ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन का भारत दौरा, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में होंगे शामिल
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली का दौरा करेंगे। ईरान की सदस्यता और क्षेत्रीय स्थिरता में भारत की भूमिका के महत्व को जानें।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन अगले महीने भारत के एक महत्वपूर्ण दौरे पर आने वाले हैं। ईरानी सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मसूद पेजेश्कियन नई दिल्ली में आयोजित होने वाले आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और यह दौरा तेहरान और नई दिल्ली के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, विशेष रूप से ब्रिक्स गठबंधन के ढांचे के भीतर। आपको बता दें कि ईरान 2024 में मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे अन्य देशों के साथ ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बना था। उभरती अर्थव्यवस्थाओं के इस प्रभावशाली समूह में ईरान के शामिल होने से व्यापार, ऊर्जा और क्षेत्रीय सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते खुल गए हैं।
नई दिल्ली शिखर सम्मेलन का महत्व
ईरानी सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की भागीदारी सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले शिखर सम्मेलन में निर्धारित है। यह यात्रा इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपनी अध्यक्षता में 2026 में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है। आगामी कार्यक्रम उस व्यापक रोडमैप का हिस्सा हैं जहां भारत ने 2026 की शुरुआत में ब्राजील से ब्रिक्स की अध्यक्षता ग्रहण की है। भारत में आयोजित होने वाला यह शिखर सम्मेलन लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण के विषय पर आयोजित किया जाएगा। इस मोड़ पर ईरानी राष्ट्रपति की उपस्थिति दोनों देशों के बीच बढ़ते तालमेल और एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
ब्रिक्स में ईरान की यात्रा
ब्रिक्स में ईरान का एकीकरण एक चरणबद्ध और रणनीतिक प्रक्रिया रही है और 2024 में पूर्ण सदस्य बनने के बाद, 2025 में इंडोनेशिया के इस समूह में शामिल होने से इस समूह का और विस्तार हुआ। इस विस्तार के साथ ही पूर्ण सदस्यों की कुल संख्या अब 11 हो गई है, जिससे ब्रिक्स वैश्विक भू-राजनीति और अर्थशास्त्र में एक अजेय शक्ति बन गया है। इस आगामी यात्रा से पहले, अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। उस बैठक के दौरान, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और विभिन्न क्षेत्रीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा की थी, जिसने कूटनीतिक जुड़ाव के वर्तमान स्तर की नींव रखी थी।
विदेश मंत्री अरागची द्वारा तैयार की गई कूटनीतिक जमीन
राष्ट्रपति की इस यात्रा का मार्ग जून में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची की भारत यात्रा से और प्रशस्त हुआ था। अरागची ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए भारत आए थे और उन्होंने राजधानी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया था। अपने संबोधन के दौरान, अरागची ने दुनिया में शांति लाने में सक्षम राष्ट्र के रूप में नई दिल्ली के बढ़ते प्रभाव पर जोर दिया था। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि भारत पश्चिम एशिया में तनावपूर्ण स्थिति को कम करने में एक बड़ी भूमिका निभा सकता है। अरागची ने स्पष्ट किया कि तेहरान सशस्त्र संघर्ष में कोई भविष्य नहीं देखता है और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा संकटों का कोई सैन्य समाधान नहीं है और उन्होंने बातचीत के जरिए समाधान को ही आगे बढ़ने का एकमात्र व्यावहारिक रास्ता बताया।
क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापार पर सहयोग
अपनी यात्रा के दौरान, अरागची ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ भी उच्च स्तरीय बातचीत की थी। भारतीय मध्यस्थता के प्रति तेहरान के सकारात्मक दृष्टिकोण को व्यक्त करते हुए, अरागची ने कहा था कि ईरान भारत द्वारा निभाई गई किसी भी रचनात्मक भूमिका का स्वागत करेगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि मित्र देश व्यापारिक सुरक्षा के लिए ईरान पर भरोसा कर सकते हैं। इसके अलावा, अरागची ने स्पष्ट किया कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा के संरक्षक के रूप में हमेशा अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी निभाता रहेगा। ये चर्चाएं भारत-ईरान संबंधों की रणनीतिक गहराई को उजागर करती हैं, जो समुद्री सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के सुरक्षित प्रवाह पर केंद्रित हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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