झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, रद्द हुई JSSC-CGL परीक्षा की अधिसूचना खारिज

झारखंड हाई कोर्ट ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के हेमंत सोरेन सरकार के फैसले को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इसे अनुचित और अन्यायपूर्ण बताया है।

Nov 6, 2026 - 14:35
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झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, रद्द हुई JSSC-CGL परीक्षा की अधिसूचना खारिज

झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में शुक्रवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जहां झारखंड हाई कोर्ट ने हेमंत सोरेन सरकार को एक बड़ा झटका देते हुए झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय यानी JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को पूरी तरह से खारिज कर दिया और हाई कोर्ट ने अपने इस अहम फैसले में परीक्षा को रद्द करने के सरकार के इस कदम को अनुचित और अन्यायपूर्ण करार दिया है।

क्या है पूरा मामला और विरोध प्रदर्शन

इस पूरे प्रकरण की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो कुछ समय पहले झारखंड राज्य में विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों और युवाओं ने बड़े स्तर पर व्यापक प्रदर्शन किए थे। इन प्रदर्शनों और हंगामे के बाद राज्य सरकार ने दबाव में आकर साल 2024 की झारखंड कर्मचारी चयन आयोग संयुक्त स्नातक स्तरीय यानी जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द करने का फैसला ले लिया था। सरकार के इस फैसले से जहां एक तरफ परीक्षा में असफल या विरोध करने वाले छात्र संतुष्ट दिखे, वहीं दूसरी तरफ इस परीक्षा को पास करने वाले योग्य उम्मीदवारों के भविष्य पर तलवार लटक गई थी। इसके बाद सरकार के इस फैसले के खिलाफ परीक्षा में पास करने वाले कई उम्मीदवारों ने न्याय की उम्मीद में झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन ने राज्य सरकार की उस अधिसूचना को पूरी तरह से निरस्त कर दिया, जिसके तहत परीक्षा रद्द की गई थी और कोर्ट ने स्पष्ट रूप से माना कि सरकार का यह निर्णय पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और अनुचित था।

सरकार और कर्मचारियों की दलीलें

इस कानूनी लड़ाई के दौरान झारखंड सरकार की ओर से अदालत में तर्क दिया गया था कि बीते 18 अगस्त को JSSC-CGL परीक्षा 2024 को रद्द करने का कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि बड़े स्तर पर गड़बड़ी और पेपर लीक के पुख्ता सबूत सामने आए थे। सरकार का यह भी कहना था कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए ऐसा करना अनिवार्य हो गया था। दूसरी ओर, परीक्षा पास करने वाले कर्मचारियों और अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट के सामने अपनी मजबूत दलील पेश करते हुए कहा कि परीक्षा रद्द करने से पहले उन्हें अपना पक्ष पेश करने का उचित अवसर या अनुमति नहीं दी गई थी, जो कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

1932 अभ्यर्थियों के भविष्य का संकट और राहत

इस पूरे विवाद के केंद्र में कुल 1932 अभ्यर्थी थे, जिनके जीवन और करियर पर भारी संकट मंडरा रहा था। इससे पहले बीते अगस्त महीने में भी झारखंड हाई कोर्ट ने JPSC के बाद अब JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगा दी थी। जानकारी के मुताबिक JSSC-CGL के परिणाम सामने आने के बाद कुल 1932 अभ्यर्थियों का चयन हुआ था। इनमें से कई ऐसे भाग्यशाली अभ्यर्थी थे जिन्हें नियुक्ति पत्र भी मिल चुके थे और वे वर्तमान में राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे थे। ऐसे में अचानक राज्य सरकार द्वारा परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के बाद इन तमाम लोगों के सामने अपनी नौकरी, नियुक्ति और भविष्य को लेकर सबसे बड़ा और विकट सवाल खड़ा हो गया था। हालांकि, अब शुक्रवार को आए झारखंड हाई कोर्ट के इस ऐतिहासिक और न्यायसंगत फैसले के बाद इन 1932 अभ्यर्थियों को बहुत बड़ी राहत मिली है और उनकी नौकरियां सुरक्षित होती नजर आ रही हैं, जिससे उन पर मंडरा रहा अनिश्चितता का बादल छंट गया है।

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