भारत के पास 60 दिनों का पर्याप्त तेल भंडार, मंत्रालय ने अफवाहें नकारीं

पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत के पास 60 दिनों का तेल स्टॉक है। ईंधन की कमी की अफवाहों को खारिज करते हुए सरकार ने आपूर्ति सुरक्षित होने का आश्वासन दिया है।

Mar 26, 2026 - 18:35
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भारत के पास 60 दिनों का पर्याप्त तेल भंडार, मंत्रालय ने अफवाहें नकारीं

भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश में पेट्रोलियम और एलपीजी की आपूर्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट की है और मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत में ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। देशभर के सभी खुदरा ईंधन आउटलेट पर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। सरकार ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें देश में केवल कुछ दिनों का स्टॉक होने की बात कही गई थी। मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे सुनियोजित तरीके से फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं और अफवाहों पर ध्यान न दें, जिनका उद्देश्य जनता के बीच अनावश्यक दहशत पैदा करना है।

भंडारण क्षमता और वास्तविक स्टॉक का विवरण

मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में केवल 6 दिन का स्टॉक होने का दावा पूरी तरह गलत और निराधार है। भारत के पास वर्तमान में कुल 74 दिनों की पेट्रोलियम भंडारण क्षमता उपलब्ध है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस क्षमता के मुकाबले वर्तमान में लगभग 60 दिनों का वास्तविक स्टॉक भौतिक रूप से मौजूद है। मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अस्थिरता के बावजूद, भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत बनी हुई है। सरकार के अनुसार, देश में लगभग दो महीने की ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है, इसलिए किसी भी प्रकार की कमी की आशंका का कोई ठोस आधार नहीं है।

एलपीजी उत्पादन में वृद्धि और आयात प्रबंधन

तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के मोर्चे पर भी स्थिति सामान्य बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के कदमों के परिणामस्वरूप एलपीजी उत्पादन में 40% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में देश में प्रतिदिन 50 टीएमटी एलपीजी का उत्पादन हो रहा है, जबकि कुल दैनिक आवश्यकता लगभग 80 टीएमटी है। उत्पादन बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम होकर 30 टीएमटी रह गई है। इसके अतिरिक्त, आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू रखने के लिए अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से 800 टीएमटी एलपीजी की खेप पहले ही निर्धारित की जा चुकी है। देश के 22 आयात टर्मिनलों के माध्यम से निरंतर आपूर्ति जारी है और तेल कंपनियां प्रतिदिन 50 लाख से अधिक सिलेंडरों का वितरण कर रही हैं।

पीएनजी नेटवर्क का विस्तार और दीर्घकालिक रणनीति

सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को एक सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में तेजी से बढ़ावा दे रही है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पीएनजी का विस्तार किसी ऊर्जा संकट का संकेत नहीं है, बल्कि यह भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्तमान में भारत की गैस उत्पादन क्षमता 92 एमएमएससीएमडी है, जबकि कुल मांग 191 एमएमएससीएमडी के स्तर पर है। पिछले कुछ वर्षों में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क और घरेलू कनेक्शनों में व्यापक विस्तार किया गया है। सरकार का लक्ष्य स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाकर कार्बन उत्सर्जन को कम करना और नागरिकों को किफायती ईंधन विकल्प प्रदान करना है।

भ्रामक सूचनाओं पर सरकार की सख्त चेतावनी

मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहे भ्रामक वीडियो और संदेशों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अधिकारियों ने पाया है कि कई पोस्ट में अन्य देशों की पुरानी तस्वीरों और वीडियो को भारत की वर्तमान स्थिति बताकर पेश किया जा रहा है और सरकार ने चेतावनी दी है कि सार्वजनिक शांति भंग करने के उद्देश्य से झूठी जानकारी फैलाना एक कानूनन अपराध है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसे शरारती तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी जो जानबूझकर दहशत का माहौल बना रहे हैं। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी जानकारी की पुष्टि मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट या प्रमाणित संचार माध्यमों से ही करें।

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और सुरक्षा उपाय

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति की निगरानी के लिए सरकार निरंतर वैश्विक साझेदारों के संपर्क में है। भारत ने अपनी आयात रणनीति में विविधता लाते हुए विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों से कच्चे तेल की खरीद सुनिश्चित की है। 22 सक्रिय आयात टर्मिनलों और मजबूत पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से देश के आंतरिक हिस्सों तक ईंधन की पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। मंत्रालय के अनुसार, रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) और तेल विपणन कंपनियों के पास मौजूद स्टॉक किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त है। आपूर्ति तंत्र को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वैश्विक व्यवधानों का घरेलू बाजार पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।

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