पश्चिम बंगाल विधानसभा का बड़ा एक्शन: 10 बागी TMC विधायकों को अयोग्यता का नोटिस जारी

पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय ने 10 बागी TMC विधायकों को अयोग्यता का नोटिस भेजा है। ऋतब्रत बनर्जी समेत अन्य नेताओं से 7 दिन में जवाब मांगा गया है।

Sep 16, 2026 - 10:35
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पश्चिम बंगाल विधानसभा का बड़ा एक्शन: 10 बागी TMC विधायकों को अयोग्यता का नोटिस जारी

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है, जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आधिकारिक नेतृत्व और बागी गुट के बीच तनातनी अपने चरम पर पहुंच गई है। इस राजनीतिक संघर्ष ने अब एक नया मोड़ ले लिया है क्योंकि पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय ने बागी खेमे से जुड़े 10 विधायकों को औपचारिक नोटिस थमा दिया है। सचिवालय की इस कार्रवाई के बाद राज्य के सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है और यह नोटिस ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट द्वारा दायर की गई उस याचिका के आधार पर जारी किया गया है, जिसमें इन विधायकों को सदन की सदस्यता से अयोग्य ठहराने की पुरजोर अपील की गई है।

एक सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश

विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी किए गए इस नोटिस में सभी 10 बागी विधायकों से एक सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने और जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है। मंगलवार को भेजे गए इस नोटिस ने पार्टी के भीतर जारी वर्चस्व की जंग को अब आधिकारिक कानूनी कार्यवाही में तब्दील कर दिया है। सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि विधायकों को दी गई 7 दिन की समय सीमा के भीतर उन्हें उन आरोपों का जवाब देना होगा, जिनके आधार पर उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की गई है।

नोटिस पाने वाले विधायकों की सूची

विधानसभा सचिवालय की तरफ से जिन विधायकों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें कई बड़े नाम शामिल हैं। इस सूची में सबसे प्रमुख नाम विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी का है। उनके अलावा फिरहाद हकीम, अरूप रॉय, संदीपन साहा, शिउली साहा, अखरुजमान अंसारी, बिप्लब मित्रा, सबीना यास्मीन, जावेद खान और रथिन घोष को भी नोटिस थमाया गया है। इन सभी नेताओं पर पार्टी के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया गया है।

बागी गुट की प्रतिक्रिया और कानूनी स्थिति

नोटिस मिलने के बाद बागी गुट ने भी अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है और विधायक अखरुजमान अंसारी ने मंगलवार की रात को विधानसभा सचिवालय से नोटिस मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि वे इस मामले पर पार्टी के अंदर और अपने कानूनी सलाहकारों के साथ चर्चा करेंगे और वक्त आने पर इसका उचित जवाब देंगे। गौरतलब है कि यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब ममता बनर्जी गुट के उम्मीदवार शोभनदेब भट्टाचार्य ने ऋतब्रत बनर्जी और उनके गुट के 9 अन्य नेताओं को अयोग्य ठहराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

विपक्ष के नेता की नियुक्ति का विवाद

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति का मामला पहले से ही कानूनी पेचीदगियों में फंसा हुआ है। कलकत्ता हाईकोर्ट में इस संबंध में एक केस लंबित है, जहां शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता देने के विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती दी है। इससे पहले, शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने 7 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष रथिन बोस को पत्र लिखकर इन 10 सदस्यों को अयोग्य ठहराने की मांग की थी। इस बीच, ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले मदन मित्रा का ऋतब्रत बनर्जी के कैंप में शामिल होना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजरें विधानसभा सचिवालय को मिलने वाले जवाब पर टिकी हैं।

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