पाकिस्तान सऊदी अरब और तुर्की के रक्षा समझौते पर भारत की पैनी नजर

भारत ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह इस घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रहा है।

Aug 7, 2026 - 21:35
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पाकिस्तान सऊदी अरब और तुर्की के रक्षा समझौते पर भारत की पैनी नजर

भारत ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए नए त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। इस समझौते ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है क्योंकि इसमें एक महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल है जिसके तहत किसी भी एक देश पर हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। क्षेत्रीय तनाव के बीच हुए इस करार को रणनीतिक विशेषज्ञों द्वारा एक संभावित बड़े रक्षा गठबंधन के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

विदेश मंत्रालय की आधिकारिक प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को आयोजित साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान इस त्रिपक्षीय समझौते से जुड़े सवालों के जवाब दिए और उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा घटनाक्रम है जिस पर भारत बहुत करीब से नजर रख रहा है। जायसवाल ने यह भी आश्वासन दिया कि सरकार इस मामले में आगे की जानकारी से सभी को अवगत कराती रहेगी। इसके अलावा, सोमालिया और पाकिस्तान के बीच हुए सुरक्षा समझौते की खबरों पर भी विदेश मंत्रालय ने अपनी सतर्कता जाहिर की और कहा कि भारत इन सभी घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए है।

क्या है मक्का संयुक्त रक्षा समझौता?

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने मिलकर मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच इन तीनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को और अधिक मजबूत करना है और समझौते की सबसे प्रमुख शर्त यह है कि यदि इन तीनों में से किसी भी एक देश पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा और वे सामूहिक रूप से इसका जवाब दे सकते हैं। हालांकि, इस समझौते में फिलहाल किसी विशेष सैन्य कार्रवाई या स्पष्ट सैन्य जिम्मेदारियों का विस्तार से उल्लेख नहीं किया गया है। इसमें मुख्य रूप से क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर शांति, स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई गई है।

क्षेत्रीय तनाव और रणनीतिक समय

यह महत्वपूर्ण समझौता सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान संपन्न हुआ। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। इस तनाव का सीधा असर खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर पड़ा है। सऊदी अरब ने अपने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और तेल प्रतिष्ठानों पर ईरान समर्थित समूहों, जैसे हूती और इराकी मिलिशिया द्वारा किए गए हमलों के बाद अपनी रक्षा साझेदारी को विस्तार देने का फैसला किया है। वहीं, गाजा के मुद्दे पर तुर्की और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और लेबनान से जुड़े संघर्षों ने भी क्षेत्रीय हालात को जटिल बना दिया है।

इस्लामिक नाटो की चर्चा और रणनीतिक निहितार्थ

रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों के बीच इस समझौते को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही थी, जिसे कई बार इस्लामिक नाटो का नाम भी दिया गया है। यह समझौता पिछले साल पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते का ही एक विस्तारित रूप माना जा रहा है। उस समय भी दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले को सामूहिक हमला मानने की बात कही थी। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मई में एक मीडिया इंटरव्यू में संकेत दिया था कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के सुरक्षा सहयोग में तुर्की और कतर जैसे देशों को शामिल किया जा सकता है। उन्होंने तर्क दिया था कि इस तरह का आर्थिक और रक्षा सहयोग क्षेत्र में शांति बनाए रखने और बाहरी देशों पर निर्भरता कम करने में सहायक होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि यह समझौता किसी विशेष देश के खिलाफ नहीं है।

भारत की चिंताएं और सुरक्षा समीक्षा

भारत पहले भी पाकिस्तान और अन्य देशों के बीच होने वाले ऐसे रक्षा समझौतों पर अपनी चिंता व्यक्त कर चुका है। पिछले साल जब पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच द्विपक्षीय समझौता हुआ था, तब भी भारत ने कहा था कि वह इसके रणनीतिक प्रभावों का गहराई से अध्ययन कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने तब कहा था कि यद्यपि यह सऊदी अरब और पाकिस्तान के पुराने संबंधों का एक औपचारिक रूप है, लेकिन भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर इसके पड़ने वाले किसी भी प्रभाव की निरंतर समीक्षा करता रहेगा। भारत सरकार ने दोहराया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने और हर क्षेत्र में व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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