इंडियन ऑयल का 75000 करोड़ का महा-प्लान: 2026 तक रिफाइनिंग में बनेगा नया रिकॉर्ड

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन 75000 करोड़ रुपये के निवेश से 2026 तक अपनी रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाकर 98 दशमलव 05 MMTPA करेगी, जिससे भारत के निर्यात में बड़ी वृद्धि होगी।

Jul 10, 2026 - 12:35
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इंडियन ऑयल का 75000 करोड़ का महा-प्लान: 2026 तक रिफाइनिंग में बनेगा नया रिकॉर्ड

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने अपनी रिफाइनिंग क्षमता को विस्तार देने के लिए 75000 करोड़ रुपये के एक विशाल प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत दिसंबर 2026 तक कंपनी की रिफाइनिंग क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करना है, बल्कि भारत के पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में भी बड़ी हिस्सेदारी हासिल करना है। वर्तमान में कंपनी की रिफाइनिंग क्षमता 80 दशमलव 75 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जिसे बढ़ाकर रिकॉर्ड 98 दशमलव 05 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष करने का लक्ष्य रखा गया है।

निवेश और विस्तार की विस्तृत योजना

इस 75000 करोड़ रुपये के मेगा प्रोजेक्ट के लिए अब तक 53500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है। यह निवेश कंपनी की भविष्य की रणनीतियों और वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस विस्तार कार्यक्रम के केंद्र में तीन प्रमुख रिफाइनरीज हैं: पानीपत, वडोदरा और बरौनी। पानीपत रिफाइनरी की क्षमता को 15 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 25 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष किया जा रहा है। इसी तरह, वडोदरा रिफाइनरी की क्षमता 13 दशमलव 7 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 18 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष की जाएगी। बरौनी रिफाइनरी में भी क्षमता विस्तार का काम चल रहा है, जहां इसे 6 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष किया जाएगा। इन तीनों महत्वपूर्ण परियोजनाओं के नवंबर या दिसंबर 2026 तक पूरी तरह चालू होने की योजना है।

निर्यात क्षमता और राजस्व में वृद्धि

आईओसीएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ईटी की रिपोर्ट में जानकारी दी है कि घरेलू जरूरतों को पूरा करने के बाद जो भी अतिरिक्त क्षमता बचेगी, कंपनी उसे निर्यात करने पर विचार करेगी। इस विस्तार से कंपनी के निर्यात हिस्सेदारी को मौजूदा 5 प्रतिशत से बढ़ाकर कुल राजस्व का लगभग 15 प्रतिशत तक ले जाने की क्षमता विकसित होगी। हालांकि, कंपनी किसी निश्चित निर्यात लक्ष्य के बजाय घरेलू बाजार को प्राथमिकता देती है। भारत का पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात, जो पिछले वित्त वर्ष में 44 दशमलव 4 बिलियन डॉलर था, उसमें आने वाले वर्षों में एक-चौथाई की बढ़ोतरी हो सकती है।

वैश्विक रिफाइनिंग हब के रूप में भारत

भारत के रिफाइनिंग सेक्टर की मौजूदा स्थापित क्षमता लगभग 258 दशमलव 1 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जबकि घरेलू खपत लगभग 239 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है। भारतीय रिफाइनरीज आमतौर पर अपनी क्षमता के 105 से 115 प्रतिशत पर काम करती हैं, जिससे वास्तविक वार्षिक उत्पादन लगभग 300 मिलियन टन तक पहुंच जाता है। इसमें से लगभग 61 दशमलव 5 मिलियन टन का अतिरिक्त उत्पादन निर्यात किया जाता है। वर्तमान में भारत के रिफाइंड फ्यूल निर्यात का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा रिलायंस इंडस्ट्रीज से आता है, जो जामनगर में 70 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाली दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी चलाती है। आईओसीएल द्वारा 2026 के अंत तक 17 दशमलव 3 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता जोड़ने से भारत की स्थिति एक ग्लोबल रिफाइनिंग हब के रूप में और मजबूत होगी।

कच्चे तेल का आयात और वैश्विक चुनौतियां

अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करने के बावजूद, भारत रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के दुनिया के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक बन गया है। भारत अपनी बड़ी और जटिल रिफाइनरीज का उपयोग करके आयातित कच्चे तेल को घरेलू और विदेशी दोनों बाजारों के लिए प्रोसेस करता है। यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता में वृद्धि सीमित है और रूस तथा मध्य पूर्व में जारी रुकावटों के कारण रिफाइनिंग मार्जिन को समर्थन मिल रहा है और यदि घरेलू मांग में भारी वृद्धि होती है, तो निर्यात के लिए सरप्लस कम हो सकता है, लेकिन यह विस्तार विदेशी मुद्रा की कमाई बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।

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