ट्रंप ने मध्यस्थ देशों की लिस्ट से हटाया पाकिस्तान का नाम, इस्लामाबाद ने दी सफाई
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मध्यस्थों की सूची में पाकिस्तान का नाम न लेने पर इस्लामाबाद ने सफाई दी है कि वह अभी भी शांति प्रयासों में सक्रिय है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवालों के बीच इस्लामाबाद ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के संबंधों में शांति स्थापित करने के लिए खाड़ी देशों द्वारा निभाई गई भूमिका की जमकर सराहना की थी। हालांकि, इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जिसके बाद कूटनीतिक हलकों में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान ने कहा है कि वह इस प्रक्रिया में अभी भी पूरी तरह से सक्रिय है और अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है।
दोनों पक्षों के साथ निरंतर संपर्क में है पाकिस्तान
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता राजदूत ताहिर अंद्राबी ने इस मामले पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान दोनों ही पक्षों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है। अंद्राबी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अलग-अलग मुद्दों पर अलग-अलग देश नेतृत्व की भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर व्यापक स्तर पर देखा जाए, तो पाकिस्तान, कतर और अन्य सहयोगी देशों की कोशिशें एक समन्वित और मिलकर चलाए जा रहे प्रयास का हिस्सा हैं। उनका कहना था कि किसी एक सूची में नाम न होने का मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तान की भूमिका समाप्त हो गई है।
मध्यस्थता और सुविधा प्रदाता की भूमिका में अंतर
एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब एक पत्रकार ने सवाल किया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने खाड़ी देशों की तो तारीफ की लेकिन पाकिस्तान का जिक्र तक नहीं किया, तो अंद्राबी ने कूटनीतिक बारीकियों को समझाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी भूमिका निभा रहा है और संबंधित पक्षों के साथ बातचीत का सिलसिला जारी रखे हुए है। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े हालिया गतिरोध का जिक्र किया और अंद्राबी ने तर्क दिया कि ऐसे गंभीर और अचानक पैदा हुए संकटों में औपचारिक मध्यस्थता से ज्यादा महत्वपूर्ण एक ऐसी भूमिका होती है जो बातचीत को आसान बनाए और समाधान की दिशा में संवाद को आगे बढ़ाए।
संकट के समय संवाद का रास्ता खोलना प्राथमिकता
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मध्यस्थता और मददगार भूमिका के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि मध्यस्थता की आवश्यकता तब होती है जब मुद्दे लंबे समय से लंबित हों और उन पर निरंतर चर्चा की जरूरत हो। इसके विपरीत, जब कोई गंभीर संकट अचानक उत्पन्न होता है, तो वहां संवाद को आगे बढ़ाने वाली भूमिका अधिक प्रभावी होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की भूमिका किसी एक घटना तक सीमित नहीं है। लंबे समय तक चलने वाले विवादों में पाकिस्तान मध्यस्थ बन सकता है, लेकिन तात्कालिक संकटों में उसका मुख्य लक्ष्य बातचीत का रास्ता सुगम बनाना होता है।
कतर और ओमान के साथ क्षेत्रीय सहयोग
ताहिर अंद्राबी ने अपने बयान में कतर और ओमान जैसे देशों के साथ सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और कतर के बीच संयुक्त प्रयासों और तकनीकी स्तर की प्रस्तावित बातचीत के ढांचे में पाकिस्तान की सक्रियता को देखा जा सकता है। इन प्रयासों में कई मित्र देशों की साझेदारी शामिल है। उन्होंने ओमान की भूमिका की भी विशेष रूप से सराहना की और कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी क्षेत्र से जुड़े देश के रूप में ओमान ने बहुत ही सकारात्मक और सराहनीय काम किया है। पाकिस्तान ने संकल्प दोहराया कि वह भविष्य में भी अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर क्षेत्रीय शांति के लिए इन प्रयासों को जारी रखेगा।
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