इजराइल में बेंजामिन नेतन्याहू की विदाई तय, आइसेनकोट के पाले में अरब दलों का समर्थन
इजराइल में नेतन्याहू की विदाई तय, अरब पार्टियों ने गादी आइसेनकोट को समर्थन दिया, जिससे नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हुआ।
इजराइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की विदाई का रास्ता साफ होता दिख रहा है और नई सरकार के गठन को लेकर कवायद एक बार फिर से बेहद तेज हो गई है। देश की अरब पार्टी जॉइंट लिस्ट ने बेंजामिन नेतन्याहू के विरोधी गादी आइसेनकोट को समर्थन करने का आधिकारिक तौर पर ऐलान कर दिया है, जिसके चलते मौजूदा प्रधानमंत्री नेतन्याहू की विदाई अब पूरी तरह तय मानी जा रही है।
अरब पार्टियों का ऐतिहासिक समर्थन और राजनीतिक समीकरण
अरब राजनीतिक दलों के गठबंधन जॉइंट लिस्ट और अरब-नेतृत्व वाली राआम पार्टी ने देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में याशर पार्टी के प्रमुख आइसेनकोट का खुलकर समर्थन किया है। द टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, जॉइंट लिस्ट ने गुरुवार को अपना महत्वपूर्ण समर्थन देने की औपचारिक घोषणा कर दी है। पार्टी ने अपने जारी किए गए बयान में कहा कि सरकार गठन को लेकर होने वाली विचार-विमर्श और बातचीत के दौरान, वे राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के सामने औपचारिक रूप से आइसेनकोट के नाम की मजबूत सिफारिश करेंगे और राआम पार्टी के कुल 8 सांसदों ने पहले ही अपना समर्थन देने का पक्का वादा कर दिया था। समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, पार्टी ने अपने बयान में आगे बताया कि जॉइंट लिस्ट ने आज स्पष्ट किया कि वे आज शाम ही राष्ट्रपति हर्जोग को अपने इस बड़े फैसले के बारे में सूचित करेंगे। वे राष्ट्रपति से यह सिफारिश भी करेंगे कि देश में नई सरकार बनाने की मुख्य जिम्मेदारी आइसेनकोट को सौंपी जानी चाहिए।
आइसेनकोट के समर्थकों की संख्या में भारी उछाल
इस ताजा समर्थन के बाद, आइसेनकोट को 120 सीटों वाली इजराइली संसद यानी नेसेट के कुल 67 सदस्यों का समर्थन मिलने की पूरी उम्मीद है। यह बड़ा समर्थन मिलने के साथ ही वे वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से काफी आगे निकल गए हैं, जिनके लिकुड पार्टी गठबंधन के पास वर्तमान में केवल 58 सीटें हैं। इस नए समर्थन के आंकड़ों में अरब नेतृत्व वाली राआम पार्टी के 8 सांसद शामिल हैं, जिन्होंने पहले ही समर्थन की घोषणा कर दी थी, और साथ ही जॉइंट लिस्ट के 11 सदस्य भी इसमें शामिल हैं। पिछले हफ्ते देश में संपन्न हुए आम चुनावों में, इजरायल की 120 सीटों वाली संसद में अरब अगुवाई वाली पार्टियों ने रिकॉर्ड 19 सीटें हासिल की थीं।
आइसेनकोट का पिछला रुख और वर्तमान स्थितियां
यह महत्वपूर्ण समर्थन ऐसे वक्त में सामने आया है जब कुछ समय पहले आइसेनकोट का रुख इन दलों के प्रति कुछ अलग था। गत 26 सितंबर को एक मीडिया को दिए गए इंटरव्यू में, याशर नेता ने बड़ा दावा करते हुए कहा था कि राआम पार्टी उनकी अगली सरकार का मुख्य हिस्सा नहीं होगी। उन्होंने यह मुख्य तर्क भी दिया था कि उस समय कोई भी अरब पार्टी या अति-रूढ़िवादी यानी अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पार्टी उनके गठबंधन में शामिल होने के लिए निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करती है। आइसेनकोट ने तब यह भी कहा था कि फिलहाल उन्हें ऐसी कोई अरब या हारेदी यानी अति-रूढ़िवादी पार्टी नहीं दिखाई दे रही है जो इन सिद्धांतों को स्वीकार करे, जिसमें राआम नेता मंसूर अब्बास भी शामिल हैं, और इसलिए वे उनकी अगली सरकार का हिस्सा नहीं बन पाएंगे।
नेतन्याहू के सामने अनिश्चितता का गंभीर संकट
दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री नेतन्याहू को अपना समर्थन जुटाने को लेकर लगातार गहरी राजनीतिक अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। नेतन्याहू के राजनीतिक गुट के पास अभी केवल 53 सीटें हैं, लेकिन यह भी माना जा रहा है कि सरकार बनाने के लिए उन्हें अपने सभी सदस्यों का पूरा समर्थन शायद ही मिल पाए। यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म गठबंधन के पास कुल 7 सीटें हैं, जिनमें से 4 सीटों पर देगेल हातोराह का सीधा नियंत्रण है। इस पार्टी ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी उम्मीदवार के नाम की कोई सिफारिश नहीं करेगी। द टाइम्स ऑफ इजराइल के अनुसार, इस अति-रूढ़िवादी गुट ने पीएम नेतन्याहू से अपनी दूरी बना ली है। इस दूरी की मुख्य वजह यह है कि उनकी सरकार हारेदी पुरुषों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट प्रदान करने वाला कानून पारित करने में पूरी तरह नाकाम रही है।
राष्ट्रपति की राजनीतिक दलों के साथ गहन बातचीत
इस बीच देश के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने पिछले हफ्ते संपन्न हुए संसदीय चुनावों के आधिकारिक परिणामों को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। उन्होंने इजराइल में एक नई व्यवस्था को बनाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ महत्वपूर्ण बातचीत शुरू कर दी है, ताकि यह पुख्ता तौर पर तय किया जा सके कि अगली सरकार बनाने की जिम्मेदारी देश में किसे सौंपी जानी चाहिए। इससे पहले, राष्ट्रपति हर्जोग ने देश के सभी दलों से यह जोरदार अपील की थी कि वे एक और चुनाव की नौबत आने से रोकने के लिए अपनी तरफ से हर संभव कोशिश करें। उन्होंने अपने संबोधन में कहा था कि कोई भी समझदार व्यक्ति अगर हमारे सामने मौजूद सुरक्षा और कूटनीतिक चुनौतियों, हमारे आस-पास लगातार बदलते क्षेत्र और हमें भीतर से बांटने वाले गंभीर मुद्दों पर गहरी नजर डाले, तो वह साफ समझ जाएगा कि हमारे कंधों पर आज कितनी बड़ी जिम्मेदारी है।
राष्ट्रपति की बैठकें और आगे की प्रक्रिया
इस बीच बुधवार को, राष्ट्रपति ने रिलिजियस जायोनिज्म, जेहुत, शास और इजराइल बेतेनु पार्टियों के प्रमुख प्रतिनिधियों से मुलाकात की। उन्होंने यह जानकारी दी कि इन प्रतिनिधिमंडलों ने सरकार गठन को लेकर अपनी-अपनी सिफारिशें सौंप दी हैं कि किस नेसेट सदस्य को सरकार बनाने का नया जनादेश दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि गुरुवार को भी यह बातचीत का दौर लगातार जारी रहेगा और बातचीत की यह पूरी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद, राष्ट्रपति उस योग्य उम्मीदवार का चयन करेंगे जिसके बारे में उन्हें यह विश्वास होगा कि उसके पास संसदीय बहुमत हासिल करने की सबसे अच्छी और मजबूत संभावना है। यह माना जा रहा है कि इजराइल के अगले प्रधानमंत्री पद के लिए यह मुख्य चयन केवल नेतन्याहू और आइसेनकोट के बीच ही होगा।
सरकार गठन की समयसीमा और चुनाव की संभावना
चुने गए उम्मीदवार के पास देश में सरकार बनाने के लिए कुल 28 दिन का समय होगा, जिसे जरूरत पड़ने पर केवल 14 दिनों के लिए और आगे बढ़ाया जा सकता है। यदि कोई भी उम्मीदवार गठबंधन सरकार बनाने के लिए इस निर्धारित समय सीमा के भीतर जरूरी समर्थन जुटाने में विफल रहता है, तो इजराइल में अगले साल की शुरुआत में एक बार फिर से आम चुनाव कराने पड़ सकते हैं।
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