ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात: वॉशिंगटन शिखर सम्मेलन की 5 बड़ी बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वॉशिंगटन में मुलाकात की। व्यापार समझौते को दो महीने बढ़ाने पर सहमति बनी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच वॉशिंगटन में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का उद्देश्य दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच चल रहे तनाव को कम करना और भविष्य के सहयोग की रूपरेखा तैयार करना था। दोनों नेताओं ने व्यापार, ताइवान की स्थिति, बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे संवेदनशील और वैश्विक महत्व के विषयों पर विस्तार से चर्चा की। इस मुलाकात को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें न केवल आर्थिक बल्कि सैन्य और तकनीकी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत हुई।
1. व्यापार समझौते में दो महीने का विस्तार
बैठक का सबसे प्रमुख परिणाम यह रहा कि अमेरिका और चीन ने अपने बीच चल रहे व्यापार युद्ध को रोकने के लिए किए गए समझौते को दो महीने और जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। पिछले वर्ष हुआ यह महत्वपूर्ण समझौता इस साल नवंबर में समाप्त होने वाला था, लेकिन अब इसे आगे बढ़ा दिया गया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के अनुसार, इस विस्तार से दोनों देशों को जटिल आर्थिक मुद्दों पर गहराई से बातचीत करने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा। हालांकि, इस सकारात्मक कदम के बावजूद कई चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं। टैरिफ, चीन द्वारा की जाने वाली खरीदारी, दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति और तकनीक से जुड़े प्रतिबंधों जैसे मुद्दों पर अभी भी पूर्ण सहमति नहीं बन पाई है। अमेरिका की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, चीन ने 2 करोड़ 50 लाख टन सोयाबीन खरीदने की अपनी प्रतिबद्धता तो पूरी कर ली है, लेकिन लगभग 17 अरब डॉलर के अन्य कृषि उत्पादों की खरीद के मामले में वह अभी भी पीछे चल रहा है। इसके अलावा, अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि चीन से होने वाली रेयर अर्थ यानी दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति भी तय किए गए स्तर से कम रही है।
2. ट्रंप ने जिनपिंग के लिए बदला व्हाइट हाउस का अंदाज
राष्ट्रपति ट्रंप ने शी जिनपिंग की इस यात्रा को व्हाइट हाउस को अपने खास अंदाज में दिखाने के एक बड़े मौके के रूप में इस्तेमाल किया। यह एक तरह से जिनपिंग द्वारा चीन में किए गए स्वागत का जवाब था। अपनी चीन यात्रा के दौरान, जिनपिंग ने ट्रंप को मिंग राजवंश के एक ऐतिहासिक मंदिर और विशेष बगीचे में ले जाकर उनका भव्य स्वागत किया था। इसके जवाब में वॉशिंगटन में आयोजित कार्यक्रम में अमेरिकी सैनिकों ने पुराने अमेरिकी दौर की पारंपरिक पोशाक पहनी थी। व्हाइट हाउस के प्रसिद्ध रोज गार्डन को ट्रंप के गोल्फ क्लब जैसा रूप दिया गया था, जो ट्रंप की अपनी पसंद को दर्शाता है। इस स्वागत समारोह के दौरान आसमान में लड़ाकू विमानों और बॉम्बर विमानों ने भी उड़ान भरी। एक विमान की आवाज इतनी तेज थी कि खुद राष्ट्रपति ट्रंप भी कुछ पलों के लिए चौंक गए, जो इस शक्ति प्रदर्शन की तीव्रता को दर्शाता है।
3. ताइवान पर जिनपिंग की विशेष अपील
बैठक के दौरान ताइवान का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में रहा। शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति ट्रंप से ताइवान के मामले में अत्यंत सावधानी से कदम उठाने की अपील की। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जिनपिंग चाहते हैं कि अमेरिका ताइवान की आजादी का स्पष्ट रूप से विरोध करे। यह मांग अमेरिका की अब तक की कूटनीतिक भाषा से थोड़ी अलग है। सामान्य तौर पर अमेरिका यह कहता रहा है कि वह ताइवान की आजादी का समर्थन नहीं करता है, लेकिन जिनपिंग अब चाहते हैं कि अमेरिका इसका खुलकर विरोध करे। हालांकि, ट्रंप प्रशासन की ओर से फिलहाल अपनी इस पुरानी भाषा या नीति में किसी भी तरह के बदलाव के संकेत नहीं मिले हैं।
4. युद्ध के खतरे और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा पर चर्चा
शी जिनपिंग ने अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को थ्यूसीडाइड्स ट्रैप के सिद्धांत से जोड़कर देखा। यह एक ऐसा विचार है जो बताता है कि जब एक उभरती हुई शक्ति और एक मौजूदा बड़ी शक्ति के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ती है, तो अक्सर युद्ध का खतरा पैदा हो जाता है। जिनपिंग ने जोर देकर कहा कि इस खतरे को टाला जा सकता है और यह अनिवार्य नहीं है। उन्होंने दोनों देशों के बीच नियमित सैन्य बातचीत और किसी भी संभावित संकट से बचने के लिए एक मजबूत व्यवस्था बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। दूसरी ओर, ट्रंप ने भी दोनों देशों के बीच पुराने युद्धकालीन सहयोग का जिक्र किया और कहा कि साझा हितों वाले क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं, जिससे वैश्विक स्थिरता बनी रहे।
5. एआई को लेकर दोनों देशों की अलग-अलग सोच
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच विचारों का अंतर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने एआई को सुपर इंटेलिजेंस यानी SI कहने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि वह इस क्षेत्र में नए और जटिल नियम जोड़ने के बजाय न्याय विभाग की निगरानी और मौजूदा व्यवस्था पर अधिक भरोसा करना चाहते हैं और इसके विपरीत, शी जिनपिंग ने कहा कि चूंकि अमेरिका और चीन एआई के क्षेत्र में दुनिया के दो सबसे प्रमुख देश हैं, इसलिए यह उनकी जिम्मेदारी है कि वे इसके विकास को एक नियंत्रित और सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाएं। जिनपिंग का मानना है कि एआई का इस्तेमाल पूरी तरह से लोगों के फायदे के लिए होना चाहिए और इसका विकास हमेशा इंसानों के नियंत्रण में रहना चाहिए, ताकि किसी भी तरह के अनपेक्षित खतरे से बचा जा सके।
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