सात राज्यों में होगी एसआईआर प्रक्रिया, चुनाव आयोग ने मतदाताओं को दी राहत

सात राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग ने उन मतदाताओं को एक और मौका दिया है जिनके नाम वोटर लिस्ट से बाहर हो गए थे। जानिए पूरी खबर।

Nov 6, 2026 - 18:35
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सात राज्यों में होगी एसआईआर प्रक्रिया, चुनाव आयोग ने मतदाताओं को दी राहत

भारत के चुनाव आयोग ने देश के सात राज्यों में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरा फैसला लिया है। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को घोषणा की है कि सात राज्यों के उन मतदाताओं को एक और बड़ा मौका दिया जाएगा, जिनके नाम वर्तमान में जारी मतदाता सूची के मसौदे यानी ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल से बाहर कर दिए गए थे। यह उन तमाम मतदाताओं के लिए एक बहुत बड़ी राहत है जो किसी कारणवश अपना नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं रख पाए थे और जिन्हें प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते बाहर का रास्ता देखना पड़ा था।

चुनाव आयोग के इस फैसले के दायरे में वे मतदाता विशेष रूप से आते हैं जिन्हें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लिकेट यानी एएसडीडी के रूप में चिह्नित किया गया था। इन सभी मतदाताओं के लिए गणना फॉर्म यानी एन्यूमरेशन फॉर्म जारी किए गए थे, लेकिन विभिन्न कारणों से वे फॉर्म वापस नहीं मिल पाए थे। फॉर्म वापस न मिलने के कारण ही चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर अभियान के दौरान इन लोगों के नाम मतदाता सूची के मसौदे से बाहर कर दिए गए थे। अब चुनाव आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि ऐसे सभी लोगों को उनका नाम वापस सूची में दर्ज कराने का एक और अवसर प्रदान किया जाए।

मुख्य रूप से ये तमाम निर्देश और दिशा-निर्देश देश के सात प्रमुख राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होते हैं। इन राज्यों में दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना और नागालैंड शामिल हैं। इन सभी क्षेत्रों के चुनाव अधिकारियों और संबंधित प्रशासनिक अमले को चुनाव आयोग की तरफ से स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं। आयोग ने इन सभी राज्यों के प्रशासनिक अधिकारियों से एक मजबूत निगरानी तंत्र यानी मॉनिटरिंग मैकेनिज्म तैयार करने को भी कहा है, ताकि यह पूरी तरह से सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी पात्र मतदाता अंतिम मतदाता सूची में नाम शामिल होने के अवसर से वंचित न रह जाए। इसके साथ ही अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार के डुप्लिकेट पंजीकरण को पूरी तरह से रोका जाए।

चुनाव आयोग ने अपनी इस पूरी प्रक्रिया और नियमों को लेकर कुछ स्पष्ट बातें भी साझा की हैं। आयोग के अनुसार, नाम जुड़वाने का यह विशेष मौका केवल उन्हीं मतदाताओं को मिलेगा, जिन्हें पहले एब्सेंट, शिफ्टेड, डेड और डुप्लिकेट यानी एएसडीडी के तौर पर रखा गया था। जिन मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म जारी हुए थे, लेकिन वे वापस नहीं मिले थे और इसी वजह से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के दौरान उनके नाम ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स में शामिल नहीं हो सके थे, केवल वे ही इसका लाभ उठा सकेंगे और इसके साथ ही आयोग ने इस बात पर भी विशेष जोर दिया है कि इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह के डुप्लिकेट नामांकन को पूरी तरह से रोका जाना चाहिए।

इस संदर्भ में चुनाव आयोग ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी जारी किया है। आयोग के नियमों के मुताबिक, जो लोग कभी भी वोटर लिस्ट में थे ही नहीं, उन्हें इस नई व्यवस्था का कोई फायदा नहीं मिलेगा। चुनाव आयोग की तरफ से यह साफ कर दिया गया है कि यह राहत सिर्फ और सिर्फ उन्हीं मतदाताओं के लिए है जो पहले से सूची में मौजूद थे, लेकिन एसआईआर प्रक्रिया के दौरान किन्हीं कारणों से उनके नाम कट गए थे। जो नए लोग पहली बार जुड़ना चाहते हैं या जो कभी मतदाता सूची का हिस्सा नहीं रहे, उनके लिए यह विशेष अवसर लागू नहीं होगा।

आपको बता दें कि इससे पहले भी चुनाव आयोग ने इसी महीने की 3 तारीख यानी 3 नवंबर को एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया था। उस फैसले में आयोग की तरफ से यह स्पष्ट रूप से कहा गया था कि अगर किसी मतदाता का नाम एसआईआर की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल नहीं है, तो वह व्यक्ति फॉर्म-6 भरकर अपना नाम दोबारा से जुड़वा सकता है। चुनाव आयोग ने उस दौरान यह भी राहत दी थी कि भले ही कोई व्यक्ति पिछले 10 साल से लगातार वोटर रहा हो, फिर भी उसे अपना नाम दोबारा दर्ज कराने के लिए फॉर्म-6 ही भरना होगा। आयोग ने यह भी आश्वासन दिया था कि इस प्रक्रिया के तहत फॉर्म भरने पर इसे कोई झूठा शपथ पत्र नहीं माना जाएगा और न ही संबंधित व्यक्ति के खिलाफ किसी भी प्रकार का कोई कानूनी केस दर्ज किया जाएगा।

चुनाव आयोग का यह ताजा कदम और पिछली घोषणाएं देश में चुनावी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, सुगम और समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे उन लाखों मतदाताओं को बड़ी राहत मिलेगी जो अनजाने में या प्रक्रियागत त्रुटियों के कारण अपने मताधिकार के प्रयोग से वंचित होने की कगार पर पहुंच गए थे और अब देखना यह होगा कि संबंधित सात राज्यों के निर्वाचन अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया को कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ लागू करते हैं ताकि अंतिम मतदाता सूची पूरी तरह से त्रुटिमुक्त और निष्पक्ष तैयार हो सके।

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