अमेरिका ईरान शांति समझौता: ट्रंप ने की 14 सूत्रीय डील की पुष्टि, खत्म होगा चार महीने का युद्ध

अमेरिका और ईरान के बीच 4 महीने का युद्ध खत्म करने के लिए प्रारंभिक समझौता हुआ। ट्रंप ने 14 बिंदुओं की पुष्टि की जिसमें 300 अरब डॉलर की मदद शामिल है।

Jun 15, 2026 - 09:35
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अमेरिका ईरान शांति समझौता: ट्रंप ने की 14 सूत्रीय डील की पुष्टि, खत्म होगा चार महीने का युद्ध

अमेरिका और ईरान ने पिछले करीब 4 महीने से चल रहे युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक शांति समझौते पर अपनी सहमति व्यक्त की है। इस बड़े कूटनीतिक घटनाक्रम की पुष्टि रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने की। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से जानकारी दी कि अमेरिका और ईरान के बीच यह समझौता संपन्न हो गया है। इस समझौते के प्रभावी होने के साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया के सभी व्यापारिक जहाजों के लिए फिर से खोल दिया जाएगा। इसके अलावा, ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को भी तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्णय लिया गया है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मध्यस्थता और आधिकारिक हस्ताक्षर की प्रक्रिया

इस शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान और कतर ने महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्पष्ट किया कि दोनों देश सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को पूरी तरह से रोकने के लिए तैयार हो गए हैं और इसमें लेबनान का मोर्चा भी शामिल है, जिसे लेकर पहले दोनों पक्षों के बीच काफी मतभेद बने हुए थे। इस ऐतिहासिक समझौते पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में किए जाएंगे। समझौते के प्रावधानों के तहत, अमेरिका ईरान के बंदरगाहों से अपनी नौसैनिक घेराबंदी हटा लेगा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से शुरू हो सकेगी। इस सप्ताह दोनों देशों के तकनीकी स्तर के अधिकारी विस्तृत बातचीत करेंगे ताकि समझौते के कार्यान्वयन को सुनिश्चित किया जा सके।

प्रस्तावित डील के 14 प्रमुख बिंदु

ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस प्रस्तावित समझौते में 14 मुख्य बिंदु शामिल किए गए हैं। पहला बिंदु यह है कि युद्ध को तुरंत और हमेशा के लिए बंद किया जाएगा, जिसमें लेबनान का मोर्चा भी शामिल होगा। दूसरा, अमेरिका ने ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का वादा किया है। तीसरा, अमेरिका अपनी समुद्री नाकेबंदी हटाएगा और 30 दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा। चौथा, अमेरिकी सेना ईरान के आसपास के क्षेत्रों से पीछे हट जाएगी और पांचवां, ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी जिससे ईरान को अपनी तेल की कमाई का पैसा वापस मिल सकेगा। छठा, अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर तक की वित्तीय सहायता प्रदान करेंगे।

सातवें बिंदु के अनुसार, अगले 60 दिनों तक दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर विस्तृत चर्चा जारी रहेगी। आठवां, ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत यह प्रतिबद्धता जताएगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। नौवां और दसवां बिंदु यह सुनिश्चित करता है कि बातचीत के दौरान अमेरिका न तो कोई नया प्रतिबंध लगाएगा और न ही ईरान के खिलाफ कोई नई सैन्य कार्रवाई करेगा। ग्यारहवें बिंदु के तहत, ईरान की 24 अरब डॉलर की फ्रीज की गई संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से वापस किया जाएगा। बारहवां बिंदु समझौते के पालन की निगरानी के लिए एक तंत्र बनाने की बात करता है। तेरहवें बिंदु में अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से मंजूरी दिलाने का प्रयास शामिल है और चौदहवें बिंदु में स्पष्ट किया गया है कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम और उसके समर्थित प्रॉक्सी संगठन इस विशेष बातचीत का हिस्सा नहीं होंगे।

परमाणु कार्यक्रम और अनसुलझे सवाल

हालांकि 14 बिंदुओं पर सहमति बन गई है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर अभी भी कुछ पेंच फंसे हुए हैं। समझौते में ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को खत्म करने और उसकी सख्त निगरानी की बात कही गई है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इससे क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति स्थापित होगी। लेकिन इस मुद्दे पर दोनों देशों के रुख में भिन्नता है। अमेरिका का कहना है कि यूरेनियम को पूरी तरह नष्ट किया जाना चाहिए, जबकि ईरान का तर्क है कि उसे अपने देश में ही कम संवर्धित रूप में यूरेनियम रखने की अनुमति दी जानी चाहिए। यह वर्तमान समझौता केवल एक प्रारंभिक समझौता (MoU) है, न कि अंतिम शांति संधि। ईरान के उप-विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने कहा है कि ईरान पहले यह देखेगा कि अमेरिका अपने वादों पर कितना खरा उतरता है, उसके बाद ही अंतिम समझौते की दिशा में कदम बढ़ाएगा।

हस्ताक्षर समारोह और सुरक्षा प्रोटोकॉल

स्विट्जरलैंड में होने वाले हस्ताक्षर समारोह में अमेरिकी प्रतिनिधित्व को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिया है कि वह इस समारोह में शामिल हो सकते हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भी वहां पहुंचने की संभावना है। हालांकि, सुरक्षा कारणों और फ्रांस में आयोजित होने वाले G7 सम्मेलन के व्यस्त कार्यक्रम के कारण अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के नियमों के अनुसार, सुरक्षा कारणों से राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को आमतौर पर एक साथ किसी विदेशी कार्यक्रम में नहीं भेजा जाता है। इसी वजह से यह संभावना अधिक है कि ट्रंप या जेडी वेंस में से कोई एक ही इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए स्विट्जरलैंड जाएगा।

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