ईरान के राष्ट्रपति का बड़ा बयान, अमेरिका के सामने नहीं झुकेंगे, क्रूड ऑयल 4 प्रतिशत उछला
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत की वृद्धि। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा वे अमेरिका के सामने सरेंडर नहीं करेंगे। ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर पर।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है और इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है और दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक 4 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है, तो दूसरी तरफ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर अमेरिका के सामने घुटने नहीं टेकेंगे। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की ओर से हुई इस तीखी बयानबाजी का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर साफ देखा जा रहा है और आने वाले दिनों में भी इसमें और तेजी आने की संभावना जताई जा रही है क्योंकि भू-राजनीतिक स्थिति काफी अस्थिर बनी हुई है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान का कड़ा रुख
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान द्वारा अपनाए गए कड़े रुख के बाद तेल बाजार में हलचल काफी तेज हो गई है। पेजेशकियान ने दुनिया के सामने साफ तौर पर कहा कि तेहरान कभी भी अमेरिका के दबाव में आकर आत्मसमर्पण नहीं करेगा और उनके इस बयान के तुरंत बाद ब्रेंट क्रूड वायदा 3 डॉलर 83 सेंट की बढ़त के साथ 103 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। इसके साथ ही डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड भी तेजी के साथ 92 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। बाजार में यह तेजी डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने ईरान को पूरी तरह तबाह करने की चेतावनी दी थी। निवेशकों के बीच इस बात को लेकर डर है कि अगर तनाव और बढ़ा तो मध्य पूर्व से होने वाली तेल की सप्लाई पूरी तरह बाधित हो सकती है।
डीजल एक्सपोर्ट पर बैन की खबरों का खंडन
दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव ने वैश्विक व्यापार बाजार में खलबली मचा दी है। हाल ही में आई कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया था कि ट्रंप प्रशासन घरेलू आपूर्ति को स्थिर करने के लिए 90 दिन के लिए डीजल एक्सपोर्ट पर बैन लगाने का प्लान कर रहा है। हालांकि, व्हाइट हाउस की तरफ से इस खबर का पूरी तरह से खंडन किया गया है और कहा गया है कि ऐसी कोई योजना नहीं है। इस बीच, ग्लोबल ऑयल सप्लाई का सबसे अहम रास्ता 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' दोनों देशों के बीच कूटनीति और सैन्य शक्ति का केंद्र बना हुआ है। ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रजाई ने साफ किया कि जब तक उनकी शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक होर्मुज को पूरी तरह नहीं खोला जाएगा। दूसरी तरफ ईरानी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और नाकेबंदी हटाता है, तो इस रास्ते को एक हफ्ते के अंदर फिर से खोला जा सकता है।
मिडिल ईस्ट से तेल की आपूर्ति बढ़ाने की कोशिशें
ऑयल मार्केट में जारी भारी उतार-चढ़ाव के बीच मिडिल ईस्ट के अन्य देशों से सप्लाई बढ़ाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। सऊदी अरब ने ड्रोन हमलों के कारण बंद पड़ी अपनी महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को दोबारा शुरू कर दिया है। इसके अलावा सऊदी अरब ने एशियाई खरीदारों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बाहर की लोकेशन से भी तेल देने की पेशकश की है ताकि आपूर्ति में कोई बाधा न आए। वहीं, इराक ने भी बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि उसका रोजाना का निर्यात 30 लाख बैरल से ज्यादा हो गया है और वह तुर्की के रास्ते अपने निर्यात को और बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। अमेरिका में भी क्रूड ऑयल रिजर्व 30 लाख बैरल बढ़कर 42 करोड़ 64 लाख बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। ये सभी आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक शक्तियां तेल संकट से निपटने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं।
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