Board Of Peace:गाजा में शांति का बड़ा प्लान: ट्रंप ने बनाया 'बोर्ड ऑफ पीस', भारत को मिला न्योता, जानें पूरा मामला

डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के पुनर्निर्माण और शासन व्यवस्था के लिए 'बोर्ड ऑफ पीस' का गठन किया है, जिसमें भारत को भी शामिल होने का न्योता मिला है। जानें इस अंतरराष्ट्रीय संगठन का मकसद, सदस्य और स्थायी सदस्यता की शर्तें।

Jan 19, 2026 - 09:35
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Board Of Peace:गाजा में शांति का बड़ा प्लान: ट्रंप ने बनाया 'बोर्ड ऑफ पीस', भारत को मिला न्योता, जानें पूरा मामला

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण और उसकी शासन व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी अंतरराष्ट्रीय संगठन 'बोर्ड ऑफ पीस' का गठन किया है और इस पहल का मुख्य लक्ष्य इजराइल-हमास युद्ध के बाद तबाह हो चुके गाजा में स्थिरता और शांति बहाल करना है। इस महत्वपूर्ण बोर्ड में शामिल होने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निमंत्रण भेजा गया है, जो इस वैश्विक प्रयास में भारत की संभावित भूमिका को दर्शाता है। ट्रंप का यह कदम ऐसे समय में आया है जब गाजा को एक नए सिरे से खड़ा। करने और वहां के लोगों के जीवन को सामान्य बनाने की तत्काल आवश्यकता महसूस की जा रही है।

इजराइल-हमास युद्ध और गाजा की तबाही

**क्या है 'बोर्ड ऑफ पीस' का मकसद? साल 2023 में शुरू हुए इजराइल और हमास के बीच लंबे समय तक चले संघर्ष ने गाजा पट्टी को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। इस युद्ध के दौरान हुए लगातार हमलों, मिसाइल बरसाने और बमबारी ने गाजा के बुनियादी ढांचे को खंडहर में बदल दिया। हजारों की संख्या में लोगों की मौत हुई और लाखों लोग विस्थापित हुए। युद्ध के भयावह परिणामों में से एक गाजा में व्याप्त गंभीर मानवीय संकट भी है, जहां लोग भुखमरी और कुपोषण का सामना कर रहे हैं, खासकर बच्चों पर इसका बुरा असर पड़ा है।

इन विकट परिस्थितियों को देखते हुए, डोनाल्ड ट्रंप ने एक 20-सूत्रीय शांति। समझौते (20-Point Peace Deal) की पेशकश की थी, जिसके परिणामस्वरूप युद्धविराम हुआ। अब इस युद्धविराम के बाद, गाजा को फिर से विकसित करने और वहां के लोगों के लिए एक बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने का काम प्राथमिकता पर है, और इसी दिशा में 'बोर्ड ऑफ पीस' का गठन एक महत्वपूर्ण कदम है। 'बोर्ड ऑफ पीस' का मुख्य उद्देश्य गाजा को एक बार फिर से विकसित करना और उसे खंडहर से निकालकर लोगों के रहने लायक बनाना है।

ट्रंप ने इस शांति बोर्ड के गठन को 'सपनों को हकीकत में बदलने का समय' बताया है। उनके अनुसार, यह बोर्ड एक नए अंतरराष्ट्रीय संगठन और एक अस्थायी सरकार के रूप में कार्य करेगा और इसके प्रमुख कार्यों में गाजा में शासन व्यवस्था को बेहतर बनाना, युद्ध से तबाह हुए क्षेत्रों का पुनर्निर्माण करना और आर्थिक निवेश के माध्यम से वहां स्थायी शांति लाना शामिल है। बोर्ड का एक और महत्वपूर्ण काम गाजा को हथियारों से मुक्त करना, जरूरतमंदों तक मानवीय सहायता पहुंचाना, नष्ट हो चुके बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करना और एक तकनीकी फिलिस्तीनी प्रशासन की स्थापना करना है। यह सुनिश्चित करना है कि गाजा भविष्य में ऐसे संघर्षों से बच सके और उसके निवासी शांतिपूर्ण जीवन जी सकें।

बोर्ड का नेतृत्व और स्थायी सदस्य

व्हाइट हाउस के अनुसार, 'बोर्ड ऑफ पीस' गाजा में युद्ध के बाद होने वाले बदलावों की निगरानी करने वाला एक प्रमुख रणनीतिक निकाय होगा। इस बोर्ड की अध्यक्षता स्वयं डोनाल्ड ट्रंप करेंगे, जो इस पहल के प्रति उनकी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता को दर्शाता है और बोर्ड का ध्यान शासन को मजबूत करने, क्षेत्रीय संबंधों को सुधारने, पुनर्निर्माण प्रयासों को गति देने, हालात को फिर से बेहतर करने के लिए निवेश जुटाने और बड़े पैमाने पर फंडिंग सुनिश्चित करने पर केंद्रित होगा। बोर्ड में कई प्रमुख हस्तियां स्थायी सदस्य के रूप में शामिल होंगी। इनमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो शामिल हैं, जिन्हें ट्रंप प्रशासन में इजराइल के सबसे बड़े समर्थकों में से एक माना जाता है और उन्होंने इजराइल की आलोचना करने वालों को अमेरिकी वीजा न देने की बात कही है और फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने के पश्चिमी देशों के फैसले को गैर-जिम्मेदाराना बताया है।

अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, जो न्यूयॉर्क के रियल एस्टेट कारोबारी और ट्रंप के करीबी सहयोगी हैं, उन्हें गाजा में संघर्षविराम वार्ता की जिम्मेदारी दी गई थी। ट्रंप के दामाद और इजराइल के कट्टर समर्थक जैरेड कुश्नर भी इस बोर्ड का हिस्सा होंगे। कुश्नर ने पहले कहा था कि फिलिस्तीनी खुद शासन चलाने में। सक्षम नहीं हैं और उन्होंने गाजा को 'कीमती समुद्री संपत्ति' बताया था। अब्राहम समझौतों के पीछे भी उनकी बड़ी भूमिका रही है। अरबपति कारोबारी मार्क रोवन, जो अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के सह-संस्थापक हैं, भी स्थायी सदस्यों में से एक हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने इजराइल में सामाजिक कार्य किए हैं और अमेरिका में इजराइल समर्थक संगठनों को फंड दिया है। विश्व बैंक के मौजूदा अध्यक्ष अजय बंगा और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर भी इस बोर्ड में शामिल हैं। टोनी ब्लेयर को 2003 के इराक युद्ध का समर्थन करने के कारण क्षेत्र में विवादित माना जाता है। ट्रंप प्रशासन में उप-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे रॉबर्ट गैब्रियल जूनियर भी इस महत्वपूर्ण बोर्ड का हिस्सा होंगे।

गाजा प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति (NCAG)

मुख्य 'बोर्ड ऑफ पीस' के साथ, गाजा में जमीनी स्तर पर प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए दो अन्य महत्वपूर्ण ढांचे भी बनाए गए हैं। इनमें से पहला है गाजा प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति (NCAG), जिसकी अगुवाई फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेट डॉ. अली शाथ करेंगे। इस समिति का प्राथमिक कार्य गाजा में सार्वजनिक सेवाओं को फिर से शुरू करना, युद्ध से क्षतिग्रस्त हुए सरकारी संस्थानों का पुनर्निर्माण करना और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को स्थिर करना है। व्हाइट हाउस ने इस समिति को ट्रंप की गाजा योजना के दूसरे चरण को लागू करने की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया है। मिस्र के मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में, समिति के अध्यक्ष अली शाथ ने इसकी आधिकारिक 12 सदस्यीय टीम की पुष्टि की है।

इस टीम में इंजीनियर ऐद अबू रमदान (आर्थिक और व्यापार), अब्दुल करीम अशूर (कृषि), डॉक्टर ऐद यागी (स्वास्थ्य), इंजीनियर ओसामा अल-सादावी (आवास और जमीन), अदनान अबू वर्दा (न्याय), मेजर। जनरल सामी नसमान (गृह और आंतरिक सुरक्षा), अली बरहूम (नगर पालिका और पानी), बशीर अल-रैयस (वित्त), हाना तराज़ी (सामाजिक मामले), जब्र अल-दौर (शिक्षा), और इंजीनियर ओमर अल-शमाली (दूरसंचार) शामिल हैं। मेजर जनरल सामी नसमान को आंतरिक सुरक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है,। जिसका अर्थ है कि गाजा में पुलिस व्यवस्था उन्हीं के हाथ में होगी।

गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड का गठन

राष्ट्रीय समिति के अलावा, एक अलग 'गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड' भी बनाया जाएगा। इस बोर्ड का मुख्य कार्य गाजा में जमीन पर शासन व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद करना होगा। इसमें तुर्की, कतर, मिस्र, इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देशों के अंतरराष्ट्रीय राजनयिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधि शामिल होंगे और इसके साथ ही, संयुक्त राष्ट्र की मानवीय प्रतिनिधि सिग्रिड काग भी इस महत्वपूर्ण बोर्ड का हिस्सा होंगी। यह एग्जीक्यूटिव बोर्ड गाजा में स्थिरता लाने और पुनर्निर्माण प्रयासों को समन्वित करने में एक महत्वपूर्ण। भूमिका निभाएगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि अंतरराष्ट्रीय सहायता और योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू हों।

किन-किन देशों को मिला न्योता?

'बोर्ड ऑफ पीस' की इस महत्वपूर्ण पहल में शामिल होने के लिए भारत सहित कई अन्य देशों को भी निमंत्रण भेजा गया है। इन देशों में अर्जेंटीना, कनाडा, मिस्र, तुर्की, अल्बानिया और साइप्रस शामिल हैं। यह दर्शाता है कि ट्रंप प्रशासन गाजा के भविष्य के लिए एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहा है और दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान को भी इस 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इस निमंत्रण की पुष्टि की है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान गाजा में शांति और सुरक्षा के लिए किए जा रहे सभी अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का लगातार समर्थन करता रहेगा और यह विभिन्न देशों की भागीदारी गाजा में स्थिरता लाने के लिए एक सामूहिक वैश्विक जिम्मेदारी को दर्शाती है।

स्थायी सदस्यता के लिए 1 अरब डॉलर का भुगतान

'बोर्ड ऑफ पीस' को लेकर एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है, जो इसकी वित्तीय संरचना से संबंधित है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन चाहता है कि इस बोर्ड में स्थायी। सदस्य बने रहने के लिए किसी भी देश को एक बड़ी राशि का भुगतान करना होगा। प्रशासन ने स्थायी सदस्यता के लिए 1 अरब डॉलर (लगभग 9 हजार करोड़ रुपये) का भुगतान करने की शर्त रखी है। बोर्ड के सदस्य देशों का कार्यकाल सामान्यतः 3 साल का होगा।

हालांकि, यदि कोई देश चार्टर लागू होने के पहले साल के भीतर 1 अरब डॉलर नकद देता है, तो उसे स्थायी सदस्यता मिल सकती है। एक अमेरिकी अधिकारी ने CNBC को बताया कि बोर्ड में शामिल होने की कोई प्रारंभिक फीस नहीं है, लेकिन 1 अरब डॉलर का भुगतान करने पर ही कोई देश स्थायी सदस्य बन पाएगा। यह वित्तीय शर्त इस पहल की गंभीरता और इसके लिए आवश्यक संसाधनों की विशालता को दर्शाती है।

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