सरकारी खजाना हुआ लबालब: नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 8 लाख करोड़ के पार

भारत का नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 10 अगस्त तक 23.09% बढ़कर 8 लाख 11 हजार करोड़ रुपये हो गया है, जिसमें एसटीटी और पर्सनल इनकम टैक्स का बड़ा योगदान है।

Aug 12, 2026 - 09:35
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सरकारी खजाना हुआ लबालब: नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 8 लाख करोड़ के पार

भारतीय अर्थव्यवस्था और सरकारी खजाने के मोर्चे पर एक अत्यंत उत्साहजनक और राहत भरी खबर सामने आई है। चालू वित्त वर्ष में 10 अगस्त तक भारत का नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन सालाना आधार पर 23 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के साथ 8 लाख 11 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी सीबीडीटी द्वारा जारी किए गए ये आंकड़े देश में तेजी से बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, कंपनियों की मजबूत कमाई और कर अनुपालन में आए सुधार का सीधा प्रमाण पेश करते हैं। सीबीडीटी के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि टैक्स कलेक्शन में आई इस तेजी को पर्सनल इनकम टैक्स और कॉर्पोरेट टैक्स दोनों में दर्ज की गई दोहरे अंकों की वृद्धि से जबरदस्त समर्थन मिला है।

टैक्स कलेक्शन के आंकड़ों का विस्तृत विवरण

आयकर विभाग द्वारा करदाताओं को बड़े पैमाने पर रिफंड जारी किए जाने के बावजूद नेट कलेक्शन में 23 दशमलव 09 प्रतिशत की यह भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में इस रफ्तार से सरकार को अपने निर्धारित बजटीय लक्ष्यों को समय पर हासिल करने और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने में बड़ी मदद मिलेगी। टैक्स राजस्व में यह रिकॉर्ड बढ़त इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत की औपचारिक अर्थव्यवस्था का दायरा अब पहले के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है और सरकार के पास अब बुनियादी ढांचे के विकास, रक्षा क्षेत्र और विभिन्न सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करने के लिए अधिक वित्तीय क्षमता उपलब्ध है, जिससे आने वाले समय में आर्थिक विकास को और अधिक गति मिलने की संभावना है।

कॉर्पोरेट और नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स में वृद्धि

मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, समीक्षाधीन अवधि के दौरान नेट कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन 19 दशमलव 83 प्रतिशत बढ़कर करीब 2 लाख 70 हजार करोड़ रुपये रहा है। वहीं दूसरी ओर, पर्सनल इनकम टैक्स समेत नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन में 23 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, जो 5 लाख 7 हजार करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि व्यक्तिगत करदाताओं और गैर-कॉर्पोरेट संस्थाओं की ओर से कर योगदान में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इसके अलावा, शेयर बाजार में होने वाले लेनदेन पर लगने वाले टैक्स यानी सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) से प्राप्त राजस्व में 51 प्रतिशत की भारी उछाल दर्ज की गई है, जो बढ़कर 33 हजार 824 करोड़ रुपये हो गया है।

ग्रॉस कलेक्शन और रिफंड की स्थिति

अगर ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन की बात करें, तो इसमें 19 दशमलव 75 प्रतिशत का इजाफा हुआ है और यह करीब 9 लाख 55 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस ग्रॉस कलेक्शन में कॉर्पोरेट टैक्स, पर्सनल इनकम टैक्स और एसटीटी तीनों शामिल हैं। रिफंड के मोर्चे पर भी विभाग सक्रिय रहा है। 1 अप्रैल से 10 अगस्त, 2026 के बीच सरकार ने 1 लाख 43 हजार करोड़ रुपये के कर रिफंड जारी किए हैं। यह आंकड़ा पिछले साल की इसी समान अवधि की तुलना में 3 दशमलव 8 प्रतिशत अधिक है। रिफंड की इस प्रक्रिया के बावजूद नेट कलेक्शन में 23 प्रतिशत की वृद्धि होना सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

बजटीय लक्ष्य और विशेषज्ञों की राय

भारत सरकार ने चालू वित्त वर्ष के बजट में डायरेक्ट टैक्स के माध्यम से कुल 26 लाख 97 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह लक्ष्य वित्त वर्ष 2025-26 में जुटाए गए 23 लाख 40 हजार करोड़ रुपये के टैक्स रेवेन्यू से करीब 15 प्रतिशत अधिक है। डेलॉयट इंडिया के साझेदार रोहिंटन सिधवा ने इन आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि टैक्स कलेक्शन के ये आंकड़े नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स और एसटीटी में मजबूत ग्रोथ के साथ-साथ रिफंड की धीमी गति को भी दर्शाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हालांकि आने वाले महीनों में रिफंड की गति बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल सकल कॉर्पोरेट कर संग्रह में वृद्धि अपेक्षाकृत कम यानी करीब 14 प्रतिशत के आसपास रही है।

आर्थिक विकास पर प्रभाव

टैक्स कलेक्शन में यह निरंतर वृद्धि देश की राजकोषीय स्थिति को मजबूत करती है। जब सरकार का खजाना लबालब होता है, तो विकास कार्यों के लिए धन की कमी नहीं होती। इससे न केवल राजकोषीय घाटे को कम करने में मदद मिलती है, बल्कि विदेशी निवेशकों का भरोसा भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर बढ़ता है। आने वाले समय में यदि टैक्स कलेक्शन की यही रफ्तार बनी रहती है, तो सरकार अपने वार्षिक लक्ष्यों को आसानी से पार कर लेगी, जिससे देश के बुनियादी ढांचे और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में बड़े निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा।

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