थलापति विजय का सफर: 10 साल की उम्र में बाल कलाकार से शुरू कर बने सुपरस्टार
थलापति विजय के 40 साल के फिल्मी सफर की कहानी, 1984 में बाल कलाकार के रूप में शुरुआत से लेकर राजनीति में कदम रखने तक का पूरा विवरण।
दक्षिण भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली और लोकप्रिय अभिनेताओं में से एक थलापति विजय ने हाल ही में अभिनय की दुनिया को अलविदा कहकर राजनीति के मैदान में कदम रखा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि करोड़ों दिलों पर राज करने वाले इस सुपरस्टार का फिल्मी सफर आज से लगभग 40 साल पहले शुरू हुआ था? विजय ने अपने करियर की शुरुआत एक बाल कलाकार के रूप में की थी और महज 10 साल की उम्र में ही उन्होंने पर्दे पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी थी। उनका यह सफर न केवल लंबा रहा है बल्कि बेहद प्रेरणादायक भी है, जिसमें उन्होंने एक छोटे से कलाकार से लेकर एक महानायक बनने तक की दूरी तय की है।
पिता के निर्देशन में रखा था पहला कदम
विजय के फिल्मी सफर की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें सिनेमा की दुनिया में लाने का श्रेय उनके पिता और प्रसिद्ध फिल्म निर्माता एस. ए. चंद्रशेखर को जाता है। साल 1984 में आई फिल्म वेत्री वह पहली फिल्म थी जिसमें विजय ने एक बाल कलाकार के रूप में काम किया था। इस फिल्म का निर्देशन उनके पिता ने ही किया था और इस शुरुआती फिल्म में उन्हें अनुराधा, पंडारी बाई और एस. एस. चंद्रन जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिला। पिता और पुत्र की इस जोड़ी ने मिलकर विजय के भविष्य के शानदार करियर की नींव रखी थी।
शुरुआती दौर और पिता के साथ कई फिल्में
थलापति विजय के शुरुआती करियर को संवारने में उनके पिता का योगदान अतुलनीय रहा है। विजय ने अपने करियर के शुरुआती दौर में अपने पिता एस. ए. चंद्रशेखर के निर्देशन में बनी लगभग 7 से 8 फिल्मों में काम किया। वेत्री के बाद उन्होंने कुडुंबम, नांन सिगप्पु मनिथन, वसंत रागम, सट्टम ओरु विलायाट्टू, इधु एंगल नीधि, सेंदूरपांडी, रसीगन, देवा, विष्णु और सुकरन जैसी प्रमुख फिल्मों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इन फिल्मों के माध्यम से उन्हें अभिनय की बारीकियों को समझने और कैमरे के सामने खुद को निखारने का भरपूर अवसर मिला।
बाल कलाकार से महानायक बनने का सफर
एक बाल कलाकार के रूप में पहचान बनाने के बाद विजय ने मुख्य अभिनेता के रूप में अपनी यात्रा शुरू की और देखते ही देखते वे भारत के साथ-साथ विदेशों में भी एक बड़े सुपरस्टार बन गए। उन्होंने अपने करियर में एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं। उनकी सबसे चर्चित फिल्मों में मर्सल, थुप्पाक्की, मास्टर, कथ्थी, द ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम, लियो, बिगिल, थेरी, पोक्किरी, तिरुमलाई और घिल्ली जैसी फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों ने उन्हें न केवल व्यावसायिक सफलता दिलाई बल्कि उन्हें एक जननायक के रूप में भी स्थापित किया।
व्यक्तिगत जीवन और अगली पीढ़ी का आगाज
विजय के निजी जीवन की बात करें तो उन्होंने साल 1999 में संगीता सोर्नालिंगम से विवाह किया था। उनके दो बच्चे हैं, बेटा जेसन संजय और बेटी दिव्या शाशा। अब विजय की अगली पीढ़ी भी मनोरंजन की दुनिया में कदम रखने के लिए तैयार है। उनके बेटे जेसन संजय बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म सिग्मा के साथ अपने करियर की शुरुआत कर रहे हैं। इस फिल्म में संदीप किशन, फारिया अब्दुल्ला, राजू सुंदरम, संपत राज और शिव पंडित जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे।
सिनेमा का आखिरी अध्याय और राजनीति
थलापति विजय ने अब राजनीति में अपनी नई जिम्मेदारी संभाल ली है। अभिनेता के तौर पर उनकी आखिरी फिल्म जन नायकन रही, जो हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। इस फिल्म को दर्शकों से मिला-जुला प्रतिसाद मिला है। जो लोग इस फिल्म को सिनेमाघरों में नहीं देख पाए, वे अब इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर देख सकते हैं। 10 साल की उम्र से शुरू हुआ यह फिल्मी सफर अब एक नए मोड़ पर है, जहाँ विजय अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कर रहे हैं।
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