दुनिया से गायब हुआ 1 अरब बैरल तेल, होर्मुज खुलने के बाद भी बढ़ सकती हैं कीमतें
होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी 1 अरब 15 करोड़ बैरल तेल की कमी से दुनिया जूझ रही है। रणनीतिक भंडार 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच इस सप्ताह हुए एक महत्वपूर्ण समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को फिर से खोल दिया गया है और हालांकि, इस कूटनीतिक सफलता के बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया अभी तेल संकट के काले बादलों से पूरी तरह बाहर नहीं निकली है। मध्य पूर्व में पिछले चार महीनों से जारी युद्ध और तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस अवधि के दौरान बाजार में लगभग 1 अरब 15 करोड़ बैरल तेल की भारी कमी दर्ज की गई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की नींव हिला दी है।
आपूर्ति में 1 अरब 15 करोड़ बैरल की भारी गिरावट
प्रसिद्ध एनालिटिक्स कंपनी केपलर (Kpler) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, चार महीने तक चले इस संघर्ष के दौरान दुनिया को कुल 1 अरब 15 करोड़ बैरल तेल की कमी का सामना करना पड़ा। यह आंकड़ा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में तेल की कमी ने बाजार में भारी दबाव पैदा कर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से खाड़ी देशों से होने वाला निर्यात ठप पड़ गया था, जिसके कारण दुनिया भर के देशों को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने सुरक्षित भंडारों का सहारा लेना पड़ा।
ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचे रणनीतिक भंडार
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने चेतावनी जारी की है कि दुनिया के रणनीतिक तेल भंडार 1990 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। अमेरिका की स्थिति और भी गंभीर है, जहां आपातकालीन तेल भंडार 43 साल के सबसे निचले स्तर पर है। G7 सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संकट की गंभीरता पर चर्चा करते हुए कहा कि अगर होर्मुज स्ट्रेट को खोलने में थोड़ी और देरी होती, तो दुनिया के तेल भंडार करीब 4 हफ्तों के भीतर गंभीर संकट की स्थिति में पहुंच सकते थे। कई देशों के व्यावसायिक तेल भंडार भी इस दौरान तेजी से खाली हुए हैं।
कीमतों में उतार-चढ़ाव और भंडारण केंद्रों पर दबाव
युद्ध के चरम पर होने के दौरान ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 126 डॉलर 41 पैसे प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की खबर के बाद कीमतें गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत अस्थायी हो सकती है। पिछले कुछ महीनों में दुनिया के तेल भंडार से लगभग 19 करोड़ बैरल तेल कम हो चुका है। अमेरिका के ओक्लाहोमा में स्थित कुशिंग ऑयल हब जैसे बड़े स्टोरेज सेंटर इस समय भारी दबाव में हैं। वहां तेल का स्तर इतना नीचे चला गया है कि भविष्य में सप्लाई चेन को सुचारू रूप से बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
संकट के तुरंत खत्म न होने के कारण
होर्मुज स्ट्रेट के खुलने का मतलब यह नहीं है कि तेल तुरंत बाजार में उपलब्ध हो जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, तेल की आपूर्ति को सामान्य करने में अभी कई महीने लग सकते हैं। सबसे पहले समुद्री रास्तों को पूरी तरह सुरक्षित बनाना होगा ताकि टैंकर बिना किसी डर के आवाजाही कर सकें और इसके बाद, जो टैंकर रास्ते में रुके हुए थे या वापस बुला लिए गए थे, उन्हें फिर से तैनात करना होगा। साथ ही, तेल उत्पादक देशों को अपना उत्पादन बढ़ाना होगा और फिर उस तेल को दुनिया के विभिन्न कोनों तक पहुंचाना होगा। इस पूरी प्रक्रिया में लगने वाला समय बाजार में अनिश्चितता बनाए रख सकता है।
बाजार का भविष्य और विशेषज्ञों की राय
तेल बाजार के भविष्य को लेकर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार वर्तमान में बहुत अधिक आशावादी है और 1 अरब 15 करोड़ बैरल की वास्तविक कमी को नजरअंदाज कर रहा है। उनका तर्क है कि जब मांग बढ़ेगी और भंडार खाली होंगे, तो कीमतें फिर से आसमान छू सकती हैं। वहीं, दूसरी ओर कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि ओपेक (OPEC) देश उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, जिससे आने वाले समय में आपूर्ति की स्थिति में सुधार हो सकता है। फिलहाल, दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि होर्मुज के खुलने के बाद तेल की आपूर्ति कितनी जल्दी सामान्य हो पाती है।
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