ट्रंप ने सऊदी अरब को हूतियों से क्यों नहीं बचाया? हमले का प्लान टाला

जानिए क्यों डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के अनुरोध के बावजूद हूतियों पर हमले का प्लान आखिरी समय में टाल दिया और 24 अरब 30 करोड़ डॉलर का हथियार सौदा किया।

Sep 22, 2026 - 13:35
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ट्रंप ने सऊदी अरब को हूतियों से क्यों नहीं बचाया? हमले का प्लान टाला

मिडिल ईस्ट में सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच जारी संघर्ष ने एक नया मोड़ ले लिया है और हाल ही में अमेरिकी मीडिया द्वारा किए गए खुलासे ने इस बात पर रोशनी डाली है कि किस तरह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हूतियों के खिलाफ एक बड़े सैन्य हमले की योजना को अंतिम क्षणों में टाल दिया था। यह घटनाक्रम उस समय का है जब सऊदी अरब लगातार हूती विद्रोहियों के हमलों का सामना कर रहा था और उसने अमेरिका से सैन्य सहायता की गुहार लगाई थी। सऊदी अरब और ईरान समर्थित हूती समूह के बीच यह जंग काफी समय से चल रही है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे के ठिकानों को निशाना बना रहे हैं।

हूतियों के हमले और सऊदी अरब की चिंता

ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ अपनी आक्रामकता को काफी बढ़ा दिया था। इन विद्रोहियों ने न केवल सऊदी अरब की राजधानी रियाद को निशाना बनाया, बल्कि देश की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट क्रूड ऑयल पाइपलाइन पर भी हमले किए। इसके अलावा, हूतियों ने लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में कई महत्वपूर्ण द्वीपों पर अपना कब्जा जमा लिया। इन परिस्थितियों में सऊदी अरब के लिए अपनी सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की रक्षा करना एक बड़ी चुनौती बन गया था। हूतियों की इन गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों के लिए भी खतरा पैदा कर दिया था, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई थी।

ट्रंप का आखिरी समय में यू-टर्न

द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के निवेदन के बाद अमेरिकी सेना ने यमन में हूती विद्रोहियों पर हमला करने की पूरी तैयारी कर ली थी। पेंटागन ने हमले के लिए विशिष्ट ठिकानों और लक्ष्यों की पहचान भी कर ली थी और हालांकि, जब हमले का समय करीब आया, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मन बदल गया। रिपोर्ट के मुताबिक, 16 सितंबर को ट्रंप ने अपने सलाहकारों से स्पष्ट रूप से कहा था कि वह हूतियों पर हमला करने के पक्ष में नहीं हैं। यह फैसला काफी चौंकाने वाला था क्योंकि सैन्य तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं।

मोहम्मद बिन सलमान के साथ बातचीत और आदेश

शुरुआती हिचकिचाहट के बाद, राष्ट्रपति ट्रंप और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच सीधी बातचीत हुई। इस बातचीत के बाद ट्रंप ने हूतियों पर हमले का औपचारिक आदेश जारी कर दिया। इस आदेश के मिलते ही पेंटागन ने हमले के लिए जरूरी सभी रणनीतिक तैयारियां पूरी कीं और अमेरिकी सेना हमले के लिए पूरी तरह तैयार थी। लेकिन, एक बार फिर नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला जब ट्रंप ने आखिरी समय में अपना फैसला बदल दिया और हूतियों के खिलाफ प्रस्तावित इस सैन्य कार्रवाई को रोक दिया। इस फैसले ने सऊदी अरब को हैरान कर दिया, जो अमेरिका से सीधी मदद की उम्मीद कर रहा था।

नया मोर्चा न खोलने की अमेरिकी रणनीति

अमेरिका द्वारा हूतियों के खिलाफ मोर्चा न खोलने के पीछे एक बड़ी रणनीतिक वजह सामने आई है। अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे उस समय हूतियों के खिलाफ एक नया युद्ध शुरू करने के पक्ष में नहीं थे और इसका मुख्य कारण यह था कि अमेरिकी प्रशासन पहले से ही ईरान के साथ जुड़े विभिन्न मुद्दों और चुनौतियों से निपटने में व्यस्त था। अमेरिका नहीं चाहता था कि वह एक साथ कई मोर्चों पर उलझ जाए। हालांकि, अमेरिका ने सऊदी अरब को यह भरोसा दिलाया कि वह उसकी सुरक्षा के लिए ट्रेनिंग और अन्य आवश्यक मदद उपलब्ध कराता रहेगा।

24 अरब 30 करोड़ डॉलर का हथियार सौदा

भले ही अमेरिका ने सीधे सैन्य हमले से दूरी बना ली, लेकिन उसने सऊदी अरब की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं और हाल ही में अमेरिका ने सऊदी अरब को 24 अरब 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर के हथियार बेचने की मंजूरी दी है। इस बड़े रक्षा सौदे में 48 F-35 लड़ाकू विमान और उनसे संबंधित आधुनिक उपकरण शामिल हैं। यह सौदा दर्शाता है कि अमेरिका और सऊदी अरब के बीच रक्षा संबंध अभी भी मजबूत हैं। अमेरिका का मानना है कि इन आधुनिक हथियारों और विमानों की मदद से सऊदी अरब अपनी सुरक्षा खुद करने में अधिक सक्षम हो सकेगा। इस तरह अमेरिका ने सीधे युद्ध में शामिल हुए बिना सऊदी अरब की सैन्य शक्ति को बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है।

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