पाक सेना ने POK में बरपाया कहर, ड्रोन और रॉकेट हमलों में 18 लोगों की मौत

POK के रावलाकोट में पाकिस्तानी सेना के ड्रोन और रॉकेट हमलों में 18 लोगों की मौत, निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी।

Nov 6, 2026 - 09:35
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पाक सेना ने POK में बरपाया कहर, ड्रोन और रॉकेट हमलों में 18 लोगों की मौत

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी POK में पाकिस्तानी सेना ने इंसानियत और कानून की सभी सीमाओं को लांघते हुए बेहद बर्बर कार्रवाई को अंजाम दिया है। POK की राजधानी मुजफ्फराबाद से महज 41 किलोमीटर दूर स्थित रावलाकोट शहर में आज पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के सैनिकों ने ऐसी भारी तबाही मचाई मानो किसी स्वतंत्र देश के खिलाफ पूर्ण युद्ध छेड़ दिया गया हो। निहत्थे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे आम नागरिकों पर ड्रोन से बम बरसाए गए और रॉकेट लॉन्चर्स से हमले किए गए। इस खूनी संघर्ष और सैन्य बर्बरता के कारण अब तक 18 बेकसूर लोगों के मारे जाने की आधिकारिक और तथ्यात्मक पुष्टि हो चुकी है। इस क्रूर हमले में मारे गए लोगों में चार मासूम बच्चे भी शामिल हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में मातम और आक्रोश का माहौल है। पाकिस्तानी सेना की इस दमनकारी कार्रवाई ने एक बार फिर दुनिया के सामने पाकिस्तान का असली चेहरा बेनकाब कर दिया है, जहां अपनी ही जनता की आवाज को गोलियों और बमों के दम पर कुचला जा रहा है।

रावलाकोट बस टर्मिनल पर सुनियोजित और खूनी हमला

घटना की शुरुआत आज सुबह हुई जब सैकड़ों की संख्या में स्थानीय नागरिक अपने बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर रावलाकोट के मुख्य बस टर्मिनल पर शांतिपूर्ण तरीके से जमा हुए थे। प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही वहां घात लगाकर बैठे पाकिस्तानी रेंजर्स ने पूरी तैयारी के साथ निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर आरपीजी-7 यानी RPG-7 रॉकेट से सीधा हमला बोल दिया। इस अचानक हुए भीषण रॉकेट हमले से मौके पर भारी अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे और लेकिन पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स ने भाग रहे निहत्थे नागरिकों पर किसी भी प्रकार की नरमी न बरतते हुए अंधाधुंध और सीधी फायरिंग शुरू कर दी। स्थिति इतनी भयावह थी कि लोगों को अपने मृत परिजनों की लाशें उठाने तक का मौका नहीं दिया गया। जो लोग इस खूनी संघर्ष में गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को उठाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाने का प्रयास कर रहे थे, पाकिस्तानी सैनिकों ने उन्हें भी विशेष रूप से निशाना बनाया और उनके ऊपर गोलियों की बौछार कर दी और इस अमानवीयता के कारण घायलों को समय पर कोई चिकित्सीय सहायता नहीं मिल पाई और मृतकों का आंकड़ा लगातार बढ़ता गया, जिसमें चार बच्चे भी शामिल हैं।

POK में क्यों भड़की हिंसा और क्या है प्रदर्शनकारियों की मांग

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पिछले पांच महीनों से लगातार विरोध प्रदर्शनों और सुलगते असंतोष का दौर जारी है। जून महीने से ही POK के विभिन्न हिस्सों में आम जनता सड़कों पर उतरकर लगातार उग्र प्रदर्शन कर रही है। इन प्रदर्शनों का मुख्य कारण क्षेत्र में आसमान छूती महंगाई, बेरोजगारी और आम जीवन से जुड़ी बुनियादी समस्याओं का अंबार है और ज्वाइंट आवामी एक्शन कमेटी की ओर से इन प्रदर्शनों की आधिकारिक कॉल दी गई थी, जिसके आह्वान पर हजारों की संख्या में आम लोग सड़कों पर उतरे और सरकार के सामने सस्ते आटे तथा अन्य जरूरी खाने-पीने की चीजों के दाम कम करने की पुरजोर मांग रखी। लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने जनता की इन जायज और बुनियादी मांगों को सुनने के बजाय दमनकारी नीतियों का सहारा लिया। शहबाज शरीफ सरकार ने आंदोलन का नेतृत्व कर रही ज्वाइंट आवामी एक्शन कमेटी के प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार करके जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया और इतना ही नहीं, सरकार ने इस एक्शन कमेटी को पूरी तरह से प्रतिबंधित यानी बैन कर दिया। जब इस दमन से भी बात नहीं बनी और जनता का गुस्सा शांत नहीं हुआ, तो पुलिस बल का इस्तेमाल कर बेरहमी से लाठीचार्ज करवाया गया। इस सरकारी कार्रवाई के दौरान सैकड़ों की संख्या में आम नागरिकों को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय लोगों का गुस्सा और अधिक भड़क उठा। पूरे POK में बड़े पैमाने पर व्यापक प्रोटेस्ट शुरू हो गए और प्रदर्शनकारियों के बीच से पाकिस्तान से आजादी के नारे गूंजने लगे। जनता के कड़े तेवरों और आजादी के नारों से बौखलाए शहबाज शरीफ ने स्थिति से निपटने के लिए अंततः आसिम मुनीर की क्रूर फौज को सीधे मैदान में उतार दिया।

ड्रोन और रॉकेट से रिहायशी इलाकों और घरों पर भीषण हमले

शुरुआती दौर में मुजफ्फराबाद शहर के भीतर पाकिस्तानी सेना द्वारा अंधाधुंध फायरिंग की गई थी, लेकिन निहत्थे और जुझारू लोग इन धमकियों से डरे नहीं और उनका हौसला कम नहीं हुआ। इसके बाद जब POK के अन्य प्रमुख शहरों में भी आजादी के समर्थन में बड़े पैमाने पर मार्च निकाले जाने लगे, तो आज पाकिस्तानी सेना ने रावलाकोट को अपना मुख्य निशाना बनाते हुए प्रदर्शनकारियों के ऊपर ड्रोन के माध्यम से बम बरसाने शुरू कर दिए। स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में लेने के नाम पर सेना ने रॉकेट लॉन्चर्स का इस्तेमाल कर आम नागरिकों के रिहायशी घरों पर सीधे ताबड़तोड़ हमले किए। इन भीषण रॉकेट हमलों के कारण कई रिहायशी मकान पूरी तरह से तबाह हो गए और मलबे में तब्दील हो गए। हमलों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कई इलाकों में भीषण आग लग गई, जिसके कारण पूरे रावलाकोट शहर में भारी अफरा-तफरी और डर का माहौल फैल गया। पाकिस्तानी रेंजर्स ने अपनी जान बचाकर सुरक्षित ठिकानों की तरफ भाग रहे मासूम और निहत्थे नागरिकों को भी किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी और उन्हें भी अपनी गोलीबारी का निशाना बनाया। इस सैन्य कार्रवाई में कुल 18 लोगों की दर्दनाक मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि इस क्रूर हमले में दर्जनों अन्य लोग बुरी तरह से जख्मी हुए हैं, जिन्हें स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है जहां उनकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।

नागरिकों के गंभीर आरोप और डेढ़ सौ से ज्यादा मौतों का दावा

POK के स्थानीय लोगों ने पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स पर बेहद गंभीर और डरावने आरोप लगाए हैं और स्थानीय निवासियों का स्पष्ट रूप से कहना है कि पाकिस्तानी रेंजर्स किसी सोची-समझी साजिश के तहत विशेष रूप से स्थानीय नागरिकों के रिहायशी घरों को निशाना बनाकर क्रूर हमले कर रहे हैं। बिना किसी संकोच के घरों में घुसकर या बाहर खड़े मासूम बच्चों और महिलाओं को भी सीधी गोलियों का शिकार बनाया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों और विभिन्न संगठनों का यह बड़ा दावा है कि इस खूनी संघर्ष और सैन्य दमन के दौरान पाकिस्तानी रेंजर्स ने अब तक कुल मिलाकर डेढ़ सौ से भी अधिक बेकसूर लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी 18 मौतों की पुष्टि हुई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर मरने वालों का यह आंकड़ा काफी डरावना और बड़ा बताया जा रहा है। लोग अपने ही देश की सेना और हुक्मरानों के हाथों इस प्रकार की अमानवीय यातनाएं झेलने को मजबूर हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी आवाज को लगातार दबाया जा रहा है।

पोलियो टीकाकरण टीम की सुरक्षा में तैनात दो पुलिसकर्मियों की हत्या

इस अत्यंत दहला देने वाली और खूनी घटना से ठीक दो दिन पहले ही पाकिस्तान के भीतर एक और सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया गया था। पाकिस्तान में सुदूर इलाकों में बच्चों के लिए चलाए जा रहे आवश्यक पोलियो उन्मूलन अभियान के तहत ड्यूटी पर तैनात एक पोलियो टीकाकरण टीम की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात दो पुलिसकर्मियों पर अज्ञात हमलावरों द्वारा ताबड़तोड़ गोलियों की बौछार कर दी गई थी। इस अचानक हुए कायराना और घातक हमले में मौके पर ही दोनों पुलिसकर्मियों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस प्रकार की लगातार हो रही हिंसक वारदातों और सैन्य बर्बरता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है और आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षा में लगे कर्मियों की जान भी पूरी तरह से असुरक्षित हो चुकी है। POK के लोग अब पाकिस्तान के इस सैन्य शासन और अत्याचार से पूरी तरह मुक्ति चाहते हैं और उनके भीतर का आक्रोश हर दिन के साथ और अधिक तीव्र होता जा रहा है।

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