इजराइल चुनाव में अरब दलों पर वोट चोरी का गंभीर आरोप और राजनीतिक संकट, जानें मुख्य अपडेट

इजराइल चुनाव के शुरुआती नतीजों के बाद प्रधानमंत्री नेतन्याहू की पार्टी ने अरब दलों पर वोट चोरी और धांधली के गंभीर आरोप लगाए हैं।

Oct 29, 2026 - 09:35
 0  0
इजराइल चुनाव में अरब दलों पर वोट चोरी का गंभीर आरोप और राजनीतिक संकट, जानें मुख्य अपडेट

इजराइल की राजनीति में चुनाव के शुरुआती नतीजों के सामने आने के बाद एक बड़ा विवाद और राजनीतिक भूचाल खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की दक्षिणपंथी पार्टी लिकुड ने अरब राजनीतिक दलों पर चुनाव में भारी गड़बड़ी करने और चुनाव चुराने के गंभीर आरोप लगाए हैं। लिकुड पार्टी का मुख्य दावा है कि अरब दलों ने चुनाव प्रक्रिया में ज्यादा वोट हासिल करने के लिए कई तरह के गलत, अनैतिक और अवैध तरीकों का खुलकर इस्तेमाल किया है। यह पूरा विवाद और आरोप-प्रत्यारोप का दौर ऐसे बेहद संवेदनशील समय में सामने आया है, जब शुरुआती रुझानों और नतीजों के अनुसार ये अरब दल देश में अगली सरकार के गठन में किंगमेकर की अहम भूमिका निभा सकते हैं और सरकार बनाने की चाबी इनके हाथों में हो सकती है।

इस चुनाव की पृष्ठभूमि को समझें तो इजराइल की संसद को नेसेट कहा जाता है और इस संसद में कुल 120 सीटें होती हैं। देश में किसी भी राजनीतिक पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए नेसेट में कम से कम 61 सीटों का जादुई बहुमत हासिल होना अनिवार्य है। लेकिन हालिया चुनाव के शुरुआती नतीजों और रुझानों के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन को फिलहाल स्पष्ट बहुमत मिलता हुआ नजर नहीं आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स और चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 89 प्रतिशत से ज्यादा वोटों की गिनती पूरी हो चुकी है, जिसके बाद नेतन्याहू के गठबंधन को केवल 53 सीटें मिलने का अनुमान जताया जा रहा है। दूसरी तरफ, उनके मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट के गठबंधन को भी 48 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है, जबकि दूसरी ओर अरब पार्टियों को इस चुनाव में कुल 19 सीटें मिलती हुई दिखाई दे रही हैं, जो उन्हें सत्ता की चाबी सौंप सकती हैं।

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने चुनाव प्रचार के दौरान और उसके बाद भी अरब दलों, विशेष तौर पर राम पार्टी पर चुनाव चुराने और प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करने का खुला आरोप लगाया था। मतदान के दिनों में उन्होंने अपने तमाम समर्थकों से अपील की थी कि वे घरों से बाहर निकलकर भारी संख्या में अपने मताधिकार का प्रयोग करें। उन्होंने अपने प्रसिद्ध बयानों में जनता से कहा था कि बारबेक्यू मत करो, समुद्र तट पर मत जाओ, बल्कि सीधे पोलिंग बूथ जाओ और लिकुड पार्टी को अपना वोट दो। इसके बाद बुधवार को लिकुड पार्टी की तरफ से एक आधिकारिक बयान जारी किया गया, जिसमें दोहराया गया कि अरब दलों ने इस चुनाव को पूरी तरह से चुरा लिया है। पार्टी ने इन तमाम अरब दलों पर आतंकवाद का खुला समर्थन करने और यहूदी देश को पूरी तरह से खत्म करने की कोशिश करने के गंभीर आरोप भी मढ़े।

लिकुड पार्टी ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति और दावों में आगे कहा कि आम मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक ले जाने और उन्हें प्रेरित करने के लिए भारी स्तर पर भ्रष्टाचार, डराने-धमकाने, हिंसा, झूठ और प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया गया है। पार्टी का कहना है कि वे इस पूरी धांधली के पुख्ता सबूत और गवाहों के लिखित बयान संबंधित अधिकारियों को सौंप रहे हैं। उनके द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों में नकदी से भरे हुए हजारों लिफाफे, राम पार्टी के खास मतपत्र और मतदान केंद्र पर तैनात कर्मचारियों तथा अधिकारियों को धमकाने जैसी सनसनीखेज बातें शामिल हैं और इन आरोपों ने इजराइल के निर्वाचन आयोग और सुरक्षा तंत्र में हलचल मचा दी है।

दूसरी तरफ, इस पूरे घटनाक्रम और वोट खरीदने के शक के मामलों पर केंद्रीय चुनाव समिति के कार्यवाहक महानिदेशक डीन लिवने ने खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस पूरी घटना को बेहद असामान्य और चिंताजनक करार दिया। डीन लिवने ने मीडिया को जानकारी दी कि इजराइली पुलिस ने मतदान शुरू होने से ठीक पहले ही कुछ ऐसे संदिग्ध लोगों को रंगे हाथों पकड़ा था जो सीधे तौर पर आम मतदाताओं को पैसे देने की कोशिश कर रहे थे। इन तमाम संदिग्धों को पुलिस ने उनके घरों के बिल्कुल पास से गिरफ्तार किया और इस पूरे मामले की गहन जांच लगातार जारी है। पुलिस अधिकारियों ने अपनी आधिकारिक रिपोर्ट में बताया कि राम पार्टी के लिए अवैध रूप से वोट खरीदने के संदेह में कुल तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

गिरफ्तार किए गए इन संदिग्धों के पास से पुलिस ने जांच के दौरान कई संदेहास्पद लिफाफे और 24 हजार से ज्यादा इजराइली शेकेल बरामद किए। अगर इस रकम को अमेरिकी डॉलर में आंका जाए तो यह करीब 7 हजार 900 डॉलर नकद बनती है। हालांकि, इजराइल के इस चुनाव में हुई कथित गड़बड़ी, धांधली और वोट खरीदने के तमाम गंभीर आरोपों की पुलिसिया जांच अभी भी जारी है और किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना बाकी है। जैसे-जैसे वोटों की अंतिम गिनती पूरी होगी और इन आरोपों की जांच आगे बढ़ेगी, इजराइल की राजनीति में उठा यह भूचाल और अधिक तीव्र हो सकता है, जो आने वाले दिनों में देश की सत्ता के समीकरणों को पूरी तरह से बदलकर रख सकता है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow