कर्नाटक सरकार का बड़ा दावा, पेट्रोल में तीस प्रतिशत से अधिक इथेनॉल मिला
कर्नाटक सरकार ने दावा किया है कि तेल कंपनियां बीस प्रतिशत की तय सीमा के मुकाबले तीस प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाकर पेट्रोल बेच रही हैं, जिससे वाहनों को नुकसान हो रहा है।
कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को एक बड़ा और गंभीर दावा करते हुए कहा कि तेल विपणन कंपनियों द्वारा बेचे जाने वाले पेट्रोल में, तय सीमा बीस प्रतिशत से कहीं अधिक इथेनॉल यानी ई बीस मिला हुआ है। कर्नाटक सरकार के उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की ओर से यह दावा किया गया है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बीस फीसदी से ज्यादा है। मंत्री रिजवान अरशद ने कहा कि कर्नाटक की अलग-अलग एनएबीएल एक्रीडिटेड लैब में पेट्रोल सैंपल की जांच में इस बात का बड़ा खुलासा हुआ है। कर्नाटक के पेट्रोल पंपों पर अवैध और अत्यधिक इथेनॉल की मिलावट सीधे तौर पर सामने आई है, जिससे उपभोक्ताओं के हितों पर बड़ा आघात पहुंच रहा है।
ऑपरेशन निखार अभियान के तहत हुई गुणवत्ता की जांच
सरकार के विशेष ऑपरेशन निखार अभियान के तहत कर्नाटक में मिलने वाले प्रमुख ब्रांडों के पेट्रोल की गुणवत्ता की कड़ी जांच की गई। इस परीक्षण के लिए बेंगलुरु, कोलार, चिक्कबल्लापुर, बेंगलुरु ग्रामीण, रामनगर, मंगलुरु और टुमकुरु से पेट्रोल के नमूने एकत्र किए गए थे। सभी प्रमुख तेल कंपनियों से एकत्र किए गए पेट्रोल के नमूनों में बीस प्रतिशत से अधिक इथेनॉल का मिश्रण बड़े पैमाने पर पाया गया है और इसमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी आईओसीएल के पेट्रोल में इकतीस दशमलव दो प्रतिशत और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी एचपीसीएल के पेट्रोल में तीस दशमलव पांच प्रतिशत इथेनॉल मौजूद पाया गया है, जो निर्धारित मानकों का खुला उल्लंघन है।
तेल कंपनियों की प्रयोगशालाओं द्वारा जानकारी छिपाने का आरोप
कर्नाटक के मंत्री रिजवान अरशद ने यह भी कहा कि जब पेट्रोल के नमूने पहले तेल कंपनियों की अपनी प्रयोगशालाओं यानी आईओसीएल और बीपीसीएल में भेजे गए, तो इथेनॉल की मात्रा की जांच अनिवार्य होने के बावजूद उन लैब्स ने अपनी रिपोर्ट में इस बात को पूरी तरह छुपा लिया और दर्ज ही नहीं किया कि एथेनॉल का वास्तविक प्रतिशत कितना है। इस अहम और संवेदनशील जानकारी को छुपाए जाने से यह गहरा और गंभीर शक पैदा हुआ है कि तेल कंपनियां ग्राहकों को धोखा दे रही हैं और तय सीमा से ज़्यादा एथेनॉल मिलाने की बात पर पर्दा डालने की नापाक कोशिश कर रही हैं। इसलिए राज्य सरकार ने अलग-अलग पेट्रोल पंपों से नियमों के अनुसार, दोबारा सैंपल लिए और उनकी जांच के लिए एनएबीएल मान्यता प्राप्त व आईएसओ सर्टिफाइड लैब में भेजा था।
किस कंपनी के पेट्रोल में कितना मिला इथेनॉल
मंत्री ने विस्तृत दावा करते हुए बताया कि लैब परीक्षणों में सामने आए नमूनों के आंकड़ों के अनुसार, आईओसीएल के पेट्रोल यानी एमएस में इकतीस दशमलव दो प्रतिशत इथेनॉल मिला। इसके अलावा एचपीसीएल के पेट्रोल यानी एमएस पावर में तीस दशमलव पांच प्रतिशत और एचपीसीएल के ही सामान्य पेट्रोल यानी एमएस में सत्ताईस प्रतिशत इथेनॉल पाया गया। बीपीसीएल के पेट्रोल यानी एमएस स्पीड में छब्बीस दशमलव पांच प्रतिशत, नायरा के पेट्रोल यानी एमएस में छब्बीस दशमलव एक प्रतिशत, शेल के पेट्रोल यानी एमएस में पच्चीस दशमलव पांच प्रतिशत, बीपीसीएल के पेट्रोल यानी एमएस में चौबीस दशमलव दो प्रतिशत, बीपीसीएल के एक अन्य पेट्रोल यानी एमएस में बाईस दशमलव छः प्रतिशत, एचपीसीएल के पेट्रोल यानी एमएस में बाईस दशमलव चार प्रतिशत, आईओसीएल के पेट्रोल यानी एमएस में बीस दशमलव आठ प्रतिशत, और नायरा के पेट्रोल यानी एमएस में बीस दशमलव छः प्रतिशत एथेनॉल दर्ज किया गया और इसके अतिरिक्त बीपीसीएल के पेट्रोल यानी एमएस में उन्नीस दशमलव नौ प्रतिशत, एमआरपीएल के पेट्रोल यानी एमएस में उन्नीस दशमलव दो प्रतिशत, तथा शेल के पेट्रोल यानी एमएस में तेरह दशमलव पांच प्रतिशत एथेनॉल पाया गया। ये सभी पेट्रोल के सैंपल राज्य के अलग-अलग स्थानों से एकत्र किए गए थे।
तेल कंपनियां कमा रही हैं रिकॉर्ड मुनाफा और उपभोक्ता झेल रहे मार
मंत्री रिजवान अरशद ने कड़े शब्दों में कहा कि जहां एक तरफ तेल कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ माइलेज के भारी नुकसान और वाहनों की गंभीर मरम्मत के रूप में आम उपभोक्ताओं को ही यह भारी आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है। इसके अलावा, अभी देश भर के पेट्रोल पंपों पर लगी ज़्यादातर डिस्पेंसिंग मशीनें सिर्फ पंद्रह प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण के लिए ही बनी हुई हैं। ज़्यादा एथेनॉल वाले तेल के हिसाब से ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और सिस्टम को अपग्रेड किए बिना इस तरह की पॉलिसी को लागू करने से कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और इसका सीधा नुकसान सिर्फ और सिर्फ आम उपभोक्ताओं को ही उठाना पड़ रहा है।
कर्नाटक सरकार ने केंद्र से स्थिति स्पष्ट करने को कहा
कर्नाटक सरकार ने केंद्र सरकार के सामने अपनी स्पष्ट मांगें रखते हुए कहा है कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें, क्योंकि पुख्ता साक्ष्य अब पूरी तरह रिकॉर्ड पर आ चुके हैं। सरकार को सार्वजनिक रूप से यह बताना चाहिए कि उपभोक्ताओं को दिए जा रहे ईंधन में वास्तव में कितना इथेनॉल मिलाया जा रहा है। निर्धारित सीमा से अधिक इथेनॉल मिलाने पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करते हुए बीस प्रतिशत से अधिक एथेनॉल वाला पेट्रोल आपूर्ति करने वाली आईओसीएल, बीपीसीएल, एचपीसीएल और अन्य संबंधित कंपनियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए तथा कर्नाटक में आपूर्ति किए जा रहे सभी पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा का पंप-स्तरीय ऑडिट सार्वजनिक किया जाए।
मुआवजा कोष की स्थापना और जनता को मिले विकल्प
सरकार की ओर से यह भी मांग की गई है कि ई बीस ईंधन से वाहनों को हुई क्षति के लिए एक विशेष मुआवजा कोष स्थापित किया जाए, ताकि जिन उपभोक्ताओं के वाहन इस मिलावट से क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें अधिकृत सर्विस सेंटर से क्षति का प्रमाण मिलने पर समयबद्ध दावा प्रक्रिया के माध्यम से उचित मुआवजा दिया जा सके। इसके अलावा देश भर के हर पेट्रोल पंप पर पेट्रोल पर एथेनॉल मिश्रण का प्रतिशत प्रदर्शित करना पूरी तरह अनिवार्य हो, ताकि उपभोक्ताओं को ईंधन चयन का स्पष्ट विकल्प मिल सके और हर एक पेट्रोल पंप पर यह साफ तौर पर दर्शाया जाए कि ईंधन में कितना प्रतिशत इथेनॉल मिलाया गया है।
राज्यभर में आगे भी जारी रहेगी जांच की प्रक्रिया
कर्नाटक सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्यभर में इस प्रकार की सख्त जांच की प्रक्रिया आगे भी लगातार जारी रहेगी और इसके निष्कर्षों को समय-समय पर सार्वजनिक किया जाएगा। मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल यानी आपूर्ति और वितरण का विनियमन तथा कदाचार निवारण आदेश, दो हजार पांच के तहत राज्य सरकार ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के आयुक्त, विधिक माप विज्ञान विभाग के अधिकारियों, उपायुक्तों, उप-विभागीय अधिकारी, तहसीलदारों तथा पुलिस उपाधीक्षक या उससे उच्च पद के पुलिस अधिकारियों को ईंधन की आपूर्ति और वितरण में होने वाले किसी भी प्रकार के कदाचार के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार दिया है।
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