डोनाल्ड ट्रंप की नीति आंख के बदले सिर की है: ईरान को मार्को रुबियो की कड़ी चेतावनी
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान को चेतावनी दी है कि ट्रंप की नीति 'आंख के बदले सिर' की है। उन्होंने ईरान के भारी आर्थिक और सैन्य नुकसान का दावा किया।
मनीला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान को एक बेहद कड़ी और स्पष्ट चेतावनी दी है। रुबियो ने कहा कि ईरान की हर कार्रवाई के लिए उसे बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति पारंपरिक आंख के बदले आंख वाली नहीं है, बल्कि यह आंख के बदले सिर उतार लेने की नीति है। रुबियो ने आरोप लगाया कि ईरान बार-बार अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन नहीं करता है और जब तक वह गंभीरता से बातचीत की मेज पर नहीं आता, तब तक उस पर दबाव कम नहीं किया जाएगा।
आंख के बदले सिर की नीति
मनीला में प्रेस वार्ता के दौरान रुबियो से पूछा गया था कि क्या अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप की हालिया टिप्पणियों के बाद ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों जैसे नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला करने की संभावना से इनकार करता है। इसके जवाब में रुबियो ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची के उस बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी नीति आंख के बदले आंख की है। इस पर रुबियो ने पलटवार करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की नीति आंख के बदले सिर उतार लेने की है और ईरान जो कुछ भी कर रहा है, उसकी उसे बहुत भारी कीमत चुकानी होगी।
ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था और सैन्य शक्ति
मार्को रुबियो ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाइयों और दबाव के कारण ईरान को अब तक अरबों डॉलर का नुकसान हो चुका है। उन्होंने कहा कि ईरान का औद्योगिक और रक्षा उत्पादन तंत्र लगभग पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है। रुबियो के अनुसार, ईरान हर रात अपने महत्वपूर्ण मिसाइल लॉन्चर और रडार सिस्टम खो रहा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ईरान की अर्थव्यवस्था इस समय गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। रुबियो ने यह भी कहा कि ईरान के भीतर मीडिया पर कड़े प्रतिबंध होने के कारण दुनिया को इन घटनाओं और वहां हो रहे नुकसान की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती है।
कूटनीतिक संदेश और भरोसे का संकट
अमेरिकी विदेश मंत्री ने एक महत्वपूर्ण दावा करते हुए कहा कि ईरान लगातार तीसरे देशों के माध्यम से अमेरिका को संदेश भेज रहा है और समझौता करने की इच्छा जता रहा है। रुबियो ने कहा कि वे लोग हर दिन हमें संदेश भेज रहे हैं और कह रहे हैं कि आइए, कोई समझौता कर लेते हैं। हालांकि, रुबियो ने ईरान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन लोगों का रिकॉर्ड भरोसेमंद नहीं रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान जब भी कोई समझौता करता है, तो या तो उसे तोड़ देता है या फिर बाद में उसकी शर्तें बदलने की कोशिश करता है। रुबियो के अनुसार, कई बार समझौता करने के बाद भी ईरान ने उसका उल्लंघन किया है।
ईरान का जवाबी हमले का दावा
इसी बीच, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और सेना ने दावा किया है कि उन्होंने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान का कहना है कि इन हमलों में अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम, रसद ठिकानों और ड्रोन सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। ईरान इन हमलों को अमेरिका की कार्रवाइयों का जवाब बता रहा है।
बड़े सैन्य अभियान की तैयारी
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ एक नए और पहले से कहीं बड़े सैन्य अभियान पर विचार कर रहे हैं। एक्सियोस की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह अभियान इस साल की शुरुआत में चलाए गए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी से भी बड़ा हो सकता है और राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वयं कहा है कि वह एक बहुत बड़े हमले पर विचार कर रहे हैं जो पहले से कहीं अधिक व्यापक हो सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि वह इस पर फैसला लेने के काफी करीब हैं और इसके लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। हालांकि, एक्सियोस की रिपोर्ट में दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह भी कहा गया है कि अब तक सेना को किसी नए सैन्य अभियान के लिए कोई ताजा आदेश जारी नहीं किया गया है, जिसका अर्थ है कि अंतिम फैसला अभी लिया जाना बाकी है।
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