भी नतीजा हैं। सरकार की सख्त कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की बढ़ती हताशा के बीच, देश एक अनिश्चित भविष्य की ओर बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें ईरान पर टिकी हैं, लेकिन आंतरिक संघर्ष और बाहरी हस्तक्षेप के आरोप स्थिति को और जटिल बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या सरकार प्रदर्शनों को पूरी तरह दबाने में सफल होती है, या फिर जनता का आक्रोश एक बड़े बदलाव का मार्ग प्रशस्त करता है और इस बीच, हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है, जो इस संकट की गंभीरता को और बढ़ाती है।

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