उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग का बड़ा फैसला टीएमसी का नाम और सिंबल फ्रीज

चुनाव आयोग ने टीएमसी का नाम और सिंबल फ्रीज किया। ममता बनर्जी और अरूप रॉय गुटों को 6 अक्टूबर के उपचुनाव के लिए नए नाम और निशान चुनने होंगे।

Sep 18, 2026 - 08:35
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उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग का बड़ा फैसला टीएमसी का नाम और सिंबल फ्रीज

चुनाव आयोग ने आगामी उपचुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवाद को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतरिम व्यवस्था लागू कर दी है। आयोग ने पार्टी के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को फिलहाल ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और पार्टी के आरक्षित जोड़ा फूल चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल करने से पूरी तरह रोक दिया है। इस आदेश के बाद अब दोनों पक्षों को अपने लिए अलग-अलग नाम और चुनाव आयोग द्वारा जारी मुक्त चुनाव चिन्हों की सूची में से विकल्पों का चयन करना होगा। आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह कोई अंतिम फैसला नहीं है और प्रतीक आदेश के पैरा 15 के तहत मूल विवाद पर विस्तृत सुनवाई और निर्णय बाद में लिया जाएगा।

दो प्रतिद्वंद्वी गुट और आयोग की कार्यवाही

चुनाव आयोग ने अपने आदेश में उल्लेख किया है कि उसके सामने वर्तमान में पार्टी के दो प्रतिद्वंद्वी गुट मौजूद हैं। इनमें से एक गुट का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं, जबकि दूसरे गुट की कमान अरूप रॉय के हाथों में है। आयोग का मानना है कि इस विवाद की गहराई और पैरा 15 के तहत अंतिम निर्णय तक पहुंचने के लिए एक विस्तृत कानूनी कार्यवाही की आवश्यकता है। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक उपचुनावों की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी गुट को फिलहाल मूल पार्टी के नाम का लाभ नहीं मिलेगा।

आयोग के निर्देशों के अनुसार, अरूप रॉय के नेतृत्व वाले याचिकाकर्ता गुट और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिवादी गुट, दोनों में से किसी को भी आधिकारिक तौर पर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसी तरह, दोनों ही गुट फूल और घास वाले उस आरक्षित चुनाव चिन्ह का उपयोग नहीं कर पाएंगे जो अब तक पार्टी की पहचान रहा है। उल्लेखनीय है कि राज्य की दो महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों, रेजीनगर और नंदीग्राम में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने वाले हैं। यह अंतरिम व्यवस्था इन्हीं उपचुनावों तक लागू रहेगी ताकि मतदाताओं के बीच किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

टीएमसी में विभाजन की पृष्ठभूमि

तृणमूल कांग्रेस में यह संकट विधानसभा चुनाव के बाद शुरू हुआ जब पार्टी दो स्पष्ट गुटों में बंट गई। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 60 विधायकों ने एक अलग गुट का गठन किया। इस गुट को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मान्यता भी दी गई और ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में स्वीकार किया गया। हालांकि, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने इस फैसले को चुनौती दी है और मामला फिलहाल चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है। विधायकों की यह संख्या और नेतृत्व का दावा ही इस पूरे विवाद की जड़ है जिसे अब चुनाव आयोग सुलझाने की कोशिश कर रहा है।

नाम और निशान चुनने की समयसीमा

चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अलग पहचान देने के लिए एक प्रक्रिया निर्धारित की है। यदि गुट चाहें, तो वे अपने नए नाम के साथ मूल पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस से अपने संबंध का जिक्र कर सकते हैं। इसके अलावा, दोनों गुटों को मौजूदा उपचुनावों के लिए आयोग द्वारा अधिसूचित फ्री सिंबल यानी मुक्त चुनाव चिन्हों की सूची में से अलग-अलग चिन्ह चुनने की छूट दी गई है। इससे दोनों गुटों को अपनी राजनीतिक विरासत दिखाने का मौका भी मिलेगा और आयोग के नियमों का पालन भी होगा।

आयोग ने दोनों गुटों को कड़ा निर्देश दिया है कि वे 18 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे तक अपनी पसंद की जानकारी अनिवार्य रूप से साझा करें। दोनों गुटों को अपने लिए तीन संभावित नामों की सूची पसंद के क्रम में देनी होगी। इन विकल्पों में से किसी एक नाम को आयोग द्वारा मंजूरी दी जाएगी, जिसके बाद वे उपचुनाव के मैदान में उतर सकेंगे। यह कदम रेजीनगर और नंदीग्राम के मतदाताओं के बीच किसी भी प्रकार के भ्रम को रोकने और चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए उठाया गया है।

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