Trump-Putin Meeting:भारत को रूसी तेल पर राहत! पुतिन से मीटिंग के बाद ट्रंप का बड़ा बयान
Trump-Putin Meeting: पुतिन से मुलाकात के बाद ट्रंप ने रूसी ऑयल इंपोर्ट करने वाले देशों पर एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने विदेशी मीडिया से बात करते हुए कहा कि रूसी तेल इंपोर्ट करने वाले देशों पर नए टैरिफ की अभी कोई प्लानिंग
Trump-Putin Meeting: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार, 16 अगस्त 2025 को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अलास्का में एक महत्वपूर्ण बैठक की। यह बैठक मुख्य रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध और संबंधित मुद्दों पर केंद्रित थी। हालांकि, इस मुलाकात में युद्धविराम को लेकर कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई, लेकिन कुछ क्षेत्रों में सकारात्मक प्रगति देखने को मिली। बैठक के बाद ट्रंप ने एक बड़ा बयान दिया, जिसमें उन्होंने रूसी तेल आयात करने वाले देशों, विशेष रूप से भारत और चीन, पर नए टैरिफ लगाने की तत्काल आवश्यकता से इनकार किया। यह भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर है, जो अपने कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 38% रूस से खरीदता है।
नए टैरिफ पर फिलहाल रोक
फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा, "आज की बैठक को देखते हुए, मुझे लगता है कि अभी टैरिफ के बारे में ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह दो से तीन सप्ताह बाद इस मुद्दे पर पुनर्विचार कर सकते हैं, लेकिन फिलहाल कोई नया टैरिफ लागू करने की योजना नहीं है। यह बयान उन देशों के लिए महत्वपूर्ण है जो रूस से कच्चा तेल आयात करते हैं, खासकर भारत और चीन के लिए।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि भारत पर पहले से लगाए गए टैरिफ ने रूस को बातचीत की मेज पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके अनुसार, "जब मैंने भारत से कहा कि हम आप पर शुल्क लगाएंगे क्योंकि आप रूस से तेल खरीद रहे हैं, तो भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया, जिसके बाद रूस ने बातचीत के लिए संपर्क किया।" ट्रंप ने भारत को रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल ग्राहक बताया, जो चीन के करीब पहुंच रहा था।
भारत की तेल नीति पर अडिग रुख
ट्रंप के दावों के विपरीत, भारत ने अपनी तेल खरीद नीति में किसी भी बदलाव से साफ इनकार किया है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के अध्यक्ष ए.एस. साहनी ने स्पष्ट किया कि रूस से तेल आयात पर कोई रोक नहीं है और यह खरीद पूरी तरह से आर्थिक आधार पर जारी रहेगी। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी ट्रंप के टैरिफ को "अनुचित" करार देते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने का संकल्प जताया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने न केवल रूस से तेल आयात जारी रखा है, बल्कि अगस्त 2025 में इसकी मात्रा बढ़कर 20 लाख बैरल प्रति दिन (बीपीडी) हो गई है, जो जुलाई में 16 लाख बीपीडी थी। यह वृद्धि इराक और सऊदी अरब से आयात में कमी की कीमत पर हुई है। केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, रूस भारत के कुल तेल आयात का लगभग 38% हिस्सा आपूर्ति कर रहा है।
टैरिफ का प्रभाव और भारत की स्थिति
ट्रंप प्रशासन ने पहले ही भारत पर रूसी तेल आयात के लिए 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, जिसे हाल ही में बढ़ाकर 50% कर दिया गया। यह अतिरिक्त टैरिफ 27 अगस्त 2025 से लागू होने वाला है और भारत के लगभग 40 अरब डॉलर के निर्यात पर असर डाल सकता है। भारत ने इस कदम को "अनुचित और अविवेकपूर्ण" बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है।
हालांकि, ट्रंप का यह बयान कि वह फिलहाल नए टैरिफ पर विचार नहीं कर रहे हैं, भारत के लिए एक अस्थायी राहत के रूप में देखा जा रहा है। यह न केवल भारत की ऊर्जा नीति को बनाए रखने में मदद करेगा, बल्कि अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव को कम करने में भी सहायक हो सकता है।
ट्रंप-पुतिन बैठक का वैश्विक संदर्भ
अलास्का में हुई इस बैठक का उद्देश्य मुख्य रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध पर चर्चा करना था। ट्रंप ने इसे "बेहद फलदायी" बताया, जबकि पुतिन ने इसे "समाधान की शुरुआत" करार दिया। पुतिन ने यह भी सुझाव दिया कि अगली मुलाकात मॉस्को में होनी चाहिए। ट्रंप ने कहा कि वह जल्द ही यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की और अन्य यूरोपीय नेताओं से बात करेंगे ताकि युद्धविराम की दिशा में प्रगति हो सके।
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