सोनिया गांधी पर वंदे मातरम् रोकने का आरोप: कांग्रेस ने दी सफाई, बताया नए कानून का पालन
कांग्रेस ने सोनिया गांधी पर वंदे मातरम् रोकने के भाजपा के आरोपों को खारिज किया। जयराम रमेश ने कहा कि 2026 के नए कानून के तहत 6 छंदों वाला पूरा गीत गाया गया।
दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर आयोजित तिरंगा फहराने के कार्यक्रम के दौरान एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् के गायन को रोकने की कोशिश की। इन आरोपों के बाद कांग्रेस पार्टी ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए भाजपा के दावों को पूरी तरह से भ्रामक और गलत करार दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा कि कार्यक्रम में किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं डाला गया था और सब कुछ निर्धारित नियमों के तहत ही संपन्न हुआ।
भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस का पलटवार
जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम् के गायन को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया था। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर भाजपा द्वारा फैलाए जा रहे वीडियो के एक हिस्से को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। रमेश के अनुसार, सोनिया गांधी उस समय पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी मंगवाने की बात कर रही थीं, क्योंकि वह काफी देर से खड़े थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि कार्यक्रम में नए कानून के प्रावधानों के अनुसार पूरा वंदे मातरम् गाया गया और इसमें किसी ने भी हस्तक्षेप नहीं किया और कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी इस बात की पुष्टि की कि मुख्यालय में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् के गायन में कोई बाधा नहीं आई थी और भाजपा के आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।
क्या है नया कानून: प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट टू नेशनल हॉनर अमेंडमेंट बिल 2026
वंदे मातरम् को लेकर यह विवाद नए कानूनी बदलावों के बीच आया है। सरकार द्वारा संसद में प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट टू नेशनल हॉनर (अमेंडमेंट) बिल 2026 को इसी मानसून सत्र के दौरान पेश किया गया था। यह बिल राज्यसभा में 29 जुलाई और लोकसभा में 30 जुलाई को पारित किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद वंदे मातरम् को राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून के तहत अतिरिक्त कानूनी संरक्षण प्राप्त हुआ है। नए प्रावधानों के तहत वंदे मातरम् के गायन का जानबूझकर अपमान करना या उसके गायन में बाधा डालना अब एक दंडनीय अपराध बना दिया गया है और इस कानून के माध्यम से राष्ट्रीय गीत को कानूनी संरक्षण के मामले में राष्ट्रीय गान के बराबर लाने का प्रयास किया गया है।
वंदे मातरम् का नया प्रोटोकॉल और 6 छंदों की अनिवार्यता
सरकार ने वंदे मातरम् के गायन को लेकर एक नया प्रोटोकॉल भी जारी किया है। गृह मंत्रालय के ताजा दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब आधिकारिक सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के केवल शुरुआती 2 छंदों के बजाय सभी 6 छंदों वाला पूरा संस्करण गाना अनिवार्य है। इस पूरे संस्करण की अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है। नए नियमों के तहत कुछ औपचारिक सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गान से पहले या बाद में निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार बजाने या गाने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। कांग्रेस का कहना है कि उन्होंने इसी 3 मिनट 10 सेकंड वाले पूरे संस्करण का गायन किया, जिसे भाजपा ने रोकने की कोशिश के रूप में प्रचारित किया।
शशि थरूर के सवाल और राजनीतिक बहस
वंदे मातरम् के अनिवार्य गायन और इसके नए स्वरूप को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पूरे वंदे मातरम् के अनिवार्य गायन को लेकर कुछ सवाल उठाए हैं और थरूर का तर्क है कि किसी भी गीत के प्रति सम्मान केवल कानून बनाकर पैदा नहीं किया जा सकता। उन्होंने इसके व्यावहारिक पहलुओं पर भी ध्यान आकर्षित किया और कहा कि लंबे कार्यक्रमों के दौरान लोगों को 3 मिनट 10 सेकंड जैसी लंबी अवधि तक खड़े रहने में दिक्कतें हो सकती हैं। यही बदलाव इस समय राजनीतिक विवाद का मुख्य केंद्र बना हुआ है, जहां एक तरफ भाजपा इसे राष्ट्रभक्ति से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस इसे प्रोटोकॉल का पालन बता रही है।
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