Karnataka CM Post:कर्नाटक में CM पद पर बड़ा सस्पेंस: राहुल से मुलाकात के बाद शिवकुमार का अचानक बयान, 'अब तो समय ही बताएगा'

कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी खींचतान के बीच डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने राहुल गांधी से मुलाकात के बाद कहा, 'समय जवाब देगा।' उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। जानें क्या हैं इसके मायने और क्या बदल सकती है राज्य की सत्ता

Jan 19, 2026 - 11:35
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Karnataka CM Post:कर्नाटक में CM पद पर बड़ा सस्पेंस: राहुल से मुलाकात के बाद शिवकुमार का अचानक बयान, 'अब तो समय ही बताएगा'

कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस के भीतर जारी खींचतान एक बार फिर सुर्खियों में है, जिसने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने हाल ही में दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात की, जिसके बाद उनके बयान ने राजनीतिक गलियारों में नए सिरे से अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है और यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब राज्य में सत्ता का संघर्ष खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है और पिछले कई महीनों से सीएम सीट को लेकर अंदरूनी खींचतान जारी है।

दिल्ली में आलाकमान से मुलाकात

रविवार शाम को कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान से महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेताओं, जिनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी शामिल थे, से चर्चा की। यह बैठक इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले 16 जनवरी को भी शिवकुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल। गांधी से मुलाकात की थी, जो राज्य के राजनीतिक भविष्य को लेकर पार्टी के भीतर चल रही गहन मंत्रणा की ओर इशारा करती है। इन मुलाकातों का मुख्य एजेंडा कर्नाटक में नेतृत्व के मुद्दे को। सुलझाना और पार्टी के भीतर एकजुटता बनाए रखना माना जा रहा है।

'समय ही बताएगा' बयान का महत्व

राहुल गांधी से मुलाकात के बाद डीके शिवकुमार ने मीडिया से बात करते हुए एक संक्षिप्त और रहस्यमय बयान दिया: 'अब तो समय ही सब बताएगा। ' उनके इस बयान ने हर किसी को हैरान कर दिया है, खासकर इसलिए क्योंकि अभी तक डीके शिवकुमार खुद को मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं। यह पहली बार है जब उन्होंने अपनी दावेदारी को सीधे तौर पर दोहराने के बजाय सब कुछ समय पर छोड़ दिया है।

यह टिप्पणी राजनीतिक विश्लेषकों के लिए एक पहेली बन गई है, जो यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह आलाकमान के साथ किसी नई सहमति का संकेत है, या फिर यह उनकी रणनीति का हिस्सा है ताकि सार्वजनिक रूप से अपनी महत्वाकांक्षाओं को थोड़ा कम दिखाया जा सके। इस बयान ने निश्चित रूप से कर्नाटक की राजनीति में सस्पेंस को और बढ़ा दिया है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम दौरा रद्द

डीके शिवकुमार की आलाकमान से यह मुलाकात इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 का अपना दौरा रद्द कर दिया है। एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर राज्य का प्रतिनिधित्व करने का यह एक महत्वपूर्ण अवसर था, और इसे रद्द करने का निर्णय उनकी दिल्ली यात्रा और पार्टी आलाकमान के साथ चल रही चर्चाओं को अत्यधिक महत्व देता है।

यह दर्शाता है कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रहा आंतरिक संघर्ष और आलाकमान के साथ बातचीत उनके लिए किसी भी अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता से अधिक महत्वपूर्ण है। इस कदम से यह भी संकेत मिलता है कि पार्टी के भीतर कुछ बड़े फैसले। लिए जाने वाले हैं या कम से कम उन पर गंभीर विचार-विमर्श चल रहा है।

शिवकुमार की प्रतिक्रिया और सत्ता संघर्ष की पृष्ठभूमि

मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में डीके शिवकुमार ने अपने बयान को ज्यादा तूल न देने की अपील की और उन्होंने कहा, 'मेरी इस मुलाकात को बड़ी बात न बनाएं। मैं मुलाकात के बारे में आपको कुछ नहीं बता सकता हूं और हम सब पॉलिटिशियन हैं। पॉलिटिशियन जो चाहें पॉलिटिक्स करते हैं और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। हम यहां सरकारी काम से पार्टी के काम से आते हैं। हम दिल्ली राजनीति के लिए आते हैं। ' हालांकि, उनके इन शब्दों के बावजूद, कर्नाटक में सत्ता का संघर्ष खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।

पिछले कई महीनों से सीएम सीट को लेकर खींचतान जारी है, और समय-समय पर ऐसे बयान सामने आते रहते हैं जो यह दिखाने की कोशिशों पर सवाल खड़े करते हैं कि कांग्रेस और कर्नाटक दोनों जगह सब कुछ ठीक है। शिवकुमार का यह नया बयान इस लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष में एक और महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जिसके परिणाम भविष्य में ही स्पष्ट होंगे।

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