Patanjali Ghee:पतंजलि का घी इंसानों के खाने लायक नहीं है ! टेस्ट में हुआ फेल, कोर्ट ने जुर्माना ठोंका

उत्तराखंड के खाद्य सुरक्षा विभाग ने पतंजलि और दो अन्य कंपनियों पर घटिया गाय का घी बेचने के आरोप में 1.4 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। 2020 में लिए गए सैंपल जांच में फेल हुए थे।

Nov 29, 2025 - 00:35
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Patanjali Ghee:पतंजलि का घी इंसानों के खाने लायक नहीं है ! टेस्ट में हुआ फेल, कोर्ट ने जुर्माना ठोंका

उत्तराखंड के खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड और उससे जुड़ी दो अन्य कंपनियों पर घटिया गुणवत्ता का गाय का घी बेचने के आरोप में कुल 1. 4 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है और यह फैसला उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने के मामले में आया है, जहां घी के सैंपल जांच में विफल पाए गए। यह मामला साल 2020 में शुरू हुआ था और कई चरणों की। जांच और अदालती कार्यवाही के बाद अब इस पर निर्णय सुनाया गया है। खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन के सहायक आयुक्त आरके शर्मा ने इस पूरे प्रकरण की जानकारी देते हुए बताया कि यह मामला साल 2020 में पतंजलि के गाय के घी के एक सैंपल से जुड़ा है और यह सैंपल एक रूटीन जांच प्रक्रिया के तहत पिथौरागढ़ जिले के कसनी इलाके में स्थित करण जनरल स्टोर से लिया गया था। इस तरह की नियमित जांच का उद्देश्य बाजार में बिकने वाले खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है, ताकि उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य जोखिम से बचाया जा सके। सैंपल लेने के बाद उसे आगे की जांच के लिए भेजा गया, जो इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।

मामले की शुरुआत और पहला सैंपल

उत्तराखंड लैब में जांच और नतीजे

शर्मा ने आगे बताया कि करण जनरल स्टोर से लिए गए इस घी के सैंपल को सबसे पहले उत्तराखंड की एक प्रतिष्ठित लैब, रुद्रपुर में जांच के लिए भेजा गया था। लैब में हुई गहन जांच के बाद जो नतीजे सामने आए, वे चिंताजनक थे। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया गया कि पतंजलि का यह घी खाने की सुरक्षा मानकों पर बिल्कुल भी खरा नहीं उतरा है। इसका सीधा अर्थ था कि घी की गुणवत्ता घटिया थी और यह उपभोग के लिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता था। लैब रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ कि इस प्रकार के घटिया घी का सेवन करने से लोगों की सेहत पर गंभीर बुरा असर पड़ सकता है और वे बीमार भी हो सकते हैं और यह रिपोर्ट खाद्य सुरक्षा विभाग के लिए एक गंभीर चेतावनी थी।

पतंजलि को नोटिस और दोबारा जांच की मांग

उत्तराखंड लैब की रिपोर्ट आने के बाद, साल 2021 में पतंजलि कंपनी को इस संबंध में एक आधिकारिक नोटिस भेजा गया था, जिसमें उन्हें घी की गुणवत्ता में कमी के बारे में सूचित किया गया था। हालांकि, कंपनी की ओर से इस नोटिस का कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया। इसके बाद, कंपनी के अधिकारियों ने खुद ही इस सैंपल की दोबारा जांच कराने की मांग की। उन्होंने अनुरोध किया कि सैंपल को किसी सेंट्रल लैब में टेस्ट किया जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके। इस दोबारा जांच के लिए पतंजलि से 5000 रुपये की निर्धारित फीस भी ली गई थी, जो प्रक्रिया का एक हिस्सा था।

गाजियाबाद की नेशनल फूड लैब में दोबारा जांच

पतंजलि की मांग पर, 16 अक्टूबर 2021 को अधिकारियों की। एक टीम गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) में स्थित नेशनल फूड लैब पहुंची। यह लैब देश की प्रमुख खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं में से एक है, जहां उच्च मानकों पर खाद्य उत्पादों की जांच की जाती है और यहां घी के सैंपल की एक बार फिर से गहन और विस्तृत जांच की गई। नेशनल फूड लैब ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट 26 नवंबर 2021 को सौंपी। इस रिपोर्ट में भी, पहले की तरह, घी के सैंपल फूड सेफ्टी टेस्ट में पूरी तरह से फेल हो गए। यह दूसरी रिपोर्ट भी पतंजलि के घी की घटिया गुणवत्ता की पुष्टि करती थी, जिससे कंपनी की मुश्किलें और बढ़ गईं।

अदालत में मामला और अंतिम फैसला

नेशनल फूड लैब की रिपोर्ट को लगभग दो महीने तक अच्छे से पढ़ा और समझा गया, ताकि सभी कानूनी पहलुओं पर विचार किया जा सके। इसके बाद, 17 फरवरी 2022 को यह पूरा मामला पिथौरागढ़ के एडजुडिकेटिंग ऑफिसर/एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट योगेंद्र सिंह की अदालत में पेश किया गया। खाद्य सुरक्षा अधिकारी दिलीप जैन ने अदालत में इस मामले से जुड़े सभी आवश्यक सबूत और दोनों लैब की रिपोर्टें पेश कीं। अदालत ने सभी सबूतों और दलीलों पर विचार करने के बाद गुरुवार को अपना फैसला सुनाया और कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। इसके अलावा, घी के डिस्ट्रीब्यूटर ब्रह्मा एजेंसी पर 25,000 रुपये और जिस दुकान (करण जनरल स्टोर) से सैंपल लिया गया था, उस पर 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस प्रकार, कुल 1. 40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जो खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है और यह फैसला उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और खाद्य उत्पादों में गुणवत्ता बनाए रखने के महत्व को रेखांकित करता है।

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