वित्त मंत्री का स्पष्टीकरण: दूध, पेंसिल और अंतिम संस्कार पर नहीं लगता जीएसटी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में स्पष्ट किया कि दूध, पेंसिल और अंतिम संस्कार पर कोई जीएसटी नहीं लगता है। पूरी जानकारी के लिए पढ़ें।

Feb 12, 2026 - 20:35
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वित्त मंत्री का स्पष्टीकरण: दूध, पेंसिल और अंतिम संस्कार पर नहीं लगता जीएसटी

नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियों पर कड़ा रुख अपनाया है। लोकसभा में एक चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने स्पष्ट रूप से उन दावों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि सरकार दूध, पेंसिल और अंतिम संस्कार जैसी बुनियादी आवश्यकताओं पर टैक्स वसूल रही है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि ये सभी वस्तुएं और सेवाएं जीएसटी के दायरे से बाहर हैं या उन पर शून्य प्रतिशत टैक्स लगता है। वित्त मंत्री के अनुसार, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सदन में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है, जिससे आम जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।

दूध और डेयरी उत्पादों पर जीएसटी की वास्तविक स्थिति

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन में स्पष्ट किया कि 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने के बाद से 'खुला दूध' पूरी तरह से टैक्स फ्री रहा है। उन्होंने बताया कि दूध पर कोई जीएसटी नहीं लगाया गया है और यह शून्य प्रतिशत की श्रेणी में आता है। डेयरी क्षेत्र के अन्य उत्पादों के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कई कदम उठाए हैं। अधिकारियों के अनुसार, 3 सितंबर 2025 को आयोजित 56वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे। इसके तहत घी, मक्खन और पनीर जैसे उत्पादों पर लगने वाले टैक्स को 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है। वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार का उद्देश्य डेयरी उत्पादों को वहनीय बनाए रखना है।

शिक्षा और स्टेशनरी वस्तुओं पर टैक्स का प्रावधान

शिक्षा क्षेत्र में जीएसटी को लेकर किए गए दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि प्री-स्कूल से लेकर हायर सेकेंडरी तक की औपचारिक शिक्षा पूरी तरह से जीएसटी मुक्त है और इसके अलावा, ऐसी कोई भी शिक्षा जो किसी मान्यता प्राप्त डिग्री या योग्यता की ओर ले जाती है, उस पर कोई टैक्स नहीं लगाया जाता है। स्टेशनरी वस्तुओं के बारे में उन्होंने स्पष्ट किया कि पेंसिल, शार्पनर, इरेज़र, एक्सरसाइज बुक्स, नोटबुक और नक्शों (Maps) पर 0% जीएसटी लगता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रीमियम स्टेशनरी जैसे महंगे पेन, स्टेपलर और मार्कर पर निर्धारित दर के अनुसार टैक्स देय होता है। शिक्षा के बाजारीकरण के संदर्भ में यह बताया गया कि निजी कोचिंग संस्थान और गैर-मान्यता प्राप्त वोकेशनल कोर्स जीएसटी के दायरे में आते हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं और बीमा क्षेत्र में राहत

स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में वित्त मंत्री ने बताया कि इलाज, नैदानिक परीक्षण (Diagnosis) और देखभाल जैसी स्वास्थ्य सेवाएं 1 जुलाई 2017 से ही 0% जीएसटी के दायरे में हैं। डॉक्टरों और नर्सों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं पर कोई टैक्स नहीं है। हालांकि, नियमों के अनुसार, यदि अस्पताल में कमरे का किराया ₹5000 प्रति दिन से अधिक है (आईसीयू को छोड़कर), तो उस पर टैक्स लागू होता है। 'नेक्स्ट जेन जीएसटी रिफॉर्म्स' के तहत सरकार ने स्वास्थ्य और जीवन बीमा के व्यक्तिगत प्लान को भी 0% जीएसटी स्लैब में शामिल करने का निर्णय लिया है, जिससे आम नागरिकों के लिए बीमा कवर लेना अधिक सुलभ हो गया है।

अंतिम संस्कार और आवश्यक सेवाओं पर स्पष्टीकरण

संसद में चर्चा के दौरान जब अंतिम संस्कार की सेवाओं पर टैक्स का मुद्दा उठा, तो वित्त मंत्री ने इसे पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम संस्कार की सेवाओं (Funeral services) पर कभी कोई जीएसटी नहीं लगाया गया है और यह पूरी तरह से टैक्स फ्री है। उन्होंने कहा कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर गलत जानकारी फैलाना जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से दी जाने वाली आवश्यक वस्तुएं और अन्य बुनियादी नागरिक सेवाएं भी जीएसटी के बोझ से मुक्त रखी गई हैं।

जीएसटी काउंसिल की कार्यप्रणाली और भविष्य के सुधार

वित्त मंत्री ने सदन को बताया कि जीएसटी दरों का निर्धारण जीएसटी काउंसिल द्वारा किया जाता है, जिसमें सभी राज्यों के वित्त मंत्री शामिल होते हैं। दरों में किसी भी प्रकार का बदलाव राज्यों की सहमति और व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही किया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान 'नेक्स्ट जेन जीएसटी रिफॉर्म्स' के माध्यम से कर संरचना को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाने पर है। काउंसिल की बैठकों में नियमित रूप से वस्तुओं की श्रेणियों की समीक्षा की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आवश्यक वस्तुओं पर कर का बोझ न्यूनतम रहे। वित्त मंत्री ने दोहराया कि सरकार पारदर्शी तरीके से काम कर रही है और किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना पर ध्यान न देने का आग्रह किया।

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