गोल्डमैन सैक्स की भविष्यवाणी: निफ्टी छुएगा 26500 का स्तर, इन 15 शेयरों में दिखेगी तेजी

गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि जून 2027 तक निफ्टी 26,500 के पार जाएगा। मजबूत अर्थव्यवस्था और विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार में बड़ी तेजी की उम्मीद है।

Jul 13, 2026 - 18:35
 0  0
गोल्डमैन सैक्स की भविष्यवाणी: निफ्टी छुएगा 26500 का स्तर, इन 15 शेयरों में दिखेगी तेजी

भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला समय बेहद उत्साहजनक रहने वाला है और यह दावा किसी और ने नहीं बल्कि दुनिया की दिग्गज ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने किया है। फर्म का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और विदेशी निवेशकों की फिर से शुरू हुई खरीदारी के दम पर निफ्टी 50 इंडेक्स जून 2027 तक 26,500 के नए ऐतिहासिक शिखर को छू सकता है। यह अनुमान मौजूदा स्तरों से लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। कमोडिटी की कीमतों में आई कमी, भारतीय रुपये की स्थिरता और कंपनियों के बेहतर होते मुनाफे ने बाजार के प्रति नजरिए को पूरी तरह से सकारात्मक बना दिया है।

मजबूत घरेलू विकास दर से बाजार को मिली नई ऊर्जा

भारत के व्यापक आर्थिक परिदृश्य में हाल के समय में जो सुधार देखने को मिला है, उसने निवेशकों के भरोसे को नई ऊंचाई दी है। गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषण के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कमोडिटी की कीमतों में गिरावट और रुपये की स्थिरता ने भारतीय बाजार के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत की घरेलू विकास दर काफी लचीली और मजबूत बनी हुई है। कुछ समय पहले तक बाजार में आर्थिक सुस्ती को लेकर जो चिंताएं थीं, वे अब दूर होती दिख रही हैं। घरेलू क्षेत्रों में बढ़ती मांग और दूसरी तिमाही में कंपनियों की शानदार कमाई की उम्मीदों ने बाजार में एक नई जान फूंक दी है। इसी आर्थिक सुधार को देखते हुए ब्रोकरेज फर्म को विश्वास है कि निवेशक अब भारतीय बाजार में अपना निवेश बढ़ाने के लिए प्रेरित होंगे।

विदेशी संस्थागत निवेशकों की वापसी का संकेत

पिछले कुछ महीनों के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा की गई भारी बिकवाली ने घरेलू निवेशकों को थोड़ा चिंतित किया था। साल 2026 की पहली छमाही में वैश्विक निवेशकों ने भारतीय बाजार से लगभग 30 अरब डॉलर के शेयर बेचे थे। लेकिन अब यह नकारात्मक दौर पीछे छूटता नजर आ रहा है। गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट बताती है कि विदेशी बिकवाली का सबसे बुरा समय अब खत्म हो चुका है। जून के मध्य से विदेशी निवेशकों ने एक बार फिर भारतीय बाजार में दिलचस्पी दिखाई है और लगभग 2 अरब डॉलर का निवेश किया है। यह निवेश मुख्य रूप से बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में देखा गया है। चूंकि वैश्विक फंड्स के पास अभी भी भारतीय बाजार में निवेश करने की काफी गुंजाइश बची है, इसलिए आने वाले समय में विदेशी पूंजी का प्रवाह और तेज होने की संभावना है।

वैल्यू और लार्जकैप शेयरों पर रहेगा फोकस

बाजार के जानकारों का मानना है कि साल की दूसरी छमाही में निवेश की रणनीति में बदलाव देखने को मिल सकता है। गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, अब निवेशक ग्रोथ शेयरों के बजाय वैल्यू शेयरों को अधिक प्राथमिकता देंगे। इसका मतलब है कि उन कंपनियों के शेयरों में तेजी आने की उम्मीद है जिनका वैल्युएशन अभी आकर्षक है और जो पिछले कुछ समय से उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए थे। ब्रोकरेज ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे मिडकैप के मुकाबले लार्जकैप कंपनियों पर अधिक भरोसा जताएं। साथ ही, निर्यात पर निर्भर कंपनियों के बजाय उन कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करना अधिक फायदेमंद हो सकता है जिनका पूरा कारोबार भारत की घरेलू मांग पर आधारित है।

मुनाफे की रेस में शामिल 15 दिग्गज शेयर

गोल्डमैन सैक्स ने भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए डिफेंस और एनर्जी सिक्योरिटी जैसे विषयों को काफी मजबूत माना है। इसके अलावा फर्म ने यूटिलिटी, बैंक, टूरिज्म, टीएमटी और एनर्जी रिफाइनरी सेक्टर में अपना निवेश बढ़ाने का सुझाव दिया है। इन क्षेत्रों की मजबूती को देखते हुए ब्रोकरेज ने 15 ऐसे लार्जकैप शेयरों की सूची तैयार की है जो इस संभावित तेजी का सबसे ज्यादा लाभ उठा सकते हैं। इन शेयरों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पावर, कोटक महिंद्रा बैंक और एनटीपीसी जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके अलावा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (HAL), इटरनल, पावर ग्रिड कॉर्प, अडानी ग्रीन, इंटरग्लोब एविएशन, एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस, इंडियन होटल्स, मझगांव डॉक और मेकमायट्रिप को भी इस सूची में जगह दी गई है।

मार्च की चिंताओं के बाद बाजार में लौटी रौनक

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इसी साल मार्च में गोल्डमैन सैक्स ने भारतीय बाजार को लेकर अपनी रेटिंग में कटौती की थी और उस समय हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण बाजार में अनिश्चितता का माहौल था। फर्म को डर था कि ऊर्जा संकट के कारण कंपनियों के मुनाफे पर बुरा असर पड़ सकता है और हालांकि, अब परिस्थितियां तेजी से बदली हैं। कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और घरेलू मोर्चे पर मजबूत आर्थिक आंकड़ों ने उन सभी पुरानी चिंताओं को खत्म कर दिया है। अब बाजार एक बार फिर से लंबी अवधि की तेजी के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहा है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow