भारत-पाकिस्तान तनाव: राष्ट्रपति जरदारी के युद्ध संबंधी दावों को भारत ने नकारा

पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के युद्ध संबंधी दावों पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। MEA ने इन आरोपों को निराधार बताया है।

Mar 3, 2026 - 15:35
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भारत-पाकिस्तान तनाव: राष्ट्रपति जरदारी के युद्ध संबंधी दावों को भारत ने नकारा

भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने दावा किया है कि नई दिल्ली एक और सैन्य संघर्ष की तैयारी कर रहा है। राष्ट्रपति जरदारी ने यह बयान पाकिस्तान की संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए दिया और उनके इस बयान को भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' और पिछले सैन्य घटनाक्रमों से उपजे डर के रूप में देखा जा रहा है। भारत सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताते हुए पाकिस्तान को अपनी आंतरिक समस्याओं पर ध्यान देने की नसीहत दी है।

राष्ट्रपति जरदारी के संसद में दिए गए बयान का विवरण

पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने संसद के संयुक्त सत्र में अपने संबोधन के दौरान भारत पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भारत के नेतृत्व की ओर से आ रहे बयान संकेत देते हैं कि वे एक और युद्ध की तैयारी कर रहे हैं। जरदारी ने कहा कि वह क्षेत्रीय शांति के आजीवन समर्थक रहे हैं और युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और उन्होंने भारत को संदेश देते हुए कहा कि युद्ध के मैदान के बजाय सार्थक बातचीत की मेज पर आना ही क्षेत्रीय सुरक्षा का एकमात्र रास्ता है। उनके इस भाषण के दौरान विपक्षी दलों ने भारी हंगामा किया, लेकिन जरदारी ने अपना रुख स्पष्ट रखा।

अफगानिस्तान पर भारत के लिए 'प्रॉक्समी' होने का आरोप

अपने संबोधन में राष्ट्रपति जरदारी ने न केवल भारत को निशाना बनाया, बल्कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर भी तीखे प्रहार किए। उन्होंने आरोप लगाया कि काबुल प्रशासन भारत के लिए एक 'प्रॉक्समी' के रूप में काम कर रहा है और जरदारी ने अफगानिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे किसी दूसरे देश की महत्वाकांक्षाओं के लिए खुद को युद्ध का मैदान नहीं बनने देना चाहिए। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान विरोधी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, जिसे भारत का समर्थन प्राप्त है।

भारत के विदेश मंत्रालय की कड़ी और स्पष्ट प्रतिक्रिया

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने पाकिस्तान के इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि पाकिस्तान की यह पुरानी आदत है कि वह अपनी आंतरिक विफलताओं और अस्थिरता के लिए अपने पड़ोसियों को दोष देता है। भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान खुद आतंकी संगठनों को पनाह देने और उन्हें प्रायोजित करने के लिए वैश्विक स्तर पर जाना जाता है। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि पाकिस्तान इस बात से परेशान है कि अफगानिस्तान अपनी संप्रभुता का स्वतंत्र रूप से प्रयोग कर रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर और मई 2025 के संघर्ष की पृष्ठभूमि

पाकिस्तान के इस डर के पीछे मुख्य कारण 'ऑपरेशन सिंदूर' और मई 2025 में हुआ सीधा सैन्य संघर्ष माना जा रहा है। मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच 4 दिनों तक भीषण सैन्य टकराव हुआ था। इसकी शुरुआत तब हुई थी जब लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' ने पहलगाम में पर्यटकों पर हमला किया था, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी। इस आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकी शिविरों पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। इस कार्रवाई को 'ऑपरेशन सिंदूर' के नाम से जाना जाता है, जिसकी धमक से पाकिस्तान अभी तक उबर नहीं पाया है।

क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक गतिरोध की वर्तमान स्थिति

भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार यह दोहराया है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। विदेश मंत्रालय ने पिछले महीने रमजान के दौरान अफगानिस्तान पर किए गए पाकिस्तानी हवाई हमलों की भी निंदा की थी और उन हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित कई नागरिक हताहत हुए थे। भारत का कहना है कि पाकिस्तान को अपनी धरती से संचालित होने वाले आतंकी ढांचे को नष्ट करना चाहिए, न कि काल्पनिक युद्ध का डर दिखाकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करना चाहिए। वर्तमान में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध न्यूनतम स्तर पर बने हुए हैं।

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