आईटीआर अलर्ट: कमाई छिपाने पर लगेगा 200 प्रतिशत जुर्माना और ब्रिटेन जाने वालों को बड़ी राहत
आयकर रिटर्न भरने में देरी और आय छिपाने पर लगने वाले भारी जुर्माने के बारे में जानें। साथ ही, भारत-ब्रिटेन के नए समझौते से पीएफ खाते में होने वाले लाभ की जानकारी प्राप्त करें।
इनकम टैक्स रिटर्न यानी आईटीआर दाखिल करना केवल एक कानूनी औपचारिकता नहीं है बल्कि यह आपकी वित्तीय जिम्मेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी या अपनी कमाई की जानकारी छिपाना आपके लिए बहुत भारी पड़ सकता है। आयकर विभाग के नियमों के अनुसार, यदि कोई करदाता अपनी वास्तविक आय को कम बताता है या उसमें हेराफेरी करने की कोशिश करता है, तो उसे भारी जुर्माने का सामना करना पड़ता है। वित्तीय मामलों में की गई छोटी सी भी लापरवाही आपकी मेहनत की कमाई को जुर्माने के रूप में खत्म कर सकती है।
आय छिपाने पर कड़े दंड का प्रावधान
आयकर अधिनियम के तहत टैक्स चोरी और आमदनी छिपाने को एक गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है। धारा 270A के प्रावधानों के मुताबिक, अगर कोई करदाता अपनी आय को कम करके दिखाता है, जिसे अंडर-रिपोर्टिंग कहा जाता है, तो उसे छिपाई गई आय पर बनने वाले कुल टैक्स का 50 प्रतिशत हिस्सा जुर्माने के रूप में देना होगा। लेकिन यदि यह पाया जाता है कि करदाता ने जानबूझकर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है या फर्जी प्रविष्टियां की हैं, तो इसे मिसरिपोर्टिंग माना जाता है। ऐसी स्थिति में जुर्माना और भी अधिक कठोर हो जाता है और यह बढ़कर टैक्स राशि का 200 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इसका सीधा मतलब यह है कि आपको मूल टैक्स के साथ-साथ उसका दोगुना जुर्माना भी भरना होगा।
समय पर रिटर्न न भरने के अन्य नुकसान
अक्सर देखा गया है कि लोग अंतिम तारीख तक आईटीआर दाखिल करने का इंतजार करते हैं, जो बाद में महंगा साबित होता है और आयकर अधिनियम की धारा 234F के अनुसार, डेडलाइन बीतने के बाद रिटर्न फाइल करने पर 5,000 रुपये तक की लेट फीस देनी पड़ सकती है। हालांकि, जिन करदाताओं की कुल सालाना आय 5 लाख रुपये से कम है, उनके लिए राहत की बात यह है कि यह फीस केवल 1,000 रुपये तक ही सीमित रखी गई है। इसके अलावा, टीडीएस या टीसीएस स्टेटमेंट दाखिल करने में देरी होने पर धारा 234E के तहत हर दिन 200 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। यदि आप जरूरी खाते या बहीखाते मेंटेन नहीं करते हैं, तो धारा 271A के तहत 25,000 रुपये की पेनाल्टी लग सकती है। वहीं, ऑडिट न कराने की स्थिति में टर्नओवर का शून्य और 50 पैसे प्रतिशत या अधिकतम 1 लाख 50,000 रुपये तक का जुर्माना चुकाना पड़ सकता है।
ब्रिटेन जाने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए खुशखबरी
एक तरफ जहां टैक्स के नियम कड़े हैं, वहीं विदेश में नौकरी करने वाले भारतीयों के लिए केंद्र सरकार एक बड़ी राहत लेकर आई है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, 15 जुलाई से भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता और डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन लागू होने जा रहा है। इससे पहले जब भारतीय पेशेवर 2 से 5 साल के छोटे असाइनमेंट के लिए ब्रिटेन काम करने जाते थे, तो उनकी सैलरी का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा वहां के नेशनल इंश्योरेंस कंट्रीब्यूशन में कट जाता था। चूंकि ब्रिटेन में पेंशन का लाभ लेने के लिए कम से कम 10 साल वहां रहना अनिवार्य है, इसलिए कम समय के लिए जाने वाले भारतीयों को अपनी इस कटी हुई रकम का भविष्य में कोई फायदा नहीं मिल पाता था और यह पैसा एक तरह से डूब जाता था।
भारतीय पीएफ खाते में जमा होगा पैसा
नए समझौते के लागू होने के बाद अब यह स्थिति पूरी तरह बदल जाएगी। डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन के तहत जो भारतीय 5 साल तक के लिए ब्रिटेन जाएंगे, उनकी सैलरी का वह 25 प्रतिशत हिस्सा अब ब्रिटेन सरकार के पास नहीं रहेगा। इसके बजाय, वह पैसा सीधे भारत में उनके प्रोविडेंट फंड यानी पीएफ खातों में जमा किया जाएगा। इस जमा राशि पर कर्मचारियों को भारत में 8 और 25 पैसे प्रतिशत का टैक्स-फ्री ब्याज मिलता रहेगा। सरकार का यह कदम न केवल विदेश में काम करने वाले भारतीयों की वर्तमान बचत को बढ़ाएगा, बल्कि उनके रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा फंड तैयार करने और उनके परिवार की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी मददगार साबित होगा।
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