अमेरिका का ईरान पर बड़ा पलटवार: मिसाइल और ड्रोन ठिकानों को बनाया निशाना, होर्मुज तनाव बढ़ा
अमेरिका ने होर्मुज में जहाज पर हमले के बाद ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों पर हमला किया। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे सीजफायर का उल्लंघन बताया।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। शुक्रवार को अमेरिकी सेना ने ईरानी मिसाइल और ड्रोन साइट्स को निशाना बनाकर बड़ा हमला किया और यह सैन्य कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में एक कार्गो जहाज पर हुए ड्रोन हमले के जवाब में की गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए इसे सीजफायर का स्पष्ट उल्लंघन करार दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब दोनों देश युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए बातचीत के दौर से गुजर रहे थे।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड की बड़ी सैन्य कार्रवाई
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि उनकी सेना ने ईरान के भीतर स्थित मिसाइल और ड्रोन साइटों के साथ-साथ तटीय रडार केंद्रों पर भी हमले किए हैं। इन ठिकानों का इस्तेमाल समुद्री जहाजों पर हमले करने या उनकी निगरानी करने के लिए किया जा रहा था। इस हमले से कुछ समय पहले ही राष्ट्रपति ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में संकेत दिया था कि अमेरिका ड्रोन हमले का जवाब देगा। उन्होंने कहा था कि आपको जल्द ही पता चल जाएगा कि हमारा अगला कदम क्या होगा।
ट्रंप ने बीच में ही रोकी प्रेस कॉन्फ्रेंस
व्हाइट हाउस में जवाबी हमले की खबर आने से कुछ देर पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप काफी सख्त नजर आए। उन्होंने कहा कि उन्हें यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई कि ईरान ने हमला किया, और उन्होंने स्पष्ट किया कि असल में चार हमले किए गए थे। जब पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि एक तरफ तेहरान के साथ बातचीत अच्छी चलने का दावा किया जा रहा है और दूसरी तरफ हमले हो रहे हैं, तो ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व के बारे में कहा कि वे थोड़े अलग हैं और इसके तुरंत बाद उन्होंने अचानक सवाल-जवाब का सिलसिला बंद कर दिया और पत्रकारों को अपने दफ्तर से बाहर भेज दिया।
ओमान के तट के पास कंटेनर जहाज पर हमला
ब्रिटिश सेना द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गुरुवार को ओमान के तट के पास एक कंटेनर जहाज पर किसी अज्ञात वस्तु से हमला किया गया था। यह हमला ईरान द्वारा दी गई उस धमकी के कुछ ही घंटों बाद हुआ जिसमें उसने जहाजों को उस विशिष्ट समुद्री रास्ते का इस्तेमाल न करने के लिए कहा था। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स सेंटर ने पुष्टि की है कि इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन इसने समुद्री सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
संयुक्त राष्ट्र की निकासी योजना पर लगा ब्रेक
कार्गो शिप पर यह हमला उस समय हुआ जब संयुक्त राष्ट्र की एक समुद्री एजेंसी इस हफ्ते होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान शुरू कर रही थी। इस अभियान के तहत जहाजों को होर्मुज के मुख्य रास्ते के बजाय ओमान के तटों के पास से एक वैकल्पिक रास्ते से ले जाने की योजना थी। हमले के बाद इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन ने निकासी का काम तुरंत रोक दिया है। एजेंसी के महासचिव आर्सेनियो डोमिंग्वेज ने शुक्रवार को कहा कि जब तक अन्य जहाजों की सुरक्षा की पूर्ण गारंटी नहीं मिल जाती, तब तक वे इस अभियान को फिर से शुरू नहीं करेंगे।
शिपिंग डेटा और शांति वार्ता की स्थिति
आर्सेनियो डोमिंग्वेज ने बताया कि हाल के दिनों में लगभग 115 जहाज होर्मुज से बाहर निकलने में सफल रहे थे, लेकिन अभी भी लगभग 500 जहाज उस इलाके में फंसे हुए हैं। मरीन डेटा कंपनी विंडवर्ड के अनुसार, होर्मुज में कमर्शियल भरोसा बढ़ने के एक हफ्ते बाद ही इसे बड़ी चुनौती मिली है। बुधवार को 78 जहाज इस रास्ते से गुजरे थे, जो युद्ध शुरू होने के बाद सबसे बड़ी संख्या थी, हालांकि यह युद्ध से पहले के रोजाना 130 या उससे ज्यादा जहाजों के औसत से काफी कम है। लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के मुताबिक, ईरान के दबाव के कारण कम से कम दो टैंकरों को अपना रास्ता बदलना पड़ा। वर्तमान में अमेरिका और ईरान एक समझौते पर बातचीत कर रहे हैं जिसके लिए 60 दिन का समय तय किया गया है, जिसमें होर्मुज से जहाजों की आवाजाही और ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं।
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