जयपुर में मां की हत्या करने वाली बेटी की जमानत याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने सुनाया कड़ा फैसला
जयपुर में संपत्ति के लिए मां की हत्या करने वाली बेटी आयुषी की जमानत याचिका राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। जानिए क्या था पूरा मामला और कोर्ट की टिप्पणी।
जयपुर के चर्चित नीरज शर्मा हत्याकांड में राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने अपनी ही मां की हत्या की साजिश रचने की आरोपी बेटी आयुषी की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है और जयपुर महानगर प्रथम की एडीजे-6 कोर्ट की जज श्वेता दाधीच ने बुधवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि अब तक की गई पुलिस जांच और पेश किए गए तथ्यों को देखते हुए प्रथमदृष्ट्या ऐसा बिल्कुल नहीं लगता है कि इस मामले में अभियुक्ता को किसी गलत मंशा से फंसाया गया है।
अदालत की टिप्पणी और जांच की स्थिति
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट से यह संकेत मिलते हैं कि आयुषी का अपनी मां नीरज शर्मा के साथ काफी समय से मनमुटाव चल रहा था। इसके अलावा, अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि मामले का एक अन्य मुख्य आरोपी और आयुषी के ताऊ का लड़का बलराम उर्फ रवि अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है और फरार चल रहा है। ऐसी स्थिति में, यदि आरोपी को इस स्तर पर जमानत दी जाती है, तो इससे चल रही जांच के प्रभावित होने और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
बचाव पक्ष की दलीलें और पारिवारिक स्थिति
सुनवाई के दौरान आयुषी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता निशांत शर्मा, केतन धाभाई और कामिल हुसैन ने अदालत के सामने कई तर्क रखे और उन्होंने दावा किया कि मृतका के परिजनों के दबाव में आकर आयुषी को इस मामले में बलि का बकरा बनाया गया है। वकीलों ने तर्क दिया कि आयुषी से पुलिस को कोई बरामदगी नहीं हुई है और न ही कुछ बरामद होना शेष है। उन्होंने यह भी कहा कि आयुषी का अन्य आरोपियों से कोई सीधा संबंध नहीं है। बचाव पक्ष ने मानवीय आधार पर दलील दी कि परिवार में अब केवल आयुषी और उसका भाई ही बचे हैं और उन्होंने बताया कि आयुषी का भाई एक गंभीर बीमारी से पीड़ित है और वह सामाजिक रूप से व्यवहार करने में सक्षम नहीं है, जिसके कारण वह पूरी तरह से अपनी बहन पर आश्रित है।
अभियोजन पक्ष का विरोध और हत्या का मकसद
दूसरी ओर, पुलिस और परिवादी के अधिवक्ताओं ने जमानत का कड़ा विरोध किया और उन्होंने अदालत को बताया कि अभियुक्ता ने अपनी मां की हत्या की साजिश केवल संपत्ति हड़पने और अनुकंपा नियुक्ति पाने की नीयत से रची थी। नीरज शर्मा के पति, जो कोर्ट में एलडीसी थे, उनका निधन एक साल पहले हो गया था। उनकी मृत्यु के बाद नीरज को 8 महीने पहले ही एलडीसी के पद पर अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि यह एक अत्यंत गंभीर अपराध है और जब तक फरार आरोपी पकड़ा नहीं जाता, तब तक जांच पूरी नहीं मानी जा सकती।
क्या था पूरा हत्याकांड और साजिश
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, प्रताप नगर के रविंद्र नगर की निवासी 45 वर्षीय नीरज शर्मा 3 जुलाई को शाम करीब 4 बजकर 45 मिनट पर अपने 16 साल के बेटे को कोचिंग छोड़कर घर लौट रही थीं। इसी दौरान एक बेहद तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि गाड़ी की गति करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटा मापी गई और नीरज उछलकर करीब 100 फीट दूर जाकर गिरीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। जांच में खुलासा हुआ कि बेटी आयुषी ने अपने ताऊ के बेटे बलराम और मोहन स्वरूप के साथ मिलकर इस हत्या की योजना बनाई थी। इस काम के लिए हेमंत के दोस्त आकाश और अरविंद को 7 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में अब तक बेटी और जेठ सहित 7 लोगों को गिरफ्तार किया है और वारदात में इस्तेमाल स्कॉर्पियो भी बरामद कर ली है।
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