N T Rama Rao:वो इकलौता एक्टर जिसने निभाया राम और रावण का किरदार, आज भी किया जाता है याद

N T Rama Rao: दक्षिण भारत के पूर्व सुपरस्टार नंदमुरी तारक रामा राव इकलौते ऐसे एक्टर हैं जिन्होंने सिल्वर स्क्रीन पर राम और रावण का किरदार निभाया है। आज दशहरे के मौके पर हम जानते हैं उनके किरदारों की कहानी।

Oct 3, 2025 - 16:35
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N T Rama Rao:वो इकलौता एक्टर जिसने निभाया राम और रावण का किरदार, आज भी किया जाता है याद

N T Rama Rao: भारतीय सिनेमा और टेलीविजन ने भगवान राम और लंका के राजा रावण के बीच के महाकाव्य युद्ध को बार-बार बड़े ही खूबसूरत ढंग से पर्दे पर उतारा है। रामायण की यह कालजयी गाथा दर्शकों के दिलों को हमेशा छूती रही है। कई अभिनेताओं ने राम और रावण के किरदारों को जीवंत किया, लेकिन एक अभिनेता ऐसा है जिसने दोनों किरदारों को असाधारण शिद्दत और गहराई के साथ निभाया। आइए उस इकलौते अभिनेता की कहानी पर नजर डालते हैं, जिसने सिल्वर स्क्रीन पर राम और रावण दोनों को बखूबी जिया।

सिल्वर स्क्रीन पर राम और रावण का किरदार

यह अनूठा कारनामा करने वाले अभिनेता कोई और नहीं, बल्कि दक्षिण भारत के पूर्व सुपरस्टार और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नंदमुरी तारक रामा राव, यानी एन.टी. रामाराव (NTR) हैं। एनटीआर, जो कि जूनियर एनटीआर के दादा थे, भारतीय सिनेमा में एकमात्र ऐसे अभिनेता हैं जिन्होंने राम और रावण दोनों किरदारों को पर्दे पर उतारा।

उन्होंने 1958 में फिल्म भूकैलास में रावण की भूमिका निभाई थी। हालांकि, यह फिल्म व्यावसायिक रूप से ज्यादा सफल नहीं रही, लेकिन एनटीआर के अभिनय ने दर्शकों का ध्यान खींचा। इसके बाद, 1961 में फिल्म सीता राम कल्याणम में उन्होंने एक बार फिर लंका के राजा रावण का किरदार निभाया और अपने अभिनय से इस पौराणिक खलनायक को जीवंत कर दिया। फिर 1963 में, एनटीआर ने फिल्म लव कुश में भगवान राम की भूमिका निभाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी यह भूमिका उनकी सबसे यादगार प्रस्तुतियों में से एक मानी जाती है।

पौराणिक किरदारों के लिए थे मशहूर

1960 और 1970 के दशक में एनटीआर तेलुगु सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में से एक थे। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि उनके प्रशंसक उन्हें "देवता" की तरह पूजते थे। उन्होंने अपने करियर में कई पौराणिक किरदार निभाए, जिनमें भगवान राम, रावण और भगवान कृष्ण प्रमुख हैं। खास बात यह है कि एनटीआर ने लगभग 17 फिल्मों में भगवान कृष्ण की भूमिका निभाई, जो तेलुगु सिनेमा में एक रिकॉर्ड है।

उनके अभिनय का जादू ऐसा था कि 1960 के दशक में उनकी पौराणिक फिल्मों ने तेलुगु दर्शकों के बीच उन्हें एक अलौकिक दर्जा दिलाया। हैदराबाद में उनके घर को उनके प्रशंसक तीर्थस्थल की तरह मानते थे। इतना ही नहीं, 1970 के दशक में आंध्र प्रदेश में उनके नाम पर कई मंदिर बनाए गए, जहां उनके द्वारा निभाए गए श्री राम और कृष्ण के अवतारों की मूर्तियाँ स्थापित की गईं। यह उनके अभिनय और व्यक्तित्व के प्रति लोगों के असीम प्रेम को दर्शाता है।

पौराणिक फिल्मों से सामाजिक सिनेमा तक

हालांकि 1970 के दशक के बाद एनटीआर ने पौराणिक फिल्मों में कम काम किया और बड़े पैमाने पर निर्मित सामाजिक और व्यावसायिक फिल्मों की ओर रुख किया, लेकिन उनकी पौराणिक भूमिकाएँ आज भी दर्शकों के दिलों में बसी हैं। उनकी फिल्में न केवल मनोरंजन का साधन थीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और मूल्यों को भी दर्शाती थीं।

एनटी रामाराव का योगदान तेलुगु सिनेमा और भारतीय संस्कृति में अतुलनीय है। हम उनके उस अद्भुत अभिनय को याद करते हैं, जिसने राम और रावण जैसे विपरीत किरदारों को पर्दे पर अमर कर दिया। उनकी विरासत आज भी जूनियर एनटीआर जैसे अभिनेताओं और तेलुगु सिनेमा के माध्यम से जीवित है।

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