सोनिया गांधी की आत्मकथा: अपनों को खोने के दर्द ने राजनीति में लाया, जीवन के अनकहे पन्ने खुले

सोनिया गांधी की आत्मकथा 'Belonging: A Journey of Love' में उनके इटली से भारत तक के सफर और राजनीति में आने के संघर्षों का वर्णन है।

Aug 19, 2026 - 19:35
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सोनिया गांधी की आत्मकथा: अपनों को खोने के दर्द ने राजनीति में लाया, जीवन के अनकहे पन्ने खुले

कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख और कांग्रेस पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी आगामी आत्मकथा 'Belonging: A Journey of Love' के माध्यम से अपने जीवन के अनछुए पहलुओं को दुनिया के सामने रखा है और हालांकि यह 544 पन्नों की किताब 10 नवंबर को आधिकारिक रूप से प्रकाशित होगी, लेकिन उससे पहले प्रकाशक की ओर से सोनिया गांधी का एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया गया है। न्यूयॉर्क से जारी इस बयान में सोनिया गांधी ने स्वीकार किया कि अपने जीवन के बारे में लिखना उनके लिए एक कठिन प्रक्रिया थी। उन्होंने कहा कि इसके लिए उन्हें उन अनुभवों और भावनाओं को फिर से जीना पड़ा और उजागर करना पड़ा, जिन्हें उन्होंने दशकों से अपने दिल के किसी कोने में छिपाकर रखा था।

राजनीति में आने की असली वजह

सोनिया गांधी ने अपनी आत्मकथा में इस बात का खुलासा किया है कि उनके जीवन में आए दुखों के पहाड़ और अपनों को खोने के गहरे दर्द ने ही उन्हें राजनीति की दुनिया में कदम रखने के लिए मजबूर किया। उन्होंने बताया कि राजनीति में आने से पहले वह अपनी निजता यानी प्राइवेसी की पूरी तरह से रक्षा करती थीं और एक निजी जीवन जीना पसंद करती थीं। उन्होंने कहा कि अपने जीवन के बारे में लिखना आसान नहीं था क्योंकि इसका मतलब उन पलों और अनुभवों को साझा करना था जिन्हें उन्होंने हमेशा बहुत संभालकर रखा था। यह किताब उनके जीवन की खुशियों और गहरी निराशाओं से भरी एक भावनात्मक यात्रा का जीवंत प्रमाण है।

प्रकाशन और प्रतियों का विवरण

सोनिया गांधी की इस बहुप्रतीक्षित आत्मकथा को न्यूयॉर्क स्थित प्रसिद्ध प्रकाशन संस्था अल्फ्रेड ए. नॉफ द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है। प्रकाशक ने मंगलवार को घोषणा की कि यह पुस्तक 10 नवंबर को हार्डकवर और ई-बुक दोनों संस्करणों में जारी की जाएगी। इसके साथ ही पाठकों के लिए इसका ऑडियो संस्करण भी उपलब्ध कराया जाएगा। पुस्तक की लोकप्रियता और महत्व को देखते हुए प्रकाशक ने पहली बार में ही 100000 प्रतियों की छपाई की घोषणा की है। सोनिया गांधी ने उम्मीद जताई है कि यह पुस्तक उनके परिवार के फैसलों के पीछे की वास्तविक भावनाओं, उनके कार्यों और उनकी मानवीय कमजोरियों की सच्चाई को लोगों तक पहुंचाएगी।

गांधी परिवार की मानवीयता का चित्रण

सोनिया गांधी ने कहा कि उनके परिवार के बारे में अब तक बहुत कुछ लिखा जा चुका है, लेकिन बहुत कम विवरण ऐसे रहे हैं जो उनके फैसलों के पीछे की असली वजहों और मानवीय संवेदनाओं तक पहुंच पाए हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पुस्तक कई मायनों में उनके परिवार की 'मानवीयता' को समर्पित है। वह चाहती हैं कि लोग उनके परिवार को केवल राजनीतिक चश्मे से न देखें, बल्कि उन परिस्थितियों और भावनाओं को भी समझें जिन्होंने उनके जीवन को आकार दिया है।

इटली से भारत तक का सफर

इस आत्मकथा में सोनिया गांधी के इटली में बिताए बचपन की सरलता से लेकर भारत में उनके जीवन की जटिलताओं तक का पूरा वर्णन है और इसमें राजीव गांधी के साथ उनके विवाह और देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की बहू बनने के अनुभवों को विस्तार से साझा किया गया है। सोनिया गांधी ने बताया कि जब उन्होंने राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बनाने के बाद अपने जीवन को पीछे मुड़कर देखा, तो उन्हें एहसास हुआ कि उनके जीवन के हर पड़ाव को जोड़ने वाली सबसे मजबूत कड़ी 'प्रेम और निष्ठा' रही है।

राजीव गांधी से मुलाकात और पारिवारिक त्रासदियां

किताब की शुरुआत वर्ष 1965 में इंग्लैंड के कैंब्रिज से होती है, जहां 19 साल की छात्रा सोनिया माइनो की मुलाकात राजीव गांधी से हुई थी। उन्हें पहली ही नजर में राजीव गांधी से प्यार हो गया था, जिसके बाद दोनों ने विवाह कर लिया। आत्मकथा में इंदिरा गांधी से उनकी पहली मुलाकात, हिंदी सीखने के उनके शुरुआती संघर्ष, साड़ी पहनने के अनुभव और भारतीय व्यंजनों के प्रति उनके लगाव का भी जिक्र है। इसके साथ ही, किताब में गांधी परिवार पर टूटे दुखों के पहाड़ का भी वर्णन है और इसमें राजीव गांधी के छोटे भाई संजय गांधी की विमान हादसे में मृत्यु, 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या और उसके सात साल बाद चुनाव प्रचार के दौरान राजीव गांधी की हत्या की दर्दनाक घटनाओं को शामिल किया गया है।

राजनीति का दबाव और 2004 का ऐतिहासिक फैसला

सोनिया गांधी ने अपनी आत्मकथा में बताया है कि कैसे उन्होंने कई वर्षों तक राजनीति में आने के भारी दबाव को टाला था, लेकिन अंततः परिस्थितियों के कारण उन्हें सक्रिय राजनीति में कदम रखना पड़ा। पुस्तक में 2004 के उस ऐतिहासिक घटनाक्रम का भी उल्लेख है, जब कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। सोनिया गांधी का मानना है कि उनकी यह कहानी पाठकों को पिछले छह दशकों के दौरान भारत में हुए सामाजिक और राजनीतिक बदलावों को एक नए नजरिए से देखने का मौका देगी। उन्होंने भारत को एक 'खूबसूरत देश' बताया है जिसे वह पूरी तरह से अपना मानती हैं।

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